पोखरा एयरपोर्ट घोटाला: पूर्व वित्त मंत्री कार्की समेत 11 अधिकारियों पर केस, चीनी कंपनी पर ₹3.62 अरब के नुकसान का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल की भ्रष्टाचार विरोधी संस्था कमीशन फॉर इन्वेस्टिगेशन ऑफ एब्यूज ऑफ अथॉरिटी (CIAA) ने 7 मई को विशेष अदालत में पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण से जुड़ा एक नया भ्रष्टाचार मामला दर्ज किया। इसमें पूर्व वित्त मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की, कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और चीनी निर्माण कंपनी चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। यह डेढ़ साल में इस परियोजना से जुड़ा चौथा मामला है।
मुख्य घटनाक्रम
CIAA के अनुसार, इस मामले में कुल 11 सरकारी अधिकारी आरोपी हैं, जिनमें पूर्व सचिव, संयुक्त सचिव और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं। कार्की इस घोटाले में नामजद किए गए छठे पूर्व मंत्री हैं। इससे पहले पूर्व मंत्री भीम आचार्य, राम कुमार श्रेष्ठ, दीपक अमात्य, राम शरण महत और पोस्ट बहादुर बोगटी — जिनका निधन हो चुका है — के नाम भी इस मामले में आ चुके हैं।
चीनी कंपनी पर आरोप
चीनी ठेकेदार कंपनी के चेयरमैन वांग बो और प्रोजेक्ट मैनेजर यांग झिगांग पर आरोप है कि उन्होंने भ्रष्टाचार में सरकारी अधिकारियों की सक्रिय मदद की। CIAA का कहना है कि सरकारी अधिकारियों और चाइना सीएएमसी ने मिलकर नियमों के विरुद्ध जाकर कंपनी को टैक्स और कस्टम ड्यूटी में गैरकानूनी छूट दी। गौरतलब है कि सिविल एविएशन अथॉरिटी ऑफ नेपाल और चीनी कंपनी के बीच मूल अनुबंध में ये कर-भुगतान कंपनी की जिम्मेदारी थी, लेकिन बाद में एक अलग समझौते के ज़रिये उसे 'डबल फायदा' दिलाया गया।
सरकार को हुआ नुकसान
CIAA के अनुसार, इस अवैध छूट से नेपाल सरकार को लगभग 3.62 अरब नेपाली रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। यह परियोजना चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक से 21.596 करोड़ अमेरिकी डॉलर की फंडिंग से बनाई गई थी और इसका निर्माण चाइना सीएएमसी ने किया था।
हवाई अड्डे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी नेपाल में बना पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा व्यावहारिक रूप से एक 'दिखावटी परियोजना' बनकर रह गया है, क्योंकि यहाँ से अब तक कोई नियमित उड़ानें संचालित नहीं हो रही हैं। करोड़ों डॉलर की लागत से बना यह हवाई अड्डा अपनी संचालन क्षमता के उपयोग में बुरी तरह विफल रहा है।
आगे क्या होगा
यह चौथा मामला दर्ज होने के साथ ही इस घोटाले की जाँच का दायरा और व्यापक हो गया है। विशेष अदालत में मामला दर्ज होने के बाद अब सुनवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। नेपाल में चीनी वित्त पोषित बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की पारदर्शिता को लेकर यह मामला एक बड़े सवाल के रूप में उभर रहा है।