21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यमन में 24 घंटे में 28 हवाई हमले: हूती प्रवक्ता का दावा, F-15 और टाइफून विमानों ने तीन प्रांतों को बनाया निशाना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यमन में 24 घंटे में 28 हवाई हमले: हूती प्रवक्ता का दावा, F-15 और टाइफून विमानों ने तीन प्रांतों को बनाया निशाना

सारांश

यमन में 24 घंटों के भीतर 28 हवाई हमलों के हूती दावों के बीच, मोचा बंदरगाह और मय्यून द्वीप पर उनके कब्जे ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को खतरे में डाल दिया है — 2022 के युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य बढ़त मानी जा रही है।

मुख्य बातें

हूती प्रवक्ता याह्या सारीया ने दावा किया कि 21 सितंबर 2026 को पिछले 24 घंटों में यमन के तीन प्रांतों में 28 हवाई हमले हुए।
कथित तौर पर सऊदी अरब के खामिस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़े F-15 व टाइफून विमानों ने ताइज, मारिब और अल-जौफ प्रांतों को निशाना बनाया।
हूती दावों के अनुसार, ताजा संघर्ष शुरू होने के बाद से कुल 760 हवाई हमले हो चुके हैं; सऊदी अरब की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं।
हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर को मोचा बंदरगाह और 11 सितंबर को रणनीतिक मय्यून द्वीप पर कब्जा किया।
सरकारी सेना ने पश्चिमी ताइज में कुछ ठिकाने वापस लिए, लेकिन समग्र मोर्चे में कोई बड़ा बदलाव नहीं।
यह बढ़त 2022 के संयुक्त राष्ट्र -मध्यस्थ युद्धविराम के बाद की सबसे बड़ी हूती सैन्य प्रगति मानी जा रही है।

हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारीया ने रविवार, 21 सितंबर 2026 को दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान यमन के तीन प्रांतों में 28 हवाई हमले किए गए। कथित तौर पर ये हमले सऊदी अरब के खामिस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़ान भरने वाले F-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिए गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यमन के कई मोर्चों पर हूती लड़ाकों और सरकारी सेनाओं के बीच भीषण जमीनी लड़ाई जारी है।

हमलों का दायरा और प्रभावित प्रांत

सारीया के बयान के अनुसार, ये हवाई हमले दक्षिण-पश्चिमी यमन के ताइज, तेल से समृद्ध उत्तर-पूर्वी प्रांत मारिब और उत्तरी अल-जौफ प्रांत में किए गए। हूती-नियंत्रित अल-मसीरा टीवी ने इससे पहले बताया था कि अल-जौफ में एक हवाई हमले में टेलीकम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाया गया।

वहीं, सऊदी अरब की सीमा से सटे उत्तरी सादा प्रांत के कुछ इलाकों में तोपों से गोलाबारी की खबरें भी सामने आई हैं। सारीया ने यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कुल 760 हवाई हमले किए जा चुके हैं। सऊदी अरब की ओर से इन ताजा दावों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जमीनी स्थिति और मोर्चे पर बदलाव

एक सरकारी सैन्य सूत्र ने रविवार को बताया कि सरकारी सेना ने पश्चिमी ताइज में कई ठिकानों पर दोबारा कब्जा कर लिया है। हालाँकि, भीषण लड़ाई के बावजूद समग्र मोर्चे की स्थिति में कोई निर्णायक बदलाव नहीं आया है और नियंत्रण एक पक्ष से दूसरे पक्ष के बीच बदलता रहा है।

गौरतलब है कि हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर को ताइज प्रांत के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया था। इसके अगले ही दिन, 11 सितंबर को, उन्होंने धुबाब और रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित मय्यून द्वीप पर भी अपना नियंत्रण कायम कर लिया।

बाब अल-मंदेब की रणनीतिक अहमियत

बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस जलडमरूमध्य से होकर प्रतिदिन भारी मात्रा में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज गुजरते हैं। हूती समूह की इस इलाके में बढ़त ने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा की हैं। यमन की सरकारी सेना अब इस अहम जलमार्ग की ओर जाने वाले पहाड़ी इलाकों में हूती लड़ाकों की और अधिक प्रगति रोकने की कोशिशों में जुटी है।

संघर्ष की पृष्ठभूमि

यमन का यह संघर्ष 2014 के अंत में तब शुरू हुआ था, जब हूती समूह ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।

2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद से यमन में बड़े पैमाने की लड़ाई काफी हद तक थम गई थी। लेकिन हूती लड़ाकों की हालिया तेज सैन्य बढ़त को उस युद्धविराम के बाद से अब तक की सबसे बड़ी जमीनी प्रगति माना जा रहा है, जो इस संघर्ष में एक नए और खतरनाक अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए सीधा खतरा है। गौरतलब है कि 2022 के युद्धविराम को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने यमन में शांति की नींव के रूप में देखा था, लेकिन जमीनी सच्चाई उस उम्मीद को चुनौती दे रही है। 760 हवाई हमलों का हूती दावा सत्यापित नहीं है — सऊदी अरब की चुप्पी न तो खंडन है, न पुष्टि — और इस अनिश्चितता में ही असली कहानी छिपी है। यह संघर्ष अब केवल यमन का आंतरिक मामला नहीं रहा; लाल सागर के व्यापारिक मार्गों पर इसका असर भारत सहित कई देशों के लिए सीधे आर्थिक निहितार्थ रखता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हूती समूह ने यमन में 28 हवाई हमलों का दावा कब और किस आधार पर किया?
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारीया ने 21 सितंबर 2026 को बयान जारी कर कहा कि पिछले 24 घंटों में यमन के ताइज, मारिब और अल-जौफ प्रांतों में 28 हवाई हमले हुए। उनके अनुसार ये हमले सऊदी अरब के खामिस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़े F-15 और टाइफून विमानों ने किए। सऊदी अरब ने इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
हूती लड़ाकों ने हाल ही में कौन से रणनीतिक इलाके जीते हैं?
हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर 2026 को ताइज प्रांत के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया। अगले दिन 11 सितंबर को उन्होंने धुबाब और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित मय्यून द्वीप भी अपने नियंत्रण में ले लिया। इन इलाकों की रणनीतिक अहमियत इसलिए है क्योंकि ये वैश्विक व्यापार के लिए महत्त्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलमार्ग के निकट हैं।
यमन का यह संघर्ष कब शुरू हुआ और इसमें कौन से पक्ष शामिल हैं?
यमन का संघर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ जब हूती समूह ने राजधानी सना और उत्तरी यमन पर कब्जा किया। मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में युद्धविराम हुआ था, लेकिन लड़ाई फिर से तेज हो गई है।
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीक हूती बढ़त क्यों खतरनाक मानी जा रही है?
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वह रणनीतिक जलडमरूमध्य है जिससे होकर भारी मात्रा में तेल टैंकर और व्यापारिक जहाज लाल सागर से गुजरते हैं। इस इलाके पर हूती नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सीधा खतरा पैदा करता है। यमन सरकार की सेना अब इस महत्त्वपूर्ण मार्ग की ओर जाने वाले पहाड़ी इलाकों में हूती प्रगति रोकने की कोशिश कर रही है।
2022 के युद्धविराम के बाद यमन में स्थिति कैसी रही है?
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद यमन में बड़े स्तर की लड़ाई काफी हद तक थम गई थी। लेकिन हाल में हूती लड़ाकों की तेज सैन्य बढ़त — मोचा, मय्यून द्वीप और कई मोर्चों पर प्रगति — को उस युद्धविराम के बाद सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले