यमन में 24 घंटे में 28 हवाई हमले: हूती प्रवक्ता का दावा, F-15 और टाइफून विमानों ने तीन प्रांतों को बनाया निशाना
सारांश
मुख्य बातें
हूती समूह के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारीया ने रविवार, 21 सितंबर 2026 को दावा किया कि पिछले 24 घंटों के दौरान यमन के तीन प्रांतों में 28 हवाई हमले किए गए। कथित तौर पर ये हमले सऊदी अरब के खामिस मुशैत और ताइफ एयरबेस से उड़ान भरने वाले F-15 और टाइफून लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिए गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यमन के कई मोर्चों पर हूती लड़ाकों और सरकारी सेनाओं के बीच भीषण जमीनी लड़ाई जारी है।
हमलों का दायरा और प्रभावित प्रांत
सारीया के बयान के अनुसार, ये हवाई हमले दक्षिण-पश्चिमी यमन के ताइज, तेल से समृद्ध उत्तर-पूर्वी प्रांत मारिब और उत्तरी अल-जौफ प्रांत में किए गए। हूती-नियंत्रित अल-मसीरा टीवी ने इससे पहले बताया था कि अल-जौफ में एक हवाई हमले में टेलीकम्युनिकेशन टावर को निशाना बनाया गया।
वहीं, सऊदी अरब की सीमा से सटे उत्तरी सादा प्रांत के कुछ इलाकों में तोपों से गोलाबारी की खबरें भी सामने आई हैं। सारीया ने यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक कुल 760 हवाई हमले किए जा चुके हैं। सऊदी अरब की ओर से इन ताजा दावों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जमीनी स्थिति और मोर्चे पर बदलाव
एक सरकारी सैन्य सूत्र ने रविवार को बताया कि सरकारी सेना ने पश्चिमी ताइज में कई ठिकानों पर दोबारा कब्जा कर लिया है। हालाँकि, भीषण लड़ाई के बावजूद समग्र मोर्चे की स्थिति में कोई निर्णायक बदलाव नहीं आया है और नियंत्रण एक पक्ष से दूसरे पक्ष के बीच बदलता रहा है।
गौरतलब है कि हूती लड़ाकों ने 10 सितंबर को ताइज प्रांत के बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया था। इसके अगले ही दिन, 11 सितंबर को, उन्होंने धुबाब और रणनीतिक बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित मय्यून द्वीप पर भी अपना नियंत्रण कायम कर लिया।
बाब अल-मंदेब की रणनीतिक अहमियत
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस जलडमरूमध्य से होकर प्रतिदिन भारी मात्रा में तेल टैंकर और मालवाहक जहाज गुजरते हैं। हूती समूह की इस इलाके में बढ़त ने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ पैदा की हैं। यमन की सरकारी सेना अब इस अहम जलमार्ग की ओर जाने वाले पहाड़ी इलाकों में हूती लड़ाकों की और अधिक प्रगति रोकने की कोशिशों में जुटी है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन का यह संघर्ष 2014 के अंत में तब शुरू हुआ था, जब हूती समूह ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया था।
2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद से यमन में बड़े पैमाने की लड़ाई काफी हद तक थम गई थी। लेकिन हूती लड़ाकों की हालिया तेज सैन्य बढ़त को उस युद्धविराम के बाद से अब तक की सबसे बड़ी जमीनी प्रगति माना जा रहा है, जो इस संघर्ष में एक नए और खतरनाक अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही है।