भारत बना आर्मेनिया का प्रमुख सैन्य-तकनीकी साझेदार, रक्षा सचिव सिंह ने येरेवन में की अहम बैठकें
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 18 अगस्त 2026 को येरेवन में आर्मेनिया के शीर्ष रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की, जिसके बाद भारत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि भारत अब आर्मेनिया के सैन्य-तकनीकी सहयोग में उसका सबसे प्रमुख साझेदार बनकर उभरा है। दोनों देशों के बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता पर समान दृष्टिकोण इस बढ़ती साझेदारी की नींव बताए जा रहे हैं।
मुख्य बैठकें और चर्चाएँ
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने येरेवन में आर्मेनिया के उप विदेश मंत्री मनात्सकान सफार्यान के साथ सार्थक चर्चा की, जो भारत-आर्मेनिया रक्षा साझेदारी की बढ़ती गहराई पर केंद्रित रही। इसके अतिरिक्त उन्होंने आर्मेनिया के रक्षा उप मंत्री कारेन ब्रुत्यान से भी मुलाकात की और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सिंह और ब्रुत्यान ने क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, रक्षा औद्योगिक सहयोग और अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने आपसी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
वाजगेन सरगस्यान मिलिट्री अकादमी का दौरा
बैठकों से पहले सिंह ने आर्मेनिया की वाजगेन सरगस्यान मिलिट्री अकादमी का दौरा किया और नई दिल्ली के सहयोग से स्थापित आईटी लैब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें भारत द्वारा आपूर्ति की गई हथियार प्रणालियों की भी जानकारी दी गई।
अकादमी में सिंह ने संकाय, अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए चरित्र निर्माण, निर्णय क्षमता और नेतृत्व कौशल विकसित करने में सैन्य शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मिलिट्री अकादमी के प्रमुख मेजर जनरल आर्सेन मांगसर्यान से भी मुलाकात कर क्षमता निर्माण के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया।
रक्षा खरीद विविधीकरण की रणनीति
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आर्मेनिया अपनी रक्षा खरीद में विविधता लाने का प्रयास कर रहा है और इस प्रक्रिया में भारत एक स्वाभाविक साझेदार के रूप में सामने आया है। यह ऐसे समय में आया है जब आर्मेनिया पारंपरिक रूप से रूस पर निर्भर रही अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को पुनर्गठित कर रहा है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण निर्यात किए हैं।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच बहुपक्षवाद और रणनीतिक स्वायत्तता पर समान विचार इस साझेदारी को एक मज़बूत वैचारिक आधार देते हैं।
प्रशिक्षण संस्थानों के बीच संपर्क को बढ़ावा
रक्षा सचिव ने भारत और आर्मेनिया के रक्षा प्रशिक्षण संस्थानों के बीच और अधिक संपर्क बनाने को प्रोत्साहित किया ताकि दोनों देशों की रक्षा साझेदारी को व्यापक और टिकाऊ आधार मिल सके। आने वाले समय में इस साझेदारी के और गहरे होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।