भारत-बेल्जियम द्विपक्षीय व्यापार 5 वर्षों में दोगुना करने पर सहमति, PM मोदी और बार्ट डी वेवर की शिखर वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के बीच 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय शिखर वार्ता में दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का संकल्प लिया। फरवरी 2025 में पद संभालने के बाद यह डी वेवर की पहली भारत यात्रा है, जो मोदी के निमंत्रण पर 2 से 4 सितंबर तक चल रही है।
दौरे का संदर्भ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकेन के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों का एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल भी भारत आया है। दोनों नेताओं ने याद किया कि बेल्जियम 1947 में भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने वाले पहले यूरोपीय देशों में से एक था। 2027 में इस राजनयिक साझेदारी की 80वीं वर्षगांठ दोनों देशों को संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का अवसर देगी।
दोनों नेताओं ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्लैंडर्स फील्ड्स में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों के बलिदान को भी श्रद्धांजलि अर्पित की — यह ऐतिहासिक स्मरण दोनों देशों के बीच गहरे मानवीय जुड़ाव को रेखांकित करता है।
व्यापार और निवेश: प्रमुख क्षेत्र
दुनिया की 24वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बेल्जियम और आने वाले वर्षों में 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर चल रहे भारत के बीच पूरकताओं को देखते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों ने सहयोग के प्रमुख क्षेत्र चिह्नित किए। इनमें सेमीकंडक्टर, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा औद्योगिक सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों का शोधन एवं पुनर्चक्रण, परमाणु ऊर्जा और क्लीनटेक शामिल हैं।
मार्च 2025 में राजकुमारी एस्ट्रिड के नेतृत्व में हुए सफल बेल्जियम आर्थिक मिशन पर दोनों नेताओं ने संतोष व्यक्त किया। इस मिशन ने जीवन विज्ञान, ऊर्जा, रक्षा, वैमानिकी, अंतरिक्ष, रसद, डिजिटल प्रौद्योगिकी और महिला आर्थिक सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारियों की नींव रखी।
हीरा व्यापार के संदर्भ में दोनों नेताओं ने एंटवर्प को मुंबई और सूरत से जोड़ने वाली ऐतिहासिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर सहमति जताई। समुद्री और बंदरगाह सहयोग के अंतर्गत बंदरगाह विकास, रसद, ड्रेजिंग और अपतटीय पवन ऊर्जा ढाँचे में बेल्जियम की विशेषज्ञता का लाभ उठाने पर भी चर्चा हुई।
भारत-ईयू रणनीतिक साझेदारी और बहुपक्षीय मुद्दे
दोनों प्रधानमंत्रियों ने ईयू-भारत निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत समझौते पर वार्ता शीघ्र पूरी करने की आवश्यकता पर बल दिया। जुलाई 2026 में ब्रसेल्स में हुई भारत-ईयू व्यापार और तकनीकी काउंसिल की मंत्रिस्तरीय बैठक की प्रगति का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों ने 2030 के लिए संयुक्त भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडे का समर्थन किया।
बेल्जियम ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी को अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने सुधरे और विस्तारित यूएनएससी की तत्काल आवश्यकता पर एकमत होकर जोर दिया।
अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेल्गो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (BINA) के माध्यम से खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में सहयोग को गहरा करने का भी स्वागत किया गया।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रुख
यूक्रेन संघर्ष पर दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप बातचीत और कूटनीति के जरिए व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की दिशा में प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी दोनों नेताओं ने हालिया घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श किया।
आगे की राह
दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, ग्रीन ट्रांजिशन, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क के लिए नियमित और व्यापक संस्थागत तंत्र विकसित करने पर सहमति जताई। बेल्जियम की क्षेत्रीय व्यापार एवं निवेश एजेंसियों सहित नियमित उच्चस्तरीय आदान-प्रदान जारी रखने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई। यह दौरा दोनों देशों के बीच एक नए और अधिक गहन आर्थिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।