भारत-कंबोडिया: व्यापार और निवेश में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण वार्ता

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भारत-कंबोडिया: व्यापार और निवेश में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण वार्ता

सारांश

भारत और कंबोडिया ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण बैठक की। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और विरासत संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में चर्चा की। क्या यह सहयोग दीर्घकालिक होगा?

Key Takeaways

  • भारत और कंबोडिया ने द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बैठक की।
  • बैठक में व्यापार, निवेश, और विरासत संरक्षण पर चर्चा की गई।
  • कंबोडिया के साथ सैन्य सहयोग को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
  • भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत कंबोडिया एक महत्वपूर्ण साझेदार है।
  • विरासत संरक्षण दोनों देशों के सहयोग का एक मुख्य स्तंभ है।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत और कंबोडिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में दोनों देशों ने व्यापार और निवेश, विरासत संरक्षण तथा विकास साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय के पूर्वी मामलों के सचिव पी. कुमारन ने कंबोडियाई प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व खी सोवनरताना ने किया, जो कंबोडिया के विदेश और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय के सचिव हैं। इस बैठक में भारत की कंबोडिया के लिए क्षमता निर्माण पहलों की समीक्षा भी की गई, जिसमें सुषमा स्वराज इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन सर्विस में कंबोडियाई राजनयिकों के प्रशिक्षण पर चर्चा हुई।

बैठक में दोनों पक्षों ने सहमति दी कि सहयोग को केवल औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि व्यावहारिक और दीर्घकालिक रूप से विकसित किया जाना चाहिए। भारत ने कंबोडिया के साथ संस्थागत क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और विभिन्न विकास परियोजनाओं में सहयोग करने का प्रयास किया है। बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा, और प्रशिक्षण से जुड़े क्षेत्रों में भी भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है।

पिछले महीने नामपेन्ह में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य बातचीत हुई थी जिसमें भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) मेजर जनरल आकाश जौहर ने रॉयल कंबोडियन आर्मी के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल माओ सोफान से मुलाकात की।

इन वार्ताओं में संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने, प्रशिक्षण सहयोग का दायरा विस्तृत करने और रक्षा क्षेत्र में समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों ने सैन्य क्षमता निर्माण, पेशेवर सैन्य शिक्षा और अनुभवों के आदान-प्रदान को रक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा। कंबोडिया ने भारतीय सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण स्तर और पेशेवर दक्षता की सराहना की और भविष्य में अधिक सैन्य कर्मियों को भारत भेजने में रुचि दिखाई।

भारत और कंबोडिया के संबंध इतिहास में हमेशा सौहार्दपूर्ण रहे हैं। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत, कंबोडिया एक महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है। दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत अपने संबंधों को मजबूती प्रदान करने के लिए कंबोडिया जैसे देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रक्षा सहयोग को बढ़ा रहा है।

इसके अलावा, भारत और कंबोडिया के संबंध केवल सामरिक और आर्थिक ही नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी मजबूत हैं। कंबोडिया में प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि विरासत संरक्षण दोनों देशों के सहयोग का एक मुख्य स्तंभ बन गया है।

Point of View

NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत और कंबोडिया के बीच कौन से प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है?
भारत और कंबोडिया के बीच व्यापार, निवेश, विरासत संरक्षण और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई है।
कंबोडिया में भारत की क्या भूमिका है?
भारत ने कंबोडिया के लिए क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
क्या भारत और कंबोडिया के बीच सैन्य सहयोग भी हो रहा है?
हाँ, हाल ही में दोनों देशों के बीच सैन्य बातचीत हुई, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।
भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति का कंबोडिया के साथ क्या संबंध है?
भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत, कंबोडिया एक महत्वपूर्ण साझेदार है, जिसका संबंध राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग में है।
भारत और कंबोडिया के संबंधों में विरासत संरक्षण का क्या महत्व है?
कंबोडिया में प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो दोनों देशों के सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ है।
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