भारत-कनाडा रक्षा संबंध मज़बूत: समुद्री सहयोग और क्षमता-निर्माण पर ओटावा में अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत और कनाडा के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक और कनाडा के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी के बीच ओटावा में हुई बैठक में समुद्री सहयोग, रक्षा क्षमता-निर्माण और प्रशिक्षण साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। भारतीय उच्चायोग ने 28 जुलाई 2026 को यह जानकारी साझा की।
बैठक में क्या हुई चर्चा
दोनों पक्षों ने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया — समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करना, रक्षा क्षमता-निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करना। भारतीय उच्चायोग के अनुसार, दोनों देशों ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और मज़बूत द्विपक्षीय जुड़ाव के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई।
जयशंकर-आनंद मुलाकात की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पिछले सप्ताह मनीला में अपनी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद से मुलाकात की थी। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'मंगलवार दोपहर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ हुई चर्चा के लिए धन्यवाद। भारत-कनाडा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। हमारी बातचीत हमारे प्रधानमंत्रियों द्वारा तय किए गए संबंधों के लक्ष्यों को पाने पर फोकस थी।' उन्होंने रेखांकित किया कि यह वार्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा तय किए गए संबंध-लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने का हिस्सा है।
मोदी-कार्नी की जी7 बैठक का संदर्भ
गौरतलब है कि पिछले महीने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी ने द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के संबंधों की व्यापक समीक्षा की थी। मोदी ने एक्स पर लिखा, 'एवियन जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री कार्नी से मिलकर बहुत खुशी हुई। एक साल से भी कम समय में यह हमारी चौथी मुलाकात है, जो भारत-कनाडा के मज़बूत संबंधों के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।' उन्होंने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और लोगों के बीच संबंधों में बड़े पैमाने पर सहयोग की चर्चा का उल्लेख किया।
द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद
भारत और कनाडा के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता पर टिके हैं। दोनों देशों के बीच मंत्रिस्तरीय रणनीतिक, व्यापार एवं ऊर्जा संवाद; विदेश कार्यालय परामर्श; पर्यावरण पर संयुक्त समिति बैठक; और क्षेत्र-विशेष संयुक्त कार्य समूह जैसे संस्थागत संवाद-तंत्र सक्रिय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश पिछले कुछ वर्षों के कूटनीतिक तनाव के बाद रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या
रक्षा और समुद्री क्षेत्र में इस नई सक्रियता से संकेत मिलता है कि दोनों देश व्यापार और ऊर्जा के अलावा सुरक्षा सहयोग को भी द्विपक्षीय एजेंडे में प्रमुखता देने पर सहमत हैं। आने वाले महीनों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों और समुद्री सहयोग के ठोस ढाँचे पर आगे की बातचीत अपेक्षित है।