भारत और 29 देशों की लेबनान में शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए अपील
सारांश
Key Takeaways
- संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए भारत ने अपील की है।
- यह अपील ईरान युद्ध के बाद के तनाव के बीच की गई है।
- यूएनआईफिल में 7,438 सैनिक तैनात हैं, जिनमें 642 भारतीय हैं।
- शांति मिशन 1978 में स्थापित किया गया था।
- सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। ईरान युद्ध के उपरांत उत्पन्न हालात में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव में वृद्धि हो गई है। इस संदर्भ में, भारत ने लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
भारत और 29 अन्य देशों ने बुधवार (स्थानीय समय) को एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि सभी पक्षों को हर परिस्थिति में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूएनआईफिल) के सैनिकों और उनके ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होना आवश्यक है।
बयान में यह भी कहा गया कि शांति सैनिकों को किसी भी प्रकार के हमले या धमकी का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, यूएनआईफिल के शांति सैनिकों की साहस, पेशेवरता और दायित्वों के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की गई।
यूएनआईफिल में कुल 7,438 सैनिक तैनात हैं, जिनमें 642 भारतीय शांति सैनिक शामिल हैं। इस प्रकार, भारतीय सैनिकों की टुकड़ी यहां की दूसरी सबसे बड़ी टुकड़ी है।
यह शांति मिशन 1978 में स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वहां संघर्ष विराम की निगरानी करना और लेबनान सरकार को दक्षिणी लेबनान के क्षेत्रों पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने में सहायता प्रदान करना है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश की उपस्थिति में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि जेरोम बोनाफोंट ने सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले यह संयुक्त बयान पढ़ा। इस बैठक में लेबनान की स्थिति पर चर्चा की गई।
यूएनआईफिल के अनुसार, पिछले सप्ताह दक्षिणी लेबनान में एक ठिकाने पर भारी गोलीबारी के दौरान घाना के तीन शांति सैनिक घायल हुए थे।
इस हमले की निंदा करते हुए बयान में कहा गया कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है और अभी तक किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
बयान में हिज़्बुल्लाह की भी कड़ी आलोचना की गई और कहा गया कि इज़राइल के खिलाफ ईरान के हमलों में शामिल होने का उनका निर्णय अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना था। इससे लेबनान को ऐसे युद्ध में खींचा गया, जिसे न तो वहां की सरकार चाहती थी और न ही वहां की जनता।
इज़राइल के बारे में भी बयान में कहा गया कि उसे नागरिक ढांचे और घनी आबादी वाले इलाकों पर हमले से बचना चाहिए और लेबनान की संप्रभुता तथा उसकी क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
बयान में यह भी कहा गया कि सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए और नागरिकों तथा नागरिक ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के अवर महासचिव जीन-पियरे लैक्रोइक्स ने सुरक्षा परिषद को बताया कि यूएनआईफिल इस समय अत्यंत खतरनाक और अस्थिर माहौल में अपना कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि 1 मार्च से अब तक यूएनआईफिल ने ब्लू लाइन के दोनों ओर से 4,120 हमले या मिसाइलों की आवाजाही दर्ज की है। ब्लू लाइन वह सीमा है जो इजरायल और लेबनान को अलग करती है।
उन्होंने बताया कि हिजबुल्लाह रोज़ाना ब्लू लाइन के पार इजरायल और सीरिया के कब्जे वाले गोलान क्षेत्र में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, यूएनआईफिल ने यह भी देखा है कि इजरायल की रक्षा बलों की इकाइयों ने कई स्थानों पर लेबनान की सीमा में घुसपैठ की है। इसके अलावा, इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के बीच सीधी झड़पें भी हुई हैं।