भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप जल्द होगा गठित, राजदूत अंशुमन गौर ने स्पीकर फॉर्स्टहोफर से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
भारत और हंगरी के बीच संसदीय संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। हंगरी में भारत के राजदूत अंशुमन गौर ने मंगलवार, 23 जून 2026 को बुडापेस्ट में हंगरी की नेशनल असेंबली की स्पीकर एग्नेस फॉर्स्टहोफर से मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने, संसदीय आदान-प्रदान बढ़ाने और जल्द ही भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप की स्थापना करने पर सहमति बनी।
मुलाकात में क्या हुई चर्चा
हंगरी स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा की। दूतावास ने लिखा कि बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग, संसदीय आदान-प्रदान और लोकतंत्र तथा संसदीय व्यवस्था में दोनों देशों की साझा आस्था जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। दूतावास ने यह भी बताया कि जल्द ही भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप की औपचारिक स्थापना की जाएगी, जो दोनों देशों के संसदीय संबंधों को एक संस्थागत रूप देगा।
टैगोर वर्ष और बालाटनफुरेड का ऐतिहासिक जुड़ाव
इस मुलाकात में एक विशेष सांस्कृतिक आयाम भी उभरा। दूतावास ने बताया कि स्पीकर एग्नेस फॉर्स्टहोफर का संबंध बालाटनफुरेड शहर से है — वही शहर जिसे इस वर्ष विशेष महत्व प्राप्त है। भारत 2026 में 'टैगोर वर्ष' मना रहा है, जो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की बालाटनफुरेड यात्रा की 100वीं वर्षगांठ है। यह ऐतिहासिक जुड़ाव दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को रेखांकित करता है।
हंगरी में राजनीतिक बदलाव और भारत की प्रतिक्रिया
गौरतलब है कि 12 अप्रैल 2026 को हुए हंगरी के संसदीय चुनावों में पीटर मग्यार की टिस्जा पार्टी ने बड़ी बहुमत से जीत हासिल की, जिससे विक्टर ओर्बान के 16 वर्षों के शासन का अंत हो गया। ओर्बान की फिडेस्ज़ पार्टी ने लगभग सभी मतों की गिनती के बाद हार स्वीकार कर ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल में एक्स पर पोस्ट कर पीटर मग्यार और टिस्जा पार्टी को जीत की बधाई दी थी। मोदी ने लिखा था, 'भारत और हंगरी के बीच गहरी दोस्ती, साझा मूल्य और आपसी सम्मान का मज़बूत रिश्ता है। मैं दोनों देशों के सहयोग को और मज़बूत बनाने तथा भारत-यूरोपीय संघ (EU) रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का इच्छुक हूँ।'
भारत-हंगरी संबंधों की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हंगरी में सत्ता-परिवर्तन के बाद भारत की कूटनीतिक सक्रियता स्पष्ट रूप से बढ़ी है। शीत युद्ध के बाद हंगरी की विदेश नीति में कई बदलाव आने के बावजूद दोनों देशों के संबंध हमेशा करीबी और आपसी सम्मान पर आधारित रहे हैं। पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप का गठन इस रिश्ते को एक नई संस्थागत पहचान देगा।
आगे क्या
भारत-हंगरी पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप की औपचारिक स्थापना की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन दूतावास के अनुसार यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी। यह कदम दोनों देशों के बीच न केवल राजनीतिक, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक सहयोग को भी नई गति दे सकता है।