अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर भारत सख्त: MEA ने कहा — कानून के तहत होगी कार्रवाई, 2,680 मामले सत्यापन में लंबित
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 5 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों — जिनमें बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं — के खिलाफ मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में यह जानकारी देते हुए कहा कि नागरिकता सत्यापन पूर्ण होते ही निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
सरकार का स्पष्ट रुख
रंधीर जायसवाल ने कहा, 'भारत में यदि कोई विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा है, चाहे वह बांग्लादेश का ही क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। जहाँ तक ऐसे लोगों के निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सवाल है, इसके लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में अवैध प्रवासियों से निपटने के लिए एक सुस्पष्ट कानूनी व्यवस्था पहले से उपलब्ध है।
2,680 से अधिक मामले सत्यापन के लिए भेजे
जायसवाल के अनुसार, भारत ने संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के 2,680 से अधिक मामले राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए बांग्लादेश को भेजे हैं। उन्होंने बताया, '2,680 से अधिक मामलों में राष्ट्रीयता सत्यापन का अनुरोध बांग्लादेश को भेजा गया है। सत्यापन पूरा होने के बाद हम इन बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित करने की स्थिति में होंगे।'
गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह भी यही आँकड़ा सार्वजनिक किया था, जो इस मुद्दे पर सरकार की लगातार सक्रियता को दर्शाता है।
सत्यापन में पाँच वर्ष से अधिक की देरी
प्रवक्ता ने चिंता जताते हुए बताया कि कई मामलों में सत्यापन प्रक्रिया पाँच वर्ष से अधिक समय से लंबित है। भारत ने उम्मीद जताई है कि बांग्लादेश इन मामलों पर शीघ्र प्रतिक्रिया देगा, ताकि द्विपक्षीय व्यवस्था के अंतर्गत निर्वासन प्रक्रिया सुचारु और प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में सीमा प्रबंधन और प्रवासन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कूटनीतिक संवाद जारी है।
द्विपक्षीय तंत्र और कानूनी ढाँचा
भारत सरकार के अनुसार, अवैध प्रवास के मामलों में सभी कार्रवाई मौजूदा कानूनों और भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय समझौतों के अनुरूप की जा रही है। निर्वासन प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा संबंधित व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि कर दी जाए — यह प्रक्रिया एकतरफा नहीं, बल्कि सहमति-आधारित है।
आगे क्या होगा
भारत की प्राथमिकता अब बांग्लादेश से लंबित सत्यापन मामलों का शीघ्र निपटारा कराना है। एक बार नागरिकता की पुष्टि होने के बाद, मौजूदा द्विपक्षीय तंत्र के तहत इन व्यक्तियों को उनके देश वापस भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्यापन में हो रही देरी ही निर्वासन प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है, और इसका समाधान दोनों देशों के बीच प्रशासनिक सहयोग पर निर्भर करेगा।