21 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर भारत सख्त: MEA ने कहा — कानून के तहत होगी कार्रवाई, 2,680 मामले सत्यापन में लंबित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों पर भारत सख्त: MEA ने कहा — कानून के तहत होगी कार्रवाई, 2,680 मामले सत्यापन में लंबित

सारांश

भारत ने एक बार फिर दोहराया — अवैध प्रवासियों पर नरमी नहीं। MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि 2,680 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के मामले सत्यापन के लिए भेजे जा चुके हैं, और नागरिकता पुष्टि होते ही निर्वासन शुरू होगा — कुछ मामले पाँच साल से लंबित हैं।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 5 जून 2026 को पुष्टि की कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
2,680 से अधिक संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के मामले राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए बांग्लादेश को भेजे गए हैं।
कई मामलों में सत्यापन प्रक्रिया पाँच वर्ष से अधिक समय से लंबित है।
निर्वासन की प्रक्रिया नागरिकता सत्यापन पूर्ण होने के बाद ही शुरू होती है — भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय तंत्र के अंतर्गत।
भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश लंबित मामलों पर शीघ्र प्रतिक्रिया देगा।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 5 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों — जिनमें बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं — के खिलाफ मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में यह जानकारी देते हुए कहा कि नागरिकता सत्यापन पूर्ण होते ही निर्वासन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

सरकार का स्पष्ट रुख

रंधीर जायसवाल ने कहा, 'भारत में यदि कोई विदेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहा है, चाहे वह बांग्लादेश का ही क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। जहाँ तक ऐसे लोगों के निर्वासन (डिपोर्टेशन) का सवाल है, इसके लिए दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में अवैध प्रवासियों से निपटने के लिए एक सुस्पष्ट कानूनी व्यवस्था पहले से उपलब्ध है।

2,680 से अधिक मामले सत्यापन के लिए भेजे

जायसवाल के अनुसार, भारत ने संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के 2,680 से अधिक मामले राष्ट्रीयता सत्यापन के लिए बांग्लादेश को भेजे हैं। उन्होंने बताया, '2,680 से अधिक मामलों में राष्ट्रीयता सत्यापन का अनुरोध बांग्लादेश को भेजा गया है। सत्यापन पूरा होने के बाद हम इन बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित करने की स्थिति में होंगे।'

गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह भी यही आँकड़ा सार्वजनिक किया था, जो इस मुद्दे पर सरकार की लगातार सक्रियता को दर्शाता है।

सत्यापन में पाँच वर्ष से अधिक की देरी

प्रवक्ता ने चिंता जताते हुए बताया कि कई मामलों में सत्यापन प्रक्रिया पाँच वर्ष से अधिक समय से लंबित है। भारत ने उम्मीद जताई है कि बांग्लादेश इन मामलों पर शीघ्र प्रतिक्रिया देगा, ताकि द्विपक्षीय व्यवस्था के अंतर्गत निर्वासन प्रक्रिया सुचारु और प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में सीमा प्रबंधन और प्रवासन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कूटनीतिक संवाद जारी है।

द्विपक्षीय तंत्र और कानूनी ढाँचा

भारत सरकार के अनुसार, अवैध प्रवास के मामलों में सभी कार्रवाई मौजूदा कानूनों और भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय समझौतों के अनुरूप की जा रही है। निर्वासन प्रक्रिया तभी शुरू होती है जब बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा संबंधित व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि कर दी जाए — यह प्रक्रिया एकतरफा नहीं, बल्कि सहमति-आधारित है।

आगे क्या होगा

भारत की प्राथमिकता अब बांग्लादेश से लंबित सत्यापन मामलों का शीघ्र निपटारा कराना है। एक बार नागरिकता की पुष्टि होने के बाद, मौजूदा द्विपक्षीय तंत्र के तहत इन व्यक्तियों को उनके देश वापस भेजा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्यापन में हो रही देरी ही निर्वासन प्रक्रिया की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है, और इसका समाधान दोनों देशों के बीच प्रशासनिक सहयोग पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2,680 मामलों में से कितनों का सत्यापन वास्तव में पूरा हुआ और कितने निर्वासन अंजाम तक पहुँचे। पाँच वर्ष से अधिक समय से लंबित मामले बताते हैं कि बाधा कानून में नहीं, द्विपक्षीय प्रशासनिक इच्छाशक्ति में है। बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद सहयोग की गति और दिशा — दोनों अनिश्चित हैं। बिना पारदर्शी सत्यापन और निर्वासन के आँकड़ों के, ये साप्ताहिक ब्रीफिंग नीतिगत प्रगति कम और राजनीतिक संकेत अधिक लगती हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी और नागरिकता सत्यापन पूरा होते ही उन्हें निर्वासित किया जाएगा। यह प्रक्रिया भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय तंत्र के अंतर्गत संचालित होती है।
2,680 बांग्लादेशी नागरिकों के मामले क्यों लंबित हैं?
MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल के अनुसार, इन मामलों में राष्ट्रीयता सत्यापन का अनुरोध बांग्लादेश को भेजा गया है, लेकिन कई मामलों में बांग्लादेशी अधिकारियों की ओर से प्रतिक्रिया पाँच वर्ष से अधिक समय से नहीं आई है। निर्वासन तभी संभव है जब बांग्लादेश संबंधित व्यक्ति की नागरिकता की पुष्टि कर दे।
भारत में अवैध विदेशी नागरिकों से निपटने की कानूनी व्यवस्था क्या है?
भारत में अवैध प्रवासियों से निपटने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें विदेशी अधिनियम और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम प्रमुख हैं। इसके अलावा, निर्वासन के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय समझौते भी लागू हैं।
अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को निर्वासित करने की प्रक्रिया कब शुरू होगी?
जैसे ही बांग्लादेश लंबित मामलों में नागरिकता सत्यापन पूरा करेगा, भारत तुरंत निर्वासन प्रक्रिया शुरू करेगा। भारत ने बांग्लादेश से इन मामलों पर शीघ्र प्रतिक्रिया देने की उम्मीद जताई है।
क्या यह नीति केवल बांग्लादेशी नागरिकों पर लागू होती है?
नहीं, MEA के अनुसार यह नीति भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी विदेशी नागरिकों पर लागू होती है, चाहे वे किसी भी देश के हों। बांग्लादेशी नागरिकों का विशेष उल्लेख इसलिए किया गया क्योंकि उनके मामलों की संख्या सबसे अधिक है और द्विपक्षीय सत्यापन तंत्र पहले से स्थापित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 महीने पहले
  2. 8 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले