भारत इनोवेट्स 2026: सिलिकॉन वैली में भारतीय नवाचार को मिली वैश्विक पहचान, 100 स्टार्टअप्स करेंगे प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को पिछले पाँच वर्षों में सिलिकॉन वैली में 'जबरदस्त सम्मान' मिला है — यह बात उद्यमी एवं निवेशक शशि त्रिपाठी ने फ्रांस में आयोजित होने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' शिखर सम्मेलन से पहले एक विशेष बातचीत में कही। उनके अनुसार यह बदलाव स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या, एआई-आधारित उद्यमों और वैश्विक निवेश में आई तेज़ी की बदौलत संभव हुआ है।
भारत इनोवेट्स 2026: सम्मेलन की रूपरेखा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा संयुक्त रूप से उद्घाटन किए जाने वाले इस शिखर सम्मेलन में प्रतिस्पर्धी चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए 100 भारतीय स्टार्टअप्स अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। त्रिपाठी के अनुसार यह आयोजन वैश्विक नवाचार और उद्यमिता केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक है। चुने गए स्टार्टअप्स एआई, फिनटेक, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
सिलिकॉन वैली की बदलती नज़र
त्रिपाठी ने कहा, 'भारत ने एआई, प्रौद्योगिकी और समग्र नवाचार के क्षेत्र में कई शानदार उपलब्धियाँ हासिल की हैं। नवाचार के मामले में भारत के प्रति सम्मान काफ़ी बढ़ा है।' उनके अनुसार भारतीय उद्यमी अब केवल पारंपरिक तकनीकी सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अंतरिक्ष नवाचार, फिनटेक और खुदरा प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भारत में नई अंतरिक्ष तकनीकें विकसित हो रही हैं, नए फिनटेक समाधान सामने आ रहे हैं और खुदरा क्षेत्र में नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं।'
वैश्विक निवेश में तेज़ी
त्रिपाठी ने बताया कि बढ़ते नवाचार के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भारत पर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वैश्विक तकनीकी कंपनियाँ और उद्यम पूंजी निवेशक बड़े पैमाने पर भारत में पूंजी लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सिलिकॉन वैली से भारत में नए निवेश लगातार आ रहे हैं। नवाचार की वजह से भारत में बड़ी मात्रा में पूंजी लगाई जा रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर उभरते बाज़ारों में निवेश को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो भारत की स्थिति को और अधिक उल्लेखनीय बनाता है।
संस्कृति में बदलाव: असफलता की स्वीकृति
त्रिपाठी ने भारत की प्रगति का एक बड़ा कारण सामाजिक सोच में आए बदलाव को बताया। उन्होंने कहा, 'अब संस्कृति बदल चुकी है। जब मैंने पढ़ाई पूरी की थी, तब स्नातक होने के तुरंत बाद कंपनी शुरू करने की कल्पना भी नहीं कर सकता था।' आज कई छात्र पढ़ाई पूरी होने से पहले ही स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। उन्होंने जोड़ा, 'अब असफलता को स्वीकार किया जाने लगा है और जब तक असफलता नहीं मिलेगी, तब तक नवाचार भी नहीं होगा।' गौरतलब है कि यह मानसिक बदलाव वैश्विक स्टार्टअप केंद्रों — जैसे सिलिकॉन वैली और इज़राइल — की उद्यमशीलता संस्कृति के अनुरूप है।
IIT की भूमिका और आगे की राह
त्रिपाठी ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) की भूमिका को नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'IIT ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और मेरा मानना है कि आगे भी IIT की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।' साथ ही उन्होंने सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को स्टार्टअप संस्कृति को दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों तक पहुँचाने का श्रेय देते हुए कहा, 'उन्होंने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।' हालाँकि, त्रिपाठी ने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक नवाचार केंद्रों से प्रतिस्पर्धा के लिए भारत को और अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम करना होगा।