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UPI-NPI लिंकेज लाइव: भारत-नेपाल के बीच रियल-टाइम क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट शुरू

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UPI-NPI लिंकेज लाइव: भारत-नेपाल के बीच रियल-टाइम क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट शुरू

सारांश

भारत और नेपाल के बीच अब UPI से सीधे पैसे भेजना संभव — NPCI इंटरनेशनल और NCHL की साझेदारी में लॉन्च हुए इस रियल-टाइम कॉरिडोर से पारंपरिक रेमिटेंस की लागत और देरी दोनों खत्म होने की उम्मीद है। G20 के क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट एजेंडे से जुड़ी यह पहल भारत की डिजिटल भुगतान कूटनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

NPCI इंटरनेशनल (NIPL) ने 9 जून 2026 को भारत के UPI और नेपाल के NPI के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज लाइव किया।
उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, VPA या UPI ID से P2P लेनदेन कर सकेंगे — बैंक विवरण साझा करने की आवश्यकता नहीं।
सेवा अभी चुनिंदा बैंकों में उपलब्ध; जल्द ही व्यापक वित्तीय नेटवर्क तक विस्तार की योजना।
यह पहल G20 क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट एजेंडे के अनुरूप है और पारंपरिक रेमिटेंस की तुलना में लागत घटाने का लक्ष्य रखती है।
NPCI इंटरनेशनल के CEO रितेश शुक्ला और NCHL के CEO नीलेश मान सिंह प्रधान ने इसे दोनों देशों के लाखों परिवारों के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने 9 जून 2026 को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट लिंकेज को आधिकारिक रूप से लाइव कर दिया है। इस एकीकरण से दोनों देशों के नागरिक अब रियल-टाइम, कम लागत और सुरक्षित तरीके से धनराशि का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

क्या है यह लिंकेज और कैसे काम करेगा

NIPL, जो नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की अंतरराष्ट्रीय शाखा है, ने नेपाल की नेशनल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड (NCHL) के साथ साझेदारी में यह प्रणाली विकसित की है। इस लिंकेज के ज़रिए भारत और नेपाल के उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) या UPI ID का उपयोग करके पर्सन-टू-पर्सन (P2P) लेनदेन कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इसके लिए बैंक खाते की विस्तृत जानकारी साझा करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।

यह सुविधा फिलहाल कुछ चुनिंदा बैंकों में उपलब्ध है और आने वाले समय में इसे वित्तीय संस्थानों के व्यापक नेटवर्क तक विस्तारित किए जाने की योजना है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

NPCI इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितेश शुक्ला ने कहा कि NCHL के साथ साझेदारी में यह क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस लिंकेज संगठन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जो दुनिया भर के समुदायों की बदलती ज़रूरतों को पूरा करने वाले नवाचार के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस के लिए एक रियल-टाइम, सस्ता और सुरक्षित कॉरिडोर बनाती है, जिससे दोनों देशों के परिवारों के लिए प्रक्रिया सरल हो जाती है और वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलता है।

NCHL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीलेश मान सिंह प्रधान ने इस लॉन्च को 'करीबी सहयोग और साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण' बताया। उन्होंने कहा, 'जैसे ही हम एक साथ डिजिटल पेमेंट के सफर पर निकल रहे हैं, हम अधिक सेवाएँ जोड़ने और दोनों तरफ के लाखों लोगों तथा व्यवसायों के लिए समावेशन सुनिश्चित करने की उम्मीद करते हैं।'

आम जनता पर असर

भारत और नेपाल के बीच प्रतिवर्ष लाखों लोग सीमा पार धनराशि भेजते हैं — विशेष रूप से नेपाल में काम करने वाले भारतीय और भारत में कार्यरत नेपाली नागरिक। रियल-टाइम सेटलमेंट सक्रिय होने से यह प्रणाली पारंपरिक रेमिटेंस चैनलों की तुलना में लेनदेन लागत को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सक्षम होगी। गौरतलब है कि समय पर रेमिटेंस पर निर्भर परिवारों को इससे सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

वैश्विक संदर्भ और G20 एजेंडा

यह परियोजना क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को अधिक सुलभ, कुशल और किफायती बनाने के G20 एजेंडे के अनुरूप है। NPCI के अनुसार, यह लिंकेज न केवल भारत-नेपाल के बीच आर्थिक और डिजिटल संपर्क को गहरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान अवसंरचना के विस्तार की दिशा में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत पहले ही सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और फ्रांस सहित कई देशों के साथ UPI लिंकेज स्थापित कर चुका है।

आगे क्या होगा

फिलहाल सीमित बैंकों तक उपलब्ध यह सेवा आने वाले महीनों में अधिक वित्तीय संस्थानों तक विस्तारित होगी। NPCI इंटरनेशनल का लक्ष्य है कि P2P के साथ-साथ भविष्य में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन को भी इस कॉरिडोर में शामिल किया जाए, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को भी सीधा लाभ मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

UAE और फ्रांस के बाद अब एक पड़ोसी देश के साथ वास्तविक समय का कॉरिडोर। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह लिंकेज केवल P2P तक सीमित रहेगा या P2M और व्यापारिक भुगतान तक भी पहुँचेगा — जहाँ असली आर्थिक प्रभाव होता है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सेवा अभी चुनिंदा बैंकों तक सीमित है, और व्यापक रोलआउट की समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है। G20 के उद्देश्यों से जोड़ना सही है, पर जब तक लागत-तुलना और उपयोगकर्ता संख्या के ठोस आँकड़े सामने नहीं आते, यह घोषणा अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाएगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

UPI-NPI लिंकेज क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह भारत के UPI और नेपाल के NPI के बीच एक रियल-टाइम क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट प्रणाली है, जिसे NPCI इंटरनेशनल और नेपाल की NCHL ने मिलकर विकसित किया है। उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर, VPA या UPI ID का उपयोग करके बिना बैंक खाते की जानकारी साझा किए सीधे धनराशि भेज सकते हैं।
भारत-नेपाल UPI पेमेंट लिंकेज से किसे फायदा होगा?
मुख्य रूप से उन लाखों लोगों को लाभ होगा जो दोनों देशों के बीच नियमित रूप से पैसे भेजते हैं — जैसे भारत में काम करने वाले नेपाली नागरिक और नेपाल में कार्यरत भारतीय। यह प्रणाली पारंपरिक रेमिटेंस चैनलों की तुलना में तेज़ और सस्ती है।
क्या यह सेवा सभी बैंकों में उपलब्ध है?
फिलहाल यह सेवा केवल कुछ चुनिंदा बैंकों में लाइव है। NPCI इंटरनेशनल के अनुसार, आने वाले समय में इसे वित्तीय संस्थानों के व्यापक नेटवर्क तक विस्तारित किया जाएगा, हालाँकि इसकी सटीक समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
यह लिंकेज G20 एजेंडे से कैसे जुड़ा है?
G20 देशों ने क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को तेज़, सस्ता और अधिक सुलभ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। UPI-NPI लिंकेज इसी एजेंडे के अनुरूप है और भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत UPI को वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया जा रहा है।
NPCI इंटरनेशनल और NCHL की इस साझेदारी का महत्व क्या है?
NPCI इंटरनेशनल (NIPL), NPCI की वैश्विक शाखा है जो भारत की डिजिटल पेमेंट तकनीक को अन्य देशों तक ले जाती है। NCHL नेपाल की राष्ट्रीय क्लियरिंग संस्था है। दोनों की साझेदारी से यह सुनिश्चित होता है कि लेनदेन दोनों देशों की नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप हों और प्रणाली विश्वसनीय रहे।
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