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तेहरान में भारत ने अयातुल्लाह खामेनेई को दी श्रद्धांजलि, मार्गेरिटा और हसनैन ने किया प्रतिनिधित्व

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तेहरान में भारत ने अयातुल्लाह खामेनेई को दी श्रद्धांजलि, मार्गेरिटा और हसनैन ने किया प्रतिनिधित्व

सारांश

भारत ने अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा और राज्यपाल हसनैन को तेहरान भेजकर एक स्पष्ट राजनयिक संदेश दिया — पश्चिम एशिया में बड़े बदलाव के बावजूद भारत-ईरान संबंध अटूट हैं।

मुख्य बातें

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने 4 जुलाई को तेहरान में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल हमले में हुआ; ईरान में 46 वर्षीय शिया-धार्मिक शासन युग का अंत।
उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को मार्च में ईरान का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद में; उन्हें इमाम रजा की पवित्र दरगाह में दफनाया जाएगा।
5 मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास में संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे।

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने 4 जुलाई को तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस उच्च-स्तरीय उपस्थिति को दोनों देशों के बीच गहरे सभ्यतागत और राजनयिक संबंधों का प्रतीक बताया।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति

विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और मैंने तेहरान में अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हमने भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि दी।' यह भारत की ओर से एक सुविचारित राजनयिक पहल मानी जा रही है, जो भारत-ईरान संबंधों की दीर्घकालिक निरंतरता को रेखांकित करती है।

खामेनेई का निधन और उत्तराधिकार

अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के एक बड़े हमले में हुआ था। उनकी मृत्यु से ईरान में 46 वर्षों से चले आ रहे शिया-धार्मिक शासन में एक ऐतिहासिक बदलाव आया। मार्च में उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया। गौरतलब है कि खामेनेई ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे।

अंतिम संस्कार कार्यक्रम का विवरण

विदाई समारोह 4 और 5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला प्रार्थना हॉल में आयोजित हुए। 6 जुलाई को तेहरान में अंतिम संस्कार से जुड़े अन्य कार्यक्रम संपन्न हुए। 7 जुलाई को ईरान के कोम शहर में एक और अंतिम यात्रा निकाली गई। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद में होगा, जिसके बाद उन्हें इमाम रजा की पवित्र दरगाह में दफनाया जाएगा।

भारत की पूर्व राजनयिक पहल

5 मार्च को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए थे और अयातुल्लाह खामेनेई के निधन पर भारत सरकार की ओर से औपचारिक शोक व्यक्त किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर इसकी जानकारी दी थी।

भारत-ईरान संबंधों पर असर

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व से दोनों देशों के बीच लोगों के परस्पर संबंध, राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को और गति मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक बदलाव तेज़ हो रहे हैं और भारत अपनी 'पड़ोस से परे' कूटनीति को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुचिंतित भू-राजनीतिक संकेत है — ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में सत्ता-संतुलन तेज़ी से बदल रहा है। खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान में नेतृत्व परिवर्तन और अमेरिका-इज़रायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नई दिल्ली का तेहरान में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधित्व यह बताता है कि भारत किसी एक खेमे में बंधने से परहेज़ करता है। चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सहयोग जैसे रणनीतिक हित इस संबंध को केवल कूटनीतिक औपचारिकता से कहीं आगे ले जाते हैं। सवाल यह है कि नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में ईरान की विदेश नीति किस दिशा में जाएगी, और भारत उस बदलाव के साथ कितनी तेज़ी से तालमेल बिठा पाएगा।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने अयातुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में किसे भेजा?
भारत ने विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को 4 जुलाई को तेहरान में अंतिम संस्कार समारोह में प्रतिनिधि के रूप में भेजा।
अयातुल्लाह खामेनेई का निधन कब और कैसे हुआ?
अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई का निधन 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के एक बड़े हमले में हुआ। उनकी मृत्यु से ईरान में 46 वर्षों से चले आ रहे शिया-धार्मिक शासन में एक ऐतिहासिक परिवर्तन आया।
खामेनेई के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता कौन बना?
मार्च में अयातुल्लाह खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुना गया।
अयातुल्लाह खामेनेई का अंतिम संस्कार कहाँ होगा?
तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद में होगा और उन्हें इमाम रजा की पवित्र दरगाह में दफनाया जाएगा। इससे पहले 4-5 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मोसल्ला प्रार्थना हॉल में विदाई समारोह हुए।
भारत ने खामेनेई के निधन पर पहले क्या कदम उठाए थे?
5 मार्च को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास जाकर संवेदना पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और भारत सरकार की ओर से शोक व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर इसकी जानकारी साझा की थी।
राष्ट्र प्रेस
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