महबूबा मुफ्ती ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के जनाजे में होंगी शामिल, तेहरान से मिला औपचारिक निमंत्रण
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए तेहरान रवाना होंगी। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। 2 जुलाई 2026 को PDP की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।
निमंत्रण और उसकी पृष्ठभूमि
पार्टी के अनुसार, निमंत्रण पत्र में महबूबा मुफ्ती को भारत की एक विशिष्ट राजनीतिक हस्ती के रूप में संबोधित किया गया है। पत्र में कहा गया है कि उनकी उपस्थिति भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक मित्रता, आपसी सम्मान और दोनों प्राचीन सभ्यताओं के गहरे संबंधों का प्रतीक होगी। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद ईरान में राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था।
ईरान सरकार के अनुसार, खामेनेई की मृत्यु अमेरिकी-इज़रायली सैन्य हमले में हुई थी। उनके पार्थिव शरीर को सुरक्षित रखा गया था और अब उन्हें विधिवत सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
समारोह का कार्यक्रम
निमंत्रण में साझा किए गए कार्यक्रम के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को तेहरान स्थित इमाम खोमैनी ग्रैंड मुसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित होगा। 4 जुलाई को समिट कॉन्फ्रेंस हॉल में स्मृति सभा का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद 6 जुलाई 2026 को तेहरान में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें दुनियाभर से आमंत्रित नेता शामिल होंगे।
PDP का बयान
PDP की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि महबूबा मुफ्ती इस यात्रा के दौरान दिवंगत अयातुल्ला को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी और ईरान की जनता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करेंगी। यह यात्रा किसी भारतीय राज्यस्तरीय राजनीतिक नेता की ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े समारोह में उपस्थिति के लिहाज से उल्लेखनीय मानी जा रही है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-ईरान संबंध कूटनीतिक दृष्टि से संवेदनशील दौर में हैं। अमेरिकी-इज़रायली हमले के बाद ईरान में उत्पन्न राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, वैश्विक नेताओं की उपस्थिति को कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। महबूबा मुफ्ती की यह यात्रा भारतीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकती है, क्योंकि केंद्र सरकार की ईरान नीति और एक क्षेत्रीय दल के नेता की स्वतंत्र कूटनीतिक पहल के बीच का तनाव रेखांकित होता है।