संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: 'डीप स्टेट' चला रही नफरत की फैक्ट्री, आतंकी संगठनों पर एकजुट कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 9 जून 2026 को पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की 'डीप स्टेट' अपने नागरिकों के मन में भारत-विरोधी नफरत के बीज बोकर सत्ता और संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखती है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान एक संगठित तरीके से धार्मिक शब्दावली की आड़ में दुष्प्रचार फैला रहा है — जिसे हरीश ने 'नफरत की फैक्ट्री' की संज्ञा दी।
भारत ने क्या कहा सुरक्षा परिषद में
पी. हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।' उन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारत-समर्थक समूहों को दी गई 'फितना अल हिंदुस्तान' की संज्ञा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे सरकारी दुष्प्रचार का हिस्सा बताया, जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए अरबी शब्दावली का दुरुपयोग करता है।
गौरतलब है कि 'फितना' एक अरबी धार्मिक शब्द है जिसका अर्थ 'विद्रोह' या 'मूर्तिपूजा' होता है — और इसका राजनीतिक संदर्भ में प्रयोग भारत के विरुद्ध एक सुनियोजित कथा-निर्माण का हिस्सा बताया जा रहा है।
'27वाँ संवैधानिक संशोधन' — सेना का तख्तापलट?
हरीश ने पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए 27वें संवैधानिक संशोधन को 'वास्तविक तख्तापलट' करार दिया। उनके अनुसार, इस संशोधन के ज़रिए फील्ड मार्शल असीम मुनीर को व्यावहारिक रूप से कानून से ऊपर की स्थिति प्राप्त हो गई और नागरिक सरकार पर सेना की पकड़ और मज़बूत हो गई। यह संशोधन नवंबर 2025 में पारित हुआ था।
हरीश का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट चरम पर है, और आलोचकों का कहना है कि सेना इन संकटों से ध्यान भटकाने के लिए भारत-विरोधी माहौल का इस्तेमाल करती है।
आतंकवाद पर दोहरे मानदंड बंद हों — भारत की माँग
अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने ISIL (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी संगठनों के विरुद्ध समन्वित वैश्विक कार्रवाई की माँग की। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मानदंड नहीं अपनाने चाहिए।
उल्लेखनीय है कि लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और 1 ईसाई की मौत हुई थी।
व्यापक संदर्भ: दक्षिण एशिया में बढ़ता तनाव
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, सीमा-पार आतंकवाद और भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज़ है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का उपयोग कर वैश्विक समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद केवल द्विपक्षीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास करता रहा है।
आगे देखा जाएगा कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और अन्य देश भारत के इस रुख पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, और क्या पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ता है।