24 जुलाई 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: 'डीप स्टेट' चला रही नफरत की फैक्ट्री, आतंकी संगठनों पर एकजुट कार्रवाई की माँग

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संयुक्त राष्ट्र में भारत का पाकिस्तान पर प्रहार: 'डीप स्टेट' चला रही नफरत की फैक्ट्री, आतंकी संगठनों पर एकजुट कार्रवाई की माँग

सारांश

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान की 'डीप स्टेट' को सत्ता बचाने के लिए नफरत फैलाने वाली मशीनरी बताया। 27वें संवैधानिक संशोधन से असीम मुनीर की बेलगाम ताकत और पहलगाम हमले का हवाला देकर भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को घेरा।

मुख्य बातें

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी.
हरीश ने 9 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान की 'डीप स्टेट' पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया।
पाकिस्तान द्वारा भारत-समर्थक समूहों को दी गई 'फितना अल हिंदुस्तान' की संज्ञा को भारत ने धार्मिक शब्दावली की आड़ में सरकारी दुष्प्रचार बताया।
हरीश ने 27वें संवैधानिक संशोधन को सेना का 'वास्तविक तख्तापलट' कहा, जिससे फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सत्ता पर पकड़ मज़बूत हुई।
भारत ने ISIL, अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद के विरुद्ध समन्वित वैश्विक कार्रवाई की माँग की।
पहलगाम हमले में 24 हिंदू और 1 ईसाई की मौत का उल्लेख कर भारत ने 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 9 जून 2026 को पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि इस्लामाबाद की 'डीप स्टेट' अपने नागरिकों के मन में भारत-विरोधी नफरत के बीज बोकर सत्ता और संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखती है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान एक संगठित तरीके से धार्मिक शब्दावली की आड़ में दुष्प्रचार फैला रहा है — जिसे हरीश ने 'नफरत की फैक्ट्री' की संज्ञा दी।

भारत ने क्या कहा सुरक्षा परिषद में

पी. हरीश ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।' उन्होंने पाकिस्तान द्वारा भारत-समर्थक समूहों को दी गई 'फितना अल हिंदुस्तान' की संज्ञा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे सरकारी दुष्प्रचार का हिस्सा बताया, जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए अरबी शब्दावली का दुरुपयोग करता है।

गौरतलब है कि 'फितना' एक अरबी धार्मिक शब्द है जिसका अर्थ 'विद्रोह' या 'मूर्तिपूजा' होता है — और इसका राजनीतिक संदर्भ में प्रयोग भारत के विरुद्ध एक सुनियोजित कथा-निर्माण का हिस्सा बताया जा रहा है।

'27वाँ संवैधानिक संशोधन' — सेना का तख्तापलट?

हरीश ने पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए 27वें संवैधानिक संशोधन को 'वास्तविक तख्तापलट' करार दिया। उनके अनुसार, इस संशोधन के ज़रिए फील्ड मार्शल असीम मुनीर को व्यावहारिक रूप से कानून से ऊपर की स्थिति प्राप्त हो गई और नागरिक सरकार पर सेना की पकड़ और मज़बूत हो गई। यह संशोधन नवंबर 2025 में पारित हुआ था।

हरीश का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट चरम पर है, और आलोचकों का कहना है कि सेना इन संकटों से ध्यान भटकाने के लिए भारत-विरोधी माहौल का इस्तेमाल करती है।

आतंकवाद पर दोहरे मानदंड बंद हों — भारत की माँग

अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने ISIL (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी संगठनों के विरुद्ध समन्वित वैश्विक कार्रवाई की माँग की। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मानदंड नहीं अपनाने चाहिए।

उल्लेखनीय है कि लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और 1 ईसाई की मौत हुई थी।

व्यापक संदर्भ: दक्षिण एशिया में बढ़ता तनाव

यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, सीमा-पार आतंकवाद और भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज़ है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच का उपयोग कर वैश्विक समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद केवल द्विपक्षीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने का प्रयास करता रहा है।

आगे देखा जाएगा कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य और अन्य देश भारत के इस रुख पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, और क्या पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आक्रामक कथा-निर्माण कर रहा है। हालाँकि, असली सवाल यह है कि क्या सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य — विशेषकर चीन — इस दबाव को किसी ठोस कार्रवाई में बदलने देंगे, जो अब तक की कूटनीतिक कोशिशों में नहीं हुआ। 'नफरत की फैक्ट्री' जैसे मुहावरे वैश्विक मीडिया में तो गूँजते हैं, लेकिन FATF और UN प्रतिबंध सूचियों में पाकिस्तान की स्थिति पर इनका असर सीमित रहा है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की 'डीप स्टेट' पर क्या आरोप लगाए?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 9 जून 2026 को सुरक्षा परिषद में कहा कि पाकिस्तान की 'डीप स्टेट' — यानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान — अपने नागरिकों में भारत-विरोधी नफरत फैलाकर सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखती है। उन्होंने इसे एक संगठित 'नफरत की फैक्ट्री' बताया जो धार्मिक शब्दावली का दुरुपयोग करती है।
'फितना अल हिंदुस्तान' क्या है और भारत ने इस पर आपत्ति क्यों जताई?
पाकिस्तान ने भारत-समर्थक समूहों को 'फितना अल हिंदुस्तान' की संज्ञा दी है — 'फितना' एक अरबी धार्मिक शब्द है जिसका अर्थ 'विद्रोह' या 'मूर्तिपूजा' होता है। भारत ने इसे सरकारी दुष्प्रचार बताया जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए सुनियोजित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
27वाँ संवैधानिक संशोधन क्या है जिसे भारत ने 'तख्तापलट' कहा?
नवंबर 2025 में पारित यह संशोधन पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को व्यावहारिक रूप से कानून से ऊपर की स्थिति देता है और नागरिक सरकार पर सेना की पकड़ को संस्थागत बनाता है। भारत के प्रतिनिधि ने इसे 'वास्तविक तख्तापलट' करार दिया।
पहलगाम हमले का इस बहस से क्या संबंध है?
लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने अप्रैल 2025 में पहलगाम के एक पर्यटन स्थल पर हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसमें 24 हिंदू और 1 ईसाई मारे गए थे। भारत ने इस हमले का उल्लेख कर वैश्विक समुदाय से लश्कर और जैश जैसे संगठनों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की माँग की।
भारत ने सुरक्षा परिषद में किन आतंकी संगठनों पर कार्रवाई की माँग की?
भारत ने ISIL (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी संगठनों के विरुद्ध समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की माँग की। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद पर दोहरे मानदंड स्वीकार्य नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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