यूएनएससी में भारत का जोर: महिला शांति सैनिक मेजर यासीन और मेजर नवस्कार की पहल की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में 29 अक्टूबर 2026 को महिला, शांति और सुरक्षा (डब्ल्यूपीएस) एजेंडे पर आयोजित खुली बहस में भारत ने दक्षिण सूडान में तैनात अपने दो सैन्य अधिकारियों — मेजर मुइज यासीन और मेजर सोनिया नवस्कार — की जमीनी पहलों को वैश्विक मंच पर उजागर किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व में उनकी उपस्थिति और सशस्त्र बलों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाना शांति एवं सुरक्षा प्रयासों को टिकाऊ बनाने के लिए अनिवार्य है।
भारतीय शांति सैनिकों की जमीनी पहल
दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनएमआईएसएस) में बलों की ओम्बड्सपर्सन और कल्याण अधिकारी के रूप में तैनात मेजर मुइज यासीन ने शिकायतों की अनौपचारिक रिपोर्टिंग के लिए एक सुलभ, गोपनीय और पीड़ित-केंद्रित तंत्र विकसित किया है। उन्होंने विभिन्न देशों के सैनिकों, पुलिसकर्मियों और सैन्य पर्यवेक्षकों के लिए 40 से अधिक विशेष सत्र आयोजित किए। साथ ही साक्ष्यों पर आधारित एक जेंडर डेटाबेस भी स्थापित किया, ताकि लैंगिक जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार की जा सकें।
मिशन की जेंडर टास्क फोर्स की सदस्य और वर्दीधारी महिला कर्मियों की संपर्क अधिकारी मेजर सोनिया नवस्कार ने संयुक्त राष्ट्र पुलिस और सैन्य इकाइयों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने के लिए एक प्रभावी नेटवर्क विकसित किया है। राजदूत हरीश ने कहा, 'इन पहलों ने महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को मजबूत करने में मदद की है।'
डब्ल्यूपीएस एजेंडे के प्रभावी क्रियान्वयन पर भारत का रुख
भारत ने यूएनएससी में स्पष्ट किया कि डब्ल्यूपीएस एजेंडे को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए केवल नीतिगत घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं। राजदूत हरीश ने कहा, 'इसके लिए संघर्षों के मूल कारणों को दूर करना और ऐसे तत्वों को मिलने वाला समर्थन समाप्त करना आवश्यक है, जो संघर्ष जारी रहने से लाभ उठाते हैं।' भारत ने संघर्षों को संवाद और कूटनीति के जरिए समाप्त करने पर भी बल दिया।
गौरतलब है कि भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे अधिक सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है, और महिला शांति सैनिकों की संख्या में वृद्धि इस वैश्विक प्रतिबद्धता की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम और लैंगिक कोटा का उल्लेख
बहस के दौरान भारत ने राजनीति और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लैंगिक कोटा व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया। इस संदर्भ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर शांति वार्ताओं में महिलाओं की उपस्थिति अभी भी बेहद सीमित है।
तकनीक और सशस्त्र बलों में सुधार
राजदूत हरीश ने महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडे को आगे बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, तकनीक का उपयोग संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी देने, महिलाओं के साथ डिजिटल माध्यम से परामर्श करने और हिंसा से प्रभावित लोगों की जरूरतों के अनुरूप सहायता व्यवस्था विकसित करने में किया जा सकता है।
आर्थिक सशक्तीकरण के संदर्भ में भारत के 'नमो ड्रोन दीदी' कार्यक्रम का उल्लेख किया गया, जिसके तहत महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि कृषि कार्यों में उनकी भूमिका बढ़े।
सशस्त्र बलों में संरचनात्मक सुधारों की चर्चा करते हुए हरीश ने बताया कि भारत ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने और उन्हें सभी लड़ाकू शाखाओं में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए हैं — जिससे लड़ाकू विमान पायलट से लेकर सैन्य राजनयिक तक की भूमिकाओं में उनके अवसर बढ़े हैं।
भारत का संदेश: प्रतिनिधित्व से आगे, नेतृत्व तक
भारत का मानना है कि शांति प्रक्रियाओं में महिलाओं की भूमिका केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — उन्हें निर्णय लेने, नेतृत्व करने और सुरक्षा संस्थानों में केंद्रीय भूमिका निभाने के समान अवसर मिलने चाहिए। आगामी वैश्विक शांति समीक्षाओं में भारत की यह स्थिति और अधिक प्रासंगिक होने की संभावना है।