होर्मुज स्ट्रेट: ईरानी संसद में दुश्मन जहाजों पर रोक और 20% जुर्माने का नया विधेयक प्रस्तुत
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी सांसदों ने होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री यातायात को नियंत्रित करने के लिए एक नए विधेयक का मसौदा तैयार किया है, जिसमें कुछ देशों के जहाजों पर पारगमन प्रतिबंध और नियम उल्लंघन पर कार्गो मूल्य का 20 प्रतिशत तक जुर्माने का प्रावधान है। रिपोर्टों के अनुसार, यह मसौदा अभी ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की समीक्षा में है।
विधेयक में क्या है
नए प्रस्ताव में दायरा पिछले मसौदे से अधिक विस्तृत किया गया है। इसके तहत इजरायली जहाजों के साथ-साथ अन्य देशों और कंपनियों से जुड़े सैन्य या नागरिक कार्गो को भी तब तक पारगमन से रोका जाएगा जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता। इसके अतिरिक्त, जिन जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे ईरानी मुद्रा में नेविगेशन सर्विस फीस वसूल की जाएगी, जो सुरक्षित नौवहन के खर्च को कवर करने के लिए होगी।
विधेयक की पृष्ठभूमि
इस विधेयक का मसौदा तैयार करने की घोषणा सबसे पहले मार्च 2026 में हुई थी। इसके बाद एक प्रारंभिक मसौदा जारी किया गया जिसमें ईरान के शत्रु माने जाने वाले देशों के जहाजों को लक्षित किया गया था और कुछ छूट का भी प्रावधान था। नए संस्करण में प्रस्तावित प्रतिबंधों को और अधिक जहाजों तथा कार्गो तक विस्तारित किया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान-ओमान वार्ता की स्थिति
इस विधेयक के समानांतर, ईरान और ओमान होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से वाणिज्यिक नौवहन को लेकर द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने बताया कि दोनों देश स्ट्रेट में नौवहन मार्ग के लिए भौगोलिक निर्देशांक पर पहले ही सहमत हो चुके हैं और संयुक्त बयान का मसौदा अंतिम चरण में है। हालाँकि, ओमान की ओर से इस समझौते की अभी तक कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।
प्रस्तावित निगरानी व्यवस्था
सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान अपने नियंत्रण वाले शिपिंग लेन से खाड़ी में प्रवेश करने वाले और बाहर जाने वाले समुद्री यातायात की निगरानी करेगा। इसके साथ ही सुरक्षा और नौवहन की रक्षा के लिए आवश्यक हस्तक्षेप का अधिकार भी ईरान के पास होगा।
आगे क्या होगा
विधेयक को अभी ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग से पारित होना बाकी है। बाघेई के अनुसार, यदि कोई बाहरी पक्ष ईरान-ओमान वार्ता में हस्तक्षेप नहीं करता, तो संयुक्त बयान शीघ्र जारी किया जा सकता है। इस घटनाक्रम पर वैश्विक शिपिंग उद्योग और तेल बाजार की कड़ी नजर बनी हुई है।