17 जुलाई 2026
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ईरान का सीरिया में अमेरिकी कमांड सेंटर पर हमला, कुवैत-ओमान में भी निशाना — IRGC का दावा

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ईरान का सीरिया में अमेरिकी कमांड सेंटर पर हमला, कुवैत-ओमान में भी निशाना — IRGC का दावा

सारांश

ईरान के IRGC ने शुक्रवार को सीरिया के अल-तनफ में अमेरिकी कमांड सेंटर, कुवैत में HIMARS लॉन्चर और ओमान में रडार साइट्स पर हमले का दावा किया — ऑपरेशन नस्र-2 की 13वीं लहर तक पहुँचते हुए। कुवैत की सेना ने भी हमलों की पुष्टि की। अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।

मुख्य बातें

IRGC ने 17 जुलाई 2026 को सीरिया के अल-तनफ में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन कमांड सेंटर पर हमले का दावा किया।
कुवैत में अमेरिकी हथियार भंडार, दो HIMARS लॉन्चर और मिसाइल रक्षा रडार को निशाना बनाने का दावा; सैन्य अड्डे पर भीषण आग लगने की बात कही गई।
ओमान के सलमाह पठार और घनम क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक व हवाई निगरानी रडार नष्ट करने का दावा।
कुवैत की सेना ने एक्स पर पुष्टि की कि उसका एयर डिफेंस दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है।
इससे पहले बुधवार को बहरीन और जॉर्डन के अल-अजराक बेस पर भी हमले का दावा, जहाँ F-15, F-16, F-35 और MQ-9 ड्रोन के शेल्टर तबाह बताए गए।
सभी दावे IRGC के हैं; स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को दावा किया कि उसने सीरिया के अल-तनफ इलाके में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन कमांड सेंटर, कुवैत में अमेरिकी हथियार भंडार एवं HIMARS लॉन्चर, और ओमान में नौसैनिक व हवाई निगरानी रडार साइट्स पर जवाबी हमले किए। ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव का यह नया दौर मध्य-पूर्व में तनाव को एक और खतरनाक मोड़ पर ले आया है।

ऑपरेशन नस्र-2 की नई लहरें

IRGC के अनुसार, ये हमले ऑपरेशन नस्र-2 की 11वीं, 12वीं और 13वीं लहर के तहत किए गए। 11वीं लहर को ईरानशहर के बामपुर के शहीद सैनिकों को समर्पित बताया गया।

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, इस ऑपरेशन में सेना ने सीरिया के अल-तनफ क्षेत्र में तैनात अमेरिकी स्पेशल फोर्स के कमांड सेंटर पर अचानक हमला किया।

कुवैत में हमले का दावा और आग

IRGC के जनसंपर्क विभाग ने एक अलग बयान में दावा किया कि पहले हमले में एक मिसाइल रक्षा निगरानी रडार, अमेरिकी हथियारों के कई भंडार, दो HIMARS लॉन्चर और कई मिसाइलों को निशाना बनाया गया। IRGC के अनुसार, इस हमले से कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले एक सैन्य अड्डे पर भीषण आग लग गई।

कुवैत की सेना ने पुष्टि की कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रही है। कुवैत आर्मी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, 'ईरान के बुरे हमले के बाद कुवैती एयर डिफेंस अभी दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहे हैं। अगर धमाके की आवाजें सुनाई देती हैं, तो वे एयर डिफेंस सिस्टम के दुश्मन के हमलों को रोकने का नतीजा हैं।' आर्मी के जनरल स्टाफ ने नागरिकों से अपील की कि वे अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

ओमान में रडार साइट्स पर हमले का दावा

IRGC ने एक और बयान में दावा किया कि उसकी सेना ने ओमान के सलमाह पठार पर स्थित नौसैनिक निगरानी रडार और ओमान के घनम क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हवाई निगरानी रडार को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया। ये दावे IRGC की ओर से हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

बहरीन और जॉर्डन पर पहले के हमले

गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को IRGC ने दावा किया था कि उसने बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए — जिनमें मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर, एयरक्राफ्ट शेल्टर, कमांड सेंटर और रणनीतिक ड्रोन को निशाना बनाया गया।

IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अजराक में अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया, जहाँ कथित तौर पर US F-15, F-16 और F-35 फाइटर जेट तथा कई MQ-9 रणनीतिक ड्रोन तैनात थे और उनके शेल्टर तबाह हो गए।

क्या होगा आगे

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। IRGC के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा और कुवैत व ओमान जैसे मित्र देशों पर पड़ने वाले दबाव के मद्देनजर आने वाले घंटे निर्णायक हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 'ऑपरेशन नस्र-2' की 13 लहरों का यह क्रम बताता है कि ईरान जानबूझकर एक विस्तृत, बहु-देशीय मोर्चे का संदेश देना चाहता है। असली सवाल यह है कि क्या कुवैत और ओमान — दोनों अमेरिका के करीबी सहयोगी — इस टकराव में सीधे खिंचे जाएंगे, जो क्षेत्रीय संघर्ष को एक नया और अधिक खतरनाक आयाम दे सकता है। मुख्यधारा की कवरेज IRGC के बयानों को दोहराती है, लेकिन यह रेखांकित करना जरूरी है कि इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन अभी नहीं हुआ है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने किन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है?
IRGC ने 17 जुलाई 2026 को सीरिया के अल-तनफ में अमेरिकी कमांड सेंटर, कुवैत में हथियार भंडार व HIMARS लॉन्चर, और ओमान में रडार साइट्स पर हमले का दावा किया। इससे पहले बहरीन और जॉर्डन में भी हमलों का दावा किया जा चुका है।
ऑपरेशन नस्र-2 क्या है?
ऑपरेशन नस्र-2 ईरान के IRGC द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों के विरुद्ध चलाया जा रहा कथित जवाबी सैन्य अभियान है। 17 जुलाई तक इसकी 13 लहरें हो चुकी हैं और 11वीं लहर ईरानशहर के बामपुर के शहीद सैनिकों को समर्पित बताई गई।
कुवैत की सेना ने हमलों पर क्या कहा?
कुवैत की सेना ने एक्स पर पोस्ट कर पुष्टि की कि उसका एयर डिफेंस दुश्मन के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है। जनरल स्टाफ ने नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की।
क्या IRGC के हमलों के दावों की पुष्टि हुई है?
अभी तक नहीं। ये सभी दावे IRGC और ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के हैं। अमेरिका या संबंधित देशों की सरकारों ने क्षति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। कुवैत की सेना ने हमलों की उपस्थिति की पुष्टि जरूर की है।
जॉर्डन के अल-अजराक बेस पर हमले में क्या हुआ?
IRGC ने दावा किया कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने जॉर्डन के अल-अजराक बेस को निशाना बनाया, जहाँ US F-15, F-16, F-35 फाइटर जेट और MQ-9 रणनीतिक ड्रोन के शेल्टर तबाह हो गए। यह दावा बुधवार को किया गया था।
राष्ट्र प्रेस
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