ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की वापसी के लिए मंत्रालय के पास कोई योजना नहीं: जेकेएसए

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ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की वापसी के लिए मंत्रालय के पास कोई योजना नहीं: जेकेएसए

सारांश

जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने कहा है कि ईरान में फंसे छात्रों की वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय के पास कोई ठोस योजना नहीं है। छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए जेकेएसए लगातार प्रयासरत है।

मुख्य बातें

ईरान में लगभग 100 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं।
विदेश मंत्रालय के पास छात्रों की वापसी के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
छात्र 14 और 15 मार्च को लौटेंगे।
नासिर खुएहामी ने छात्रों की यात्रा की व्यवस्था की जानकारी दी।
छात्र फ्लाईदुबई की उड़ानों से यात्रा करेंगे।

नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) ने बुधवार को यह दावा किया कि युद्धग्रस्त ईरान में फंसे लगभग १०० भारतीय छात्रों की वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय के पास कोई ठोस योजना नहीं है।

जेकेएसए ने कहा कि ईरान में फंसे ये छात्र, जिनमें अधिकांश कश्मीर के हैं, १४ और १५ मार्च को वाणिज्यिक उड़ानों से भारत लौटेंगे।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर सरकार नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (आईजीआई) पर छात्रों के लिए आगे की यात्रा के लिए बसों की व्यवस्था करेगी।

यह इजरायल-ईरान तनाव के बीच लौटने वाले छात्रों का पहला समूह होगा।

एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने बताया कि छात्र पहले सड़क मार्ग से आर्मेनिया की राजधानी येरेवन के ज्वार्टनोट्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचेंगे और फिर वहां से वाणिज्यिक उड़ानों से भारत के लिए रवाना होंगे।

उन्होंने कहा कि अधिकांश छात्र १४ मार्च को लौटेंगे, जबकि बाकी छात्र १५ मार्च को भारत पहुंचेंगे। छात्रों ने अपनी फ्लाइट टिकट पहले ही बुक कर ली है और वे गुरुवार को ईरान के विभिन्न हिस्सों, खासकर उर्मिया शहर से आर्मेनिया सीमा की ओर निकलेंगे।

नासिर खुएहामी के अनुसार, छात्र फ्लाईदुबई की उड़ानों से यात्रा करेंगे। ये उड़ानें दुबई के जरिए कनेक्टिंग होंगी, और वहां से वे नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचेंगे। पहले समूह में अधिकतर छात्र फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड8124 से यात्रा करेंगे।

एसोसिएशन ने पहले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया था कि छात्रों को सुरक्षित रूप से आर्मेनिया के रास्ते यात्रा करने की अनुमति और सहायता दी जाए, क्योंकि उत्तर-पश्चिमी ईरान से निकलने के लिए यह सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक मार्ग है।

नासिर खुएहामी ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने इस अनुरोध को स्वीकार किया और आवश्यक अनुमति दी, जिससे छात्रों को अपनी यात्रा की व्यवस्था करने में मदद मिली।

उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विदेश सचिव और भारत में ईरान के राजदूत के साथ बैठकों में यह जानकारी साझा की गई कि ईरान में भारतीय छात्रों के लिए कोई आधिकारिक निकासी योजना नहीं है। जो छात्र लौट रहे हैं, वे अपनी व्यवस्था से वाणिज्यिक उड़ानों से आ रहे हैं।

एसोसिएशन के अनुसार, मंत्रालय ने ईरान में मौजूद छात्रों को यह भी सलाह दी है कि वे अपनी सटीक लोकेशन या व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा न करें, ताकि उनकी सुरक्षा बनी रहे।

खुएहामी ने कहा कि जेकेएसए लगातार छात्रों के संपर्क में है और उनकी यात्रा, सुरक्षा, सुविधाओं और भारत पहुंचने के बाद की व्यवस्था के लिए विदेश मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ समन्वय कर रहा है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगामी से भी बात की है। नई दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर डीलक्स एसी बसों की व्यवस्था की जाएगी, जिससे कश्मीर के छात्र १४ और १५ मार्च तथा बाद के दिनों में भारत पहुंचने के बाद अपने घर जा सकें।

नासिर खुएहामी ने कहा कि एसोसिएशन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और क्षेत्र से भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सहायता करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। छात्रों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान में फंसे भारतीय छात्रों की कितनी संख्या है?
लगभग 100 भारतीय छात्र ईरान में फंसे हुए हैं।
छात्रों की वापसी के लिए कौन सी उड़ानें हैं?
छात्र फ्लाईदुबई की उड़ानों से यात्रा करेंगे।
क्या विदेश मंत्रालय ने छात्रों के लिए कोई योजना बनाई है?
जेकेएसए के अनुसार विदेश मंत्रालय के पास कोई ठोस निकासी योजना नहीं है।
छात्रों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
विदेश मंत्रालय ने छात्रों को सोशल मीडिया पर अपनी लोकेशन साझा न करने की सलाह दी है।
राष्ट्र प्रेस
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