ईरान-अमेरिका वार्ता में पेजेशकियन की सतर्कता, राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर अटल रुख
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि तेहरान, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता में पूरी सावधानी और सतर्कता बरत रहा है, और उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता ईरानी जनता के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। 24 मई को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पेजेशकियन ने यह बात पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर के साथ तेहरान में हुई मुलाकात के दौरान कही।
अविश्वास की जड़ें: अमेरिका का पुराना रिकॉर्ड
पेजेशकियन ने वार्ता में सतर्कता की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की ओर से बार-बार समझौतों का उल्लंघन, बातचीत के दौरान ईरान पर हमले और उसके अधिकारियों की टारगेटेड हत्या जैसी घटनाओं ने ईरानी जनता में गहरा अविश्वास पैदा किया है। उन्होंने कहा, 'हम सिर्फ अपने लोगों के कानूनी और वैध अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत का हमारा इतिहास और अनुभव हमें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने के लिए मजबूर करता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध कभी किसी के हित में नहीं होता और इससे पूरे क्षेत्र और दुनिया को नुकसान ही होगा।
ईरान की तीन अटल शर्तें
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' ने वार्ता टीम के करीबी एक सूत्र के हवाले से बताया कि तेहरान ने शांति वार्ता के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली: इस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं होगी। दूसरी: बातचीत से पहले उसकी फ्रीज की गई संपत्ति वापस की जाए। तीसरी: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण और प्रबंधन अबाधित रहे। फार्स के अनुसार, जब तक इन तीन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि और वार्ता का इतिहास
गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इज़रायल ने 8 अप्रैल को 40 दिनों की लड़ाई के बाद युद्धविराम पर सहमति जताई थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था। युद्धविराम के बाद, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर किया, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गया। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने संघर्ष खत्म करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है।
पाकिस्तान की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर शुक्रवार रात तेहरान पहुंचे। इस मुलाकात में उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इसका परिणाम ईरान और क्षेत्रीय देशों के लिए सकारात्मक होगा। पेजेशकियन ने भी कहा कि ईरान ने 'भाई जैसे संबंधों' वाले मित्र देशों के साथ मिलकर यह वार्ता आगे बढ़ाई है।
आगे की राह
फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि वॉशिंगटन लचीलापन नहीं दिखाता, तो शांति वार्ता असफल हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों की वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति की संभावना कितनी वास्तविक है।