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ईरान-अमेरिका वार्ता में पेजेशकियन की सतर्कता, राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर अटल रुख

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ईरान-अमेरिका वार्ता में पेजेशकियन की सतर्कता, राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर अटल रुख

सारांश

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का संदेश साफ है — अमेरिका के साथ वार्ता होगी, लेकिन शर्तों पर नहीं। परमाणु कार्यक्रम से हाथ नहीं खींचना, फ्रीज संपत्ति की वापसी और होर्मुज पर नियंत्रण — ये तीन लाल रेखाएं तय कर दी गई हैं। इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद अब दोनों पक्षों के बीच दांव और ऊंचे हो गए हैं।

मुख्य बातें

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 24 मई को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर से तेहरान में मुलाकात की।
पेजेशकियन ने अमेरिका के साथ वार्ता में 'पूरी सावधानी' बरतने की बात कही, अमेरिका के पुराने समझौता-उल्लंघन को अविश्वास की वजह बताया।
ईरान ने शांति वार्ता के लिए तीन शर्तें रखीं: परमाणु कार्यक्रम पर अभी चर्चा नहीं, फ्रीज संपत्ति की वापसी, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बरकरार।
युद्धविराम 8 अप्रैल को हुआ था; 40 दिन की लड़ाई 28 फरवरी को अमेरिका-इज़रायल के हमलों से शुरू हुई थी।
11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई वार्ता बिना समझौते के समाप्त हुई; दोनों पक्ष अभी भी प्रस्तावों का आदान-प्रदान कर रहे हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि तेहरान, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जारी शांति वार्ता में पूरी सावधानी और सतर्कता बरत रहा है, और उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता ईरानी जनता के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। 24 मई को राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, पेजेशकियन ने यह बात पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर के साथ तेहरान में हुई मुलाकात के दौरान कही।

अविश्वास की जड़ें: अमेरिका का पुराना रिकॉर्ड

पेजेशकियन ने वार्ता में सतर्कता की वजह स्पष्ट करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की ओर से बार-बार समझौतों का उल्लंघन, बातचीत के दौरान ईरान पर हमले और उसके अधिकारियों की टारगेटेड हत्या जैसी घटनाओं ने ईरानी जनता में गहरा अविश्वास पैदा किया है। उन्होंने कहा, 'हम सिर्फ अपने लोगों के कानूनी और वैध अधिकारों की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत का हमारा इतिहास और अनुभव हमें बहुत ज्यादा सावधानी बरतने के लिए मजबूर करता है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि युद्ध कभी किसी के हित में नहीं होता और इससे पूरे क्षेत्र और दुनिया को नुकसान ही होगा।

ईरान की तीन अटल शर्तें

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स' ने वार्ता टीम के करीबी एक सूत्र के हवाले से बताया कि तेहरान ने शांति वार्ता के लिए तीन मुख्य शर्तें रखी हैं। पहली: इस समय ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं होगी। दूसरी: बातचीत से पहले उसकी फ्रीज की गई संपत्ति वापस की जाए। तीसरी: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण और प्रबंधन अबाधित रहे। फार्स के अनुसार, जब तक इन तीन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।

युद्धविराम की पृष्ठभूमि और वार्ता का इतिहास

गौरतलब है कि ईरान, अमेरिका और इज़रायल ने 8 अप्रैल को 40 दिनों की लड़ाई के बाद युद्धविराम पर सहमति जताई थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था। युद्धविराम के बाद, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर किया, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गया। पिछले कुछ हफ्तों में दोनों पक्षों ने संघर्ष खत्म करने के लिए कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया है।

पाकिस्तान की भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असिम मुनीर शुक्रवार रात तेहरान पहुंचे। इस मुलाकात में उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि इसका परिणाम ईरान और क्षेत्रीय देशों के लिए सकारात्मक होगा। पेजेशकियन ने भी कहा कि ईरान ने 'भाई जैसे संबंधों' वाले मित्र देशों के साथ मिलकर यह वार्ता आगे बढ़ाई है।

आगे की राह

फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, यदि वॉशिंगटन लचीलापन नहीं दिखाता, तो शांति वार्ता असफल हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। आने वाले हफ्तों में दोनों पक्षों की वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति की संभावना कितनी वास्तविक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अधिकतम माँगें हैं — और यही इस वार्ता की असली चुनौती है। परमाणु कार्यक्रम को एजेंडे से बाहर रखना वॉशिंगटन के लिए राजनीतिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस और इज़रायल दोनों इसे किसी भी समझौते की अनिवार्य शर्त मानते हैं। इस्लामाबाद वार्ता की विफलता यह भी बताती है कि मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान की सीमाएं हैं। जब तक दोनों पक्ष अपनी-अपनी 'लाल रेखाओं' पर टिके हैं, युद्धविराम एक अस्थायी विराम से ज्यादा कुछ नहीं है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में ईरान की तीन शर्तें क्या हैं?
ईरान ने तीन शर्तें रखी हैं: परमाणु कार्यक्रम पर अभी कोई चर्चा नहीं होगी, बातचीत से पहले फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति वापस की जाए, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहे। ईरानी वार्ता टीम के करीबी सूत्र के अनुसार, इन शर्तों पर सहमति के बिना वार्ता आगे नहीं बढ़ेगी।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम कब हुआ?
ईरान, अमेरिका और इज़रायल ने 8 अप्रैल को 40 दिनों की लड़ाई के बाद युद्धविराम पर सहमति जताई थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था।
इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता का क्या नतीजा रहा?
युद्धविराम के बाद 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में शांति वार्ता का एक दौर हुआ, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद दोनों पक्ष कई प्रस्तावों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, परंतु अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असिम मुनीर तेहरान क्यों गए?
जनरल असिम मुनीर शुक्रवार रात तेहरान पहुंचे और राष्ट्रपति पेजेशकियन से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया।
पेजेशकियन अमेरिका के साथ वार्ता में इतनी सावधानी क्यों बरत रहे हैं?
पेजेशकियन के अनुसार, वॉशिंगटन की ओर से बार-बार समझौतों का उल्लंघन, बातचीत के दौरान ईरान पर हमले और ईरानी अधिकारियों की टारगेटेड हत्या जैसी घटनाओं ने ईरानी जनता में गहरा अविश्वास पैदा किया है। उन्होंने कहा कि यही इतिहास उन्हें अत्यधिक सतर्कता बरतने पर मजबूर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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