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ईरान युद्ध की लागत पर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस, डेमोक्रेट्स ने मांगा खर्च का हिसाब

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ईरान युद्ध की लागत पर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस, डेमोक्रेट्स ने मांगा खर्च का हिसाब

सारांश

अमेरिकी सशस्त्र सेवा समिति में ईरान युद्ध की असली लागत पर दो-ध्रुवीय टकराव — डेमोक्रेट्स पारदर्शिता माँग रहे हैं, रिपब्लिकन 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलता बता रहे हैं। मौल्टन का संशोधन 30-27 से गिरा, लेकिन NDAA बहस में यह सवाल और गहरा होगा।

मुख्य बातें

5 जून 2026 को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति में NDAA 2027 पर बहस के दौरान ईरान युद्ध की लागत पर तीखे मतभेद उभरे।
प्रतिनिधि सेठ मौल्टन ने Pentagon से ईरान अभियान का विस्तृत वित्तीय ब्यौरा माँगने वाला संशोधन प्रस्ताव रखा।
शीर्ष डेमोक्रेट एडम स्मिथ ने कहा कि पारदर्शिता के बिना प्रभावी संसदीय निगरानी संभव नहीं।
समिति अध्यक्ष माइक डी.
रोजर्स ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को ईरानी सैन्य क्षमताओं को कमज़ोर करने में सफल बताया।
मौल्टन का संशोधन प्रस्ताव 30-27 मतों से खारिज कर दिया गया।

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति में 5 जून 2026 को ट्रंप प्रशासन की ईरान-विरोधी सैन्य नीति पर तीखी बहस हुई। वित्त वर्ष 2027 के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) पर चर्चा के दौरान युद्ध की वित्तीय लागत, रणनीतिक दिशा और अमेरिका की वैश्विक प्राथमिकताओं पर गहरे मतभेद सामने आए। डेमोक्रेटिक सदस्यों का आरोप था कि कांग्रेस और अमेरिकी जनता को अब तक इस युद्ध का पूरा खर्च नहीं बताया गया है।

डेमोक्रेट्स की माँग: पारदर्शिता और जवाबदेही

प्रतिनिधि सेठ मौल्टन ने समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा कि रक्षा विभाग (Pentagon) ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों पर हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा पेश करे। उन्होंने कहा, "जब तक पूरी वित्तीय जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक प्रतिनिधि अपनी निगरानी और जवाबदेही की जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा सकते।" मौल्टन ने यह भी कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों और आर्थिक अनिश्चितता के बीच अमेरिकी जनता पारदर्शिता की हकदार है।

प्रतिनिधि जेसन क्रो ने मौल्टन के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस का यह कर्तव्य है कि वह जाने करदाताओं का कितना धन इस युद्ध में लग रहा है। समिति में शीर्ष डेमोक्रेट एडम स्मिथ ने कहा, "हमें वास्तव में यह जानने की ज़रूरत है कि कितना खर्च हो रहा है और पैसा कहाँ जा रहा है।" स्मिथ ने यह भी कहा कि प्रशासन के ईरान संबंधी बड़े उद्देश्यों को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है।

रिपब्लिकन का बचाव: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' सफल रहा

रिपब्लिकन सदस्यों ने प्रशासन के कदमों का जोरदार बचाव किया। समिति के अध्यक्ष माइक डी. रोजर्स ने इस संघर्ष को 'पसंद से चुना गया युद्ध' बताए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की उन पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाया है।" रोजर्स का दावा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति अमेरिका को ऐसे समझौते के करीब ले आई है जो ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पैदा होने वाले खतरे को स्थायी रूप से समाप्त कर सकता है।

कांग्रेस सदस्य जो विल्सन ने भी प्रशासन का पक्ष लेते हुए कहा कि ईरान लंबे समय से एक खतरा रहा है और अमेरिकी हितों तथा क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई अनिवार्य थी।

मतदान: संशोधन प्रस्ताव खारिज

समिति ने अंततः मौल्टन के संशोधन प्रस्ताव को 30-27 मतों से अस्वीकार कर दिया। यह परिणाम दर्शाता है कि सत्तारूढ़ रिपब्लिकन बहुमत ने पारदर्शिता की माँग को फिलहाल नकार दिया है। गौरतलब है कि यह मतदान उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो NDAA के आकार लेने के साथ आने वाले हफ्तों में और तेज होने की संभावना है।

व्यापक संदर्भ: अमेरिकी रक्षा नीति पर असर

यह बहस ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी रक्षा बजट और वैश्विक सैन्य प्रतिबद्धताओं पर पहले से ही दबाव है। आलोचकों का कहना है कि ईरान अभियान की अपारदर्शी लागत इंडो-पैसिफिक रणनीति और NATO प्रतिबद्धताओं पर अमेरिकी संसाधनों के आवंटन को प्रभावित कर सकती है। NDAA पर आगे की बहस में यह मुद्दा केंद्रीय रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ईरान अभियान में वही पुरानी अपारदर्शिता लौटती दिख रही है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सफलता के दावे तब तक अधूरे हैं जब तक स्वतंत्र रूप से सत्यापन योग्य लागत और परिणाम सामने न आएँ। NDAA की आगामी बहस में यह सवाल और तीखा होगा — और अमेरिकी मतदाताओं तक इसकी गूँज पहुँचना तय है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी कांग्रेस में ईरान युद्ध पर बहस क्यों हुई?
वित्त वर्ष 2027 के नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) पर चर्चा के दौरान डेमोक्रेटिक सदस्यों ने ट्रंप प्रशासन से ईरान सैन्य अभियान की पूरी वित्तीय लागत और रणनीतिक उद्देश्यों का ब्यौरा माँगा। उनका तर्क था कि बिना पारदर्शिता के संसदीय निगरानी संभव नहीं है।
सेठ मौल्टन का संशोधन प्रस्ताव क्या था और उसका क्या हुआ?
प्रतिनिधि सेठ मौल्टन ने प्रस्ताव रखा कि Pentagon ईरान अभियान पर हुए खर्च का विस्तृत हिसाब कांग्रेस को दे। यह प्रस्ताव सशस्त्र सेवा समिति में 30-27 मतों से खारिज कर दिया गया।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या है?
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ चलाया गया सैन्य अभियान है। समिति अध्यक्ष माइक डी. रोजर्स के अनुसार इस अभियान ने ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाया है।
रिपब्लिकन सदस्यों ने युद्ध का बचाव किस आधार पर किया?
रिपब्लिकन सदस्यों ने कहा कि ईरान लंबे समय से अमेरिकी हितों और क्षेत्रीय सहयोगियों के लिए खतरा रहा है और सैन्य कार्रवाई अनिवार्य थी। समिति अध्यक्ष रोजर्स ने दावा किया कि ट्रंप की नीति ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को स्थायी रूप से समाप्त करने वाले समझौते के करीब पहुँच रही है।
NDAA 2027 में ईरान युद्ध का मुद्दा आगे कैसे प्रभावित करेगा?
मौल्टन के संशोधन की हार के बावजूद NDAA पर आगे की बहस में युद्ध की लागत और पारदर्शिता का सवाल केंद्रीय बना रहेगा। डेमोक्रेट्स ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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