ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन थोपा गया तो पूरी ताकत से देंगे जवाब: उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार, 28 जुलाई को स्पष्ट किया कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान किसी भी देश से युद्ध या टकराव नहीं चाहता, लेकिन यदि ईरान पर युद्ध थोपा गया तो देश अपनी पूरी शक्ति से उसका मुकाबला करेगा। तेहरान में आयोजित राष्ट्रीय कौशल सप्ताह एवं राष्ट्रीय उद्यमिता और तकनीकी-व्यावसायिक प्रशिक्षण दिवस समारोह में बोलते हुए उन्होंने हजारों वर्ष पुरानी ईरानी सभ्यता और उसके लोगों के अदम्य साहस की सराहना की।
मुख्य बयान और संदेश
आरिफ ने समारोह में कहा, 'हम युद्ध या टकराव नहीं चाहते। हम बातचीत के ज़रिए समस्याओं और मतभेदों का हल निकालना चाहते हैं। लेकिन, अगर हम पर युद्ध थोपा गया, तो हम अपना बचाव पूरी ताकत से करेंगे।' इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है।
इजरायल और अमेरिका पर निशाना
उपराष्ट्रपति आरिफ ने कहा कि इजरायल और अमेरिका के नेतृत्व वाली ताकतें अपने किसी भी उद्देश्य में सफल नहीं हो सकीं। उन्होंने इसे ईरानी लोगों की ऐतिहासिक दृढ़ता और मजबूत इरादे का प्रमाण बताया। आरिफ ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका के नेतृत्व वाली ताकतों ने क्षेत्र के कुछ अरब देशों के संसाधनों के सहारे नवगठित इस्लामिक रिपब्लिक पर आठ वर्षों का युद्ध थोपा था — उनका इशारा 1980 के दशक में इराक के तत्कालीन शासक सद्दाम हुसैन द्वारा ईरान के विरुद्ध लड़े गए लंबे संघर्ष की ओर था।
ऐतिहासिक संदर्भ: आठ साल का युद्ध
गौरतलब है कि 1980 से 1988 के बीच चले ईरान-इराक युद्ध को ईरान अपने इतिहास के सबसे कठिन अध्यायों में से एक मानता है। आरिफ के अनुसार उस युद्ध का परिणाम सबने देखा, फिर भी उससे कोई सबक नहीं लिया गया। यह टिप्पणी वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में ईरान की नीति को स्पष्ट करती है।
प्रतिबंधों पर ईरान का रुख
आरिफ ने कहा कि ईरान देश पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करने और उनसे उबरने में सफल रहा है। उन्होंने कहा, 'हाँ, इसकी कुछ कीमत चुकानी पड़ती है और यह स्वाभाविक है। लोगों को प्रतिबंधों या नाकेबंदी से डरना नहीं चाहिए। आखिरकार ऐसे सभी कदम उन्हीं लोगों पर उल्टा असर डालेंगे जो इन्हें लागू करते हैं।' उन्होंने ईरानी जनता को मजबूत बताते हुए कहा कि वे किसी भी दबाव, अनुचित व्यवहार या जबरदस्ती का सामना करने में सक्षम हैं।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव जारी है और परमाणु समझौते को लेकर वार्ता अनिश्चित दौर में है। आरिफ के बयान को ईरान की आधिकारिक नीति की पुनः पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है — संवाद को प्राथमिकता, लेकिन आत्मरक्षा में कोई समझौता नहीं।