ईरान के उपराष्ट्रपति आरिफ का खंडन: सीजफायर प्रस्ताव पर शीर्ष नेतृत्व में कोई मतभेद नहीं
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरिफ ने 7 जून 2026 को स्पष्ट किया कि देश के सभी वरिष्ठ अधिकारी अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में पूरी तरह एकजुट हैं और सीजफायर मसौदे को लेकर किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद की खबरें निराधार हैं। यह बयान उन अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के जवाब में आया है, जिनमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि ईरानी सेना और शीर्ष नेतृत्व के बीच सीजफायर के मसौदे पर गहरे मतभेद हैं।
आरिफ का स्पष्ट खंडन
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) से बातचीत में आरिफ ने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने वार्ताओं में एक निश्चित रणनीति अपनाई है और सभी अधिकारियों ने पूर्ण समन्वय के साथ उसका पालन किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि वार्ता के पाठ और प्रस्तावों को लेकर अधिकारियों के बीच "कोई मतभेद नहीं है।"
आरिफ ने अमेरिकी मीडिया के दावों को अफवाह करार देते हुए कहा कि तेहरान ने अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताओं में एक स्पष्ट और समन्वित रणनीति अपनाई है। यह बयान ईरानी सीमा शुल्क प्रशासन के दौरे के दौरान दिया गया।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
वर्तमान संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमले से शुरू हुआ था। तब से ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को लेकर अप्रत्यक्ष वार्ताएं जारी हैं, जिनका उद्देश्य इस संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करना है। आरिफ ने "दो थोपे गए युद्धों" का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान ने पिछले वर्ष के 12-दिवसीय संघर्ष और वर्तमान युद्ध से संकट प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव और सबक हासिल किए हैं।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ईरानी नेतृत्व को आंतरिक मतभेदों की अटकलों का सामना करना पड़ा हो — इससे पहले भी पश्चिमी मीडिया ने ऐसे दावे किए हैं, जिन्हें तेहरान ने खारिज किया है।
युद्धकालीन प्रशासनिक सुधार
आरिफ ने बताया कि युद्धकाल के दौरान कई नौकरशाही प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया। सरकारी अधिकारों का उपयोग कर आयात, माल की उतराई तथा सीमा शुल्क निकासी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे सीमा शुल्क विभाग नई व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से कार्य करने में सफल रहा।
उपराष्ट्रपति ने देशभर के सभी सीमा शुल्क कार्यालयों और बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम परिवहन गलियारों को शीघ्र पूरा करने का आह्वान किया।
क्षेत्रीय रणनीति और पड़ोसी देश
आरिफ ने दावा किया कि पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने की ईरान की रणनीति को रमजान युद्ध के बाद और अधिक गति मिली है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास योजनाओं में क्षेत्रीय अवसरों तथा उन देशों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जो ईरान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा माने जाते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है और वार्ताओं का अगला दौर निर्णायक माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में इन अप्रत्यक्ष वार्ताओं की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।