ईरानी नौसेना के पास सबसे उन्नत हथियार — रियर एडमिरल सय्यारी की चेतावनी, 'हमले का जवाब पहले से कड़ा होगा'
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी सेना के समन्वय के उप प्रमुख रियर एडमिरल हबीबुल्लाह सय्यारी ने कहा है कि ईरानी नौसेना और सशस्त्र बलों के पास आधुनिक तकनीकों के अनुरूप सबसे उन्नत उपकरण मौजूद हैं। उन्होंने यह बात नोशहर स्थित इमाम खुमैनी नौसेना विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान कही। सय्यारी ने स्पष्ट किया कि ईरानी क्षेत्र पर किसी भी हमले का जवाब 'पहले से कहीं ज़्यादा कड़े' तरीके से दिया जाएगा।
नौसेना विश्वविद्यालय का दौरा और क्षमताओं की समीक्षा
रियर एडमिरल सय्यारी ने इस दौरे के दौरान विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध, कार्यशाला और वैज्ञानिक सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान की उपलब्धियों और शैक्षणिक गतिविधियों को करीब से समझा तथा मौजूदा उपकरणों की स्थिति और विशेष समुद्री प्रशिक्षण प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना किसी भी दुश्मन की हरकत के सामने पूरी मज़बूती और अधिकार के साथ खड़ी है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता को लेकर तनाव बना हुआ है।
आईआरजीसी की चेतावनी — 'अमेरिका के पास दो ही रास्ते'
ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारी यादोल्लाह जावानी ने दावा किया है कि ईरान के विरोधियों ने उसकी ताकत और संकल्प का गलत आकलन किया है। जावानी के अनुसार, तमाम दबावों और चुनौतियों के बावजूद तेहरान पहले से अधिक मज़बूत होकर उभरा है।
जावानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में कहा कि वॉशिंगटन के पास दो विकल्प हैं — 'बुरा रास्ता' और 'सबसे बुरा रास्ता।' उन्होंने कहा, 'अब फैसला अमेरिका को करना है।'
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का दावा
क्षेत्रीय विकास का उल्लेख करते हुए जावानी ने कहा कि ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट पर एक अहम स्थान रखता है और 500 वर्षों बाद उसे वह दर्जा मिला है जो 'ईरानी लोगों का कानूनी हक' है। गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे संवेदनशील जलमार्गों में से एक है।
जावानी ने कहा कि आज ईरान 'विजयी और मज़बूत स्थिति' में है और उसने मौजूदा हालात को खत्म करने की शर्तें पहले ही सामने रख दी हैं। उन्होंने दुश्मनों को गलत आकलन से बचने की चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी सैन्य अधिकारियों के इस तरह के बयान आमतौर पर कूटनीतिक वार्ता के समानांतर आते हैं और इन्हें रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जाता है। आलोचकों का कहना है कि 'विजयी स्थिति' के दावे और वास्तविक सैन्य क्षमता के बीच के अंतर को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना कठिन है।
आने वाले हफ्तों में ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता की दिशा यह तय करेगी कि ये बयान महज़ कूटनीतिक दबाव हैं या क्षेत्रीय तनाव की वास्तविक आहट।