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क्या इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए?

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क्या इस्लामाबाद में 29 हजार से ज्यादा पेड़ काटे गए?

सारांश

इस्लामाबाद में पेड़ों की कटाई पर बवाल! क्या सरकार का दावा सच है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे? जानिए इस मुद्दे की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

इस्लामाबाद में 29,115 पेड़ काटे गए हैं।
सरकार का कहना है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे।
विपक्ष ने इसे 'फेफड़ों विहीन' बनाने की साजिश बताया है।
काटे गए पेड़ों के बदले नए पेड़ लगाने का आश्वासन दिया गया है।
इस मुद्दे पर नागरिकों की तीखी प्रतिक्रियाएँ आई हैं।

इस्लामाबाद, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 29,115 पेड़ काटे गए हैं। मंगलवार को इस मुद्दे पर संसद में जमकर बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार राजधानी को 'फेफड़ों विहीन' बना रही है, जबकि सरकारी प्रतिनिधियों ने कहा कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे।

डॉन जैसे प्रसिद्ध मीडिया आउटलेट्स ने इस घटना को कवर किया है। गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने नेशनल असेंबली को बताया कि इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी (आईसीटी) से 29,115 पेड़ हटाए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन पेड़ों के स्थान पर आने वाले महीनों में अधिक पेड़ लगाए जाएंगे।

इससे पहले, पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ के अली मुहम्मद खान और पीपीपी की शाजिया मरी ने इस्लामाबाद में पेड़ काटने का मुद्दा उठाया। अली ने कहा कि यदि गृह मंत्रालय, इस्लामाबाद प्रशासन या जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस्लामाबाद के निवासियों को विश्वास में लेकर पेड़ काटे होते, तो अविश्वास की स्थिति नहीं होती।

सांसद ने कहा, "आपने जो पेड़ काटे हैं, वे इस्लामाबाद के फेफड़े थे।" उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केवल पेपर मलबेरी (जंगली शहतूत) के पेड़ों को हटाया जा रहा था, तो "50 से 60 साल पुराने पेड़" भी क्यों काटे गए?

मरी ने भी इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर पेड़ काटने पर अपनी पार्टी की चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, "विभिन्न क्षेत्रों से रिपोर्टें आ रही हैं कि हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। चाहे आप इसे पर्यावरण के लिए हानिकारक कहकर सही ठहराएं, वे जवाबदेही से क्यों भाग रहे हैं?"

मरी ने "असली सच्चाई" और पेड़ लगाने के आंकड़ों की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को एनए की जलवायु परिवर्तन स्थायी समिति को भेजा जाए।

हाल के दिनों में यह मुद्दा इस्लामाबाद में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम नागरिकों ने भी इसका विरोध किया था। इसके बाद, क्लाइमेट चेंज और पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मलिक ने शुक्रवार को दावा किया कि लगभग 29,000 पेपर मलबेरी पेड़ों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत काटा गया है, जो 2023 और 2025 में जारी किया गया था।

ये पेड़ एलर्जी और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे थे, जिसके चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। मंत्री ने कहा कि काटे गए हर पेड़ के बदले तीन नए पौधे या पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि शहर की हरी पट्टी प्रभावित न हो।

योजना के तहत कुल हरी पट्टी को बढ़ाने के लिए परिपक्व देशी पेड़ भी लगाए जाएंगे, जो पर्यावरणीय सुधार को तेज करेंगे। जनता और सिविल सोसाइटी की ओर से इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया आई है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से यह मुद्दा गर्माया हुआ है, जहां लोग बड़े पैमाने पर पेड़ काटने का विरोध कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहें और इस मुद्दे पर एक ठोस समाधान की ओर बढ़ें।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस्लामाबाद में पेड़ क्यों काटे गए?
सरकार का कहना है कि ये पेड़ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक थे और एलर्जी का कारण बन रहे थे।
क्या सरकार नए पेड़ लगाएगी?
हाँ, मंत्री ने कहा कि काटे गए हर पेड़ के बदले तीन नए पेड़ लगाए जाएंगे।
विपक्ष इस मुद्दे पर क्या कहता है?
विपक्ष का कहना है कि सरकार इस्लामाबाद के फेफड़ों को नष्ट कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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