जयशंकर का संयुक्त राष्ट्र में आग्रह: गणित-विज्ञान में भारत के मूलभूत योगदान को मिले उचित पहचान
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 12 मई 2026 को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में गणित और विज्ञान के इतिहास को लेकर प्रचलित "एक-आयामी दृष्टिकोण" से आगे बढ़ने का आह्वान किया। 'ग्लोबल डिफ्यूजन ऑफ मैथमेटिक्स' प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने ऐसी समावेशी और लोकतांत्रिक ऐतिहासिक सोच की वकालत की, जो इन क्षेत्रों में भारत के मूलभूत योगदान को उचित मान्यता दे।
प्रदर्शनी का महत्व और संदर्भ
इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के SAMHITA कार्यक्रम के तहत तैयार की गई यह इंटरैक्टिव प्रदर्शनी संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के शीर्ष राजनयिकों के प्रवेश मार्ग पर लगाई गई है। यह प्रदर्शनी चिकित्सा, गणित, वास्तुकला, दर्शन, सौंदर्यशास्त्र और साहित्य जैसे क्षेत्रों में भारत की विद्वत्ता की विरासत को सामने रखती है।
डिजिटल पैनलों की एक श्रृंखला भारत की प्राचीन गणितीय उपलब्धियों को रेखांकित करती है — मूलभूत बाइनरी संख्या प्रणाली से लेकर बीजगणित और कलन (कैलकुलस) तक।
भारत के गणितीय योगदान पर प्रकाश
डॉ. जयशंकर ने तीसरी सदी में भारत में विकसित बाइनरी सिस्टम का विशेष उल्लेख किया, जिसकी जड़ें पिंगल के छंद सूत्र में हैं और जिस पर आज के डिजिटल युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की नींव टिकी है। प्रदर्शनी में अन्य गणितीय मील के पत्थर भी शामिल थे — जैसे पाई के लिए अनंत श्रृंखला और जिसे आज 'पाइथागोरस प्रमेय' कहा जाता है, उसके मूलभूत सिद्धांत।
उन्होंने कहा,