जापान को 'कंफर्ट वूमेन' के इतिहास का सामना करने का किया गया आग्रह
सारांश
Key Takeaways
- जापान को 'कंफर्ट वूमेन' के इतिहास का सामना करने की मांग की जा रही है।
- संयुक्त राष्ट्र ने न्याय और मुआवजे की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
- लगभग 2 लाख महिलाएं और लड़कियां इस प्रणाली का शिकार बनीं।
- कई जीवित बचे लोग अब बुजुर्ग हैं।
- जापान को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
बीजिंग, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र में, स्वतंत्र विशेषज्ञों और चीन सहित अन्य देशों के प्रतिनिधियों ने जापान से 'कंफर्ट वूमेन' के इतिहास का सामना करने का अनुरोध किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देने और जापान को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेष तंत्रों के 16 विशेषज्ञों ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें जापान द्वारा 'कंफर्ट वूमेन' पीड़ितों के सत्य, न्याय और मुआवजे के अधिकार का उल्लंघन करने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। उन्होंने जापान से औपचारिक माफी मांगने, पूर्ण मुआवजे की पेशकश करने और पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक दस्तावेजों की सुरक्षा करने का आग्रह किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि इस तथाकथित 'कंफर्ट वूमेन' प्रणाली के तहत लगभग 2 लाख महिलाओं और लड़कियों को उनकी स्वतंत्रता से वंचित किया गया, उन्हें मानव तस्करी, बलात्कार और यौन गुलामी का शिकार होना पड़ा, और कुछ मामलों में उन्हें जबरन गायब कर दिया गया।
चीन, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, पूर्वी तिमोर, इंडोनेशिया और फिलीपींस में अधिकांश जीवित बचे लोग अब गुजर चुके हैं, और जो बचे हैं, वे बुजुर्ग हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि जापान पहले से ही 'पीड़ित-केंद्रित न्याय' प्राप्त करने में असफल रहा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)