23 जुलाई 2026
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जिल बाइडेन की किताब में मोदी के स्टेट डिनर का खुलासा: वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री डिश की आखिरी वक्त पर मची थी खलबली

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जिल बाइडेन की किताब में मोदी के स्टेट डिनर का खुलासा: वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री डिश की आखिरी वक्त पर मची थी खलबली

सारांश

जिल बाइडेन की नई किताब बताती है कि मोदी के व्हाइट हाउस स्टेट डिनर में महीनों की प्लानिंग भी काफी नहीं थी — आखिरी वक्त पर वीगन और लहसुन-फ्री माँगों ने रसोई को हिला दिया। 300 हाथ मिलाने से दर्द, पावर गेम्स और सफेद रंग न पहनने की कूटनीति — यह संस्मरण व्हाइट हाउस की असली परदे के पीछे की दुनिया है।

मुख्य बातें

पूर्व फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने किताब 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमॉयर' में जून 2023 के मोदी स्टेट डिनर के पर्दे के पीछे की चुनौतियाँ साझा कीं।
शाकाहारी मेन्यू तैयार होने के बावजूद आखिरी वक्त पर वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री डिश की माँग से किचन स्टाफ को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी।
फोटो लाइन में 300 से ज़्यादा लोगों से हाथ मिलाने के कारण कलाई दर्द की समस्या; बर्फ के पानी का नुस्खा पूर्व फर्स्ट लेडी हिलेरी क्लिंटन ने सुझाया था।
राष्ट्रपति जो बाइडेन की लंबी बातचीत की आदत से कार्यक्रम समय पर खत्म करवाना मुश्किल होता था।
भारत, चीन और जापान के नेताओं के स्वागत में सफेद पोशाक नहीं पहनी जाती थी — सांस्कृतिक संवेदनशीलता के तहत।

अमेरिका की पूर्व फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने अपनी नई किताब 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमॉयर' में खुलासा किया है कि जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर से ठीक पहले रसोई में असाधारण उथल-पुथल मची थी। मेहमानों की ओर से अंतिम क्षणों में वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री भोजन की माँग ने महीनों की तैयारी को एक झटके में बदल दिया।

आखिरी वक्त पर क्या हुआ रसोई में

जिल बाइडेन ने किताब में लिखा है, 'जून 2023 में भारत के स्टेट डिनर पर हमें लगा था कि शाकाहारी मेन्यू से काम चल जाएगा, लेकिन आखिरी समय में कई लोगों ने वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री खाने की माँग कर दी।' उन्होंने आगे बताया कि किचन स्टाफ को अलग-अलग मेहमानों की ज़रूरतों के हिसाब से प्लेट्स में बदलाव करने में 'काफी मेहनत' करनी पड़ी।

यह डिनर बाइडेन प्रशासन के सबसे बड़े कूटनीतिक आयोजनों में से एक था। गौरतलब है कि स्टेट डिनर को अमेरिका में सर्वोच्च कूटनीतिक सम्मान का प्रतीक माना जाता है, जहाँ मेन्यू से लेकर फूलों की सजावट और बैठने की व्यवस्था तक हर विवरण महीनों पहले से तय किया जाता है।

फर्स्ट लेडी की भूमिका: हर फैसले पर नज़र

जिल बाइडेन ने लिखा, 'फर्स्ट लेडी के तौर पर आपको बहुत सारे फैसले लेने होते हैं; हर रंग, हर फूल, हर कोर्स। सब कुछ मिनट-दर-मिनट तय होता है और हर फैसले पर मेहमानों और मीडिया की नज़र रहती है।' उन्होंने व्हाइट हाउस की सोशल सेक्रेटरी कार्लोस एलिजोंडो की विशेष सराहना की, जिन्होंने साल भर में होने वाले सैकड़ों कार्यक्रमों को सुचारु रूप से संभाला।

किताब के अनुसार व्हाइट हाउस में हर साल छोटे सैन्य रिटायरमेंट समारोहों से लेकर मेक-ए-विश बच्चों की मुलाकात और बड़े स्टेट डिनर तक कई सौ कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

300 से ज़्यादा हाथ मिलाना और हिलेरी क्लिंटन की सलाह

जिल बाइडेन ने बड़े आयोजनों की शारीरिक थकान का भी ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा कि फोटो लाइन में 300 से ज़्यादा लोगों से हाथ मिलाने के कारण उनकी कलाई में असहनीय दर्द होने लगता था। दर्द से राहत के लिए उन्हें हाथ बर्फ के पानी में रखना पड़ता था — यह तरीका उन्हें पूर्व फर्स्ट लेडी हिलेरी क्लिंटन ने सुझाया था।

उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति जो बाइडेन अक्सर मेहमानों से लंबी बातचीत में खो जाते थे, जिससे कार्यक्रम को समय पर समाप्त करवाना कठिन हो जाता था।

सीटिंग अरेंजमेंट और 'पावर गेम्स'

किताब में जिल बाइडेन ने मेहमानों के बीच होने वाले 'पावर गेम्स' का भी रोचक वर्णन किया है। उनके अनुसार कुछ मेहमान अपनी टेबल की 'स्टार पावर' से नाखुश होकर नाम-पट्टियाँ बदलने की कोशिश करते थे, जबकि कुछ अपने पूरे परिवार को न ला पाने पर नाराज हो जाते थे। उन्होंने लिखा, 'ये पावर गेम्स मुझे हैरान करते हैं।'

सांस्कृतिक संवेदनशीलता और पोशाक का चुनाव

किताब में यह भी बताया गया है कि विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत में पोशाक का चुनाव भी कूटनीतिक दृष्टि से सोच-समझकर किया जाता था। जिल बाइडेन ने लिखा, 'हम डिजाइनरों के साथ मिलकर ऐसा पहनावा चुनते थे जो सांस्कृतिक रूप से सही हो — इसलिए भारत, चीन या जापान जैसे देशों के लिए सफेद रंग नहीं पहना जाता था, क्योंकि वहाँ सफेद रंग शोक का प्रतीक माना जाता है।'

यह संस्मरण व्हाइट हाउस की कूटनीतिक मेज़बानी के उस अनदेखे पहलू को उजागर करता है जो आम तौर पर सुर्खियों से दूर रहता है — और जो दर्शाता है कि राजनीतिक संबंधों की नींव कभी-कभी रसोई की चुनौतियों पर भी टिकी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिकी प्रोटोकॉल तंत्र की एक खामी को उजागर करता है। साथ ही, 'पावर गेम्स' और सीटिंग अरेंजमेंट की राजनीति यह याद दिलाती है कि कूटनीति की असली परीक्षा अक्सर मेज़ पर नहीं, बल्कि उसके इर्द-गिर्द होती है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिल बाइडेन की किताब में मोदी के स्टेट डिनर के बारे में क्या बताया गया है?
जिल बाइडेन ने अपनी किताब 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमॉयर' में बताया कि जून 2023 में प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित व्हाइट हाउस स्टेट डिनर से ठीक पहले मेहमानों ने वीगन, डेयरी-फ्री और लहसुन-फ्री भोजन की माँग की, जिससे किचन स्टाफ को आखिरी वक्त पर बड़े बदलाव करने पड़े। यह उन कई चुनौतियों में से एक थी जो महीनों की तैयारी के बावजूद सामने आईं।
जिल बाइडेन की नई किताब का नाम क्या है और इसमें क्या है?
किताब का नाम 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमॉयर' है। इसमें जिल बाइडेन ने फर्स्ट लेडी के रूप में अपने अनुभव साझा किए हैं — स्टेट डिनर की जटिल तैयारियों से लेकर सांस्कृतिक पोशाक चुनाव, मेहमानों के 'पावर गेम्स' और राष्ट्रपति जो बाइडेन की लंबी बातचीत की आदत तक।
व्हाइट हाउस स्टेट डिनर में भारत के लिए सफेद रंग क्यों नहीं पहना जाता?
जिल बाइडेन ने किताब में बताया कि भारत, चीन और जापान जैसे देशों के नेताओं के स्वागत में सफेद पोशाक पहनने से परहेज किया जाता था, क्योंकि इन संस्कृतियों में सफेद रंग शोक का प्रतीक माना जाता है। यह निर्णय डिजाइनरों के साथ मिलकर सांस्कृतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर लिया जाता था।
हिलेरी क्लिंटन ने जिल बाइडेन को कौन-सा नुस्खा बताया था?
जिल बाइडेन ने बताया कि बड़े आयोजनों में 300 से ज़्यादा लोगों से हाथ मिलाने के कारण उनकी कलाई में तेज़ दर्द होता था। पूर्व फर्स्ट लेडी हिलेरी क्लिंटन ने उन्हें दर्द से राहत के लिए हाथ बर्फ के पानी में रखने का तरीका सुझाया था।
अमेरिका में स्टेट डिनर का क्या महत्व होता है?
स्टेट डिनर अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित कूटनीतिक आयोजनों में से एक है, जिसका उद्देश्य विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का सम्मान करना और अमेरिका की संस्कृति व मेहमाननवाज़ी को प्रदर्शित करना होता है। इसकी तैयारी में महीनों लगते हैं और मेन्यू, सजावट, बैठने की व्यवस्था तथा पोशाक — सब कुछ कूटनीतिक दृष्टि से तय किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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