जिल बाइडेन को PM मोदी का दिया 7.5 कैरेट हीरा था पसंद, पर $20,000 की कीमत ने रोका — आत्मकथा में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला डॉ. जिल बाइडेन ने अपनी नई आत्मकथा में खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेंट किया गया 7.5 कैरेट का लैब-ग्रोन डायमंड उन्हें बेहद पसंद था, लेकिन अमेरिकी नैतिक नियमों और विदेश विभाग द्वारा आँकी गई $20,000 की कीमत के कारण वे इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं खरीद सकीं। यह हीरा अंततः अन्य राष्ट्रपति उपहारों के साथ सरकारी गोदाम में रख दिया गया।
आत्मकथा में क्या लिखा है
इसी सप्ताह प्रकाशित पुस्तक 'व्यू फ्रॉम द ईस्ट विंग: ए मेमोइर' में बाइडेन लिखती हैं — 'यह रत्न प्रयोगशाला में निर्मित हीरों के क्षेत्र में अग्रणी बनने के भारत के प्रयासों का प्रतीक था।' उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह हीरा उनके गृहनगर में $2,500 में हस्तनिर्मित किया गया था और उनके पास इसकी रसीद भी थी। शुरुआत में बाइडेन ने इसे खरीदने पर विचार किया, लेकिन जब विदेश विभाग ने इसकी कीमत $20,000 आँकी, तो उन्होंने यह विचार छोड़ दिया।
अमेरिकी नैतिक नियम और उपहारों की व्यवस्था
बाइडेन ने अपनी पुस्तक में व्हाइट हाउस के उपहार-नियमों की विस्तार से चर्चा की है। उनके अनुसार, एक निश्चित मूल्य से अधिक के सभी उपहारों की सरकारी अधिकारियों द्वारा समीक्षा की जाती है और उनका रिकॉर्ड रखा जाता है। ऐसे उपहार तकनीकी रूप से पद को दिए गए माने जाते हैं, न कि व्यक्ति को — इसलिए वे संघीय सरकार की संपत्ति बन जाते हैं। प्राप्तकर्ता चाहें तो उचित बाजार मूल्य चुकाकर उन्हें खरीद सकते हैं।
बाइडेन ने बताया कि उन्हें अनुमति थी कि वे इस हीरे को अपने कार्यालय में प्रदर्शित कर सकती हैं या आधिकारिक समारोहों में पहनने के लिए उधार ले सकती हैं। उन्होंने इसे अंगूठी में जड़वाया और कार्यकाल के दौरान आधिकारिक अवसरों पर पहना। व्हाइट हाउस छोड़ते समय उन्होंने अंगूठी वापस कर दी।
हीरे का अंतिम ठिकाना
बाइडेन लिखती हैं कि पद छोड़ने के बाद वह अंगूठी अनगिनत अन्य राष्ट्रपति उपहारों के साथ एक सरकारी गोदाम में रख दी गई, 'जिनमें से कई को बाद में नष्ट कर दिया गया।' यह टिप्पणी व्हाइट हाउस की उपहार-प्रबंधन प्रणाली की एक असाधारण झलक है, जो सार्वजनिक रूप से बहुत कम सामने आती है।
मोदी की 2023 की ऐतिहासिक अमेरिका यात्रा का संदर्भ
जून 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की वाशिंगटन राजकीय यात्रा बाइडेन प्रशासन के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक मुलाकातों में से एक मानी जाती है। व्हाइट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में 10,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी शामिल हुए थे। इस यात्रा के दौरान रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और रणनीतिक क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को प्रमुखता से रेखांकित किया गया था।
गौरतलब है कि यह हीरा उस यात्रा की कूटनीतिक भावना का प्रतीक था — भारत के लैब-ग्रोन डायमंड उद्योग में वैश्विक नेतृत्व की महत्वाकांक्षा को दर्शाता हुआ।
अन्य उपहारों का उल्लेख
बाइडेन ने फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट मैक्रों द्वारा दिए गए एक कंगन का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने भावनात्मक महत्व के कारण विदेश विभाग को भुगतान कर खरीद लिया और आज भी पहनती हैं। इसके अलावा यूक्रेन द्वारा बम के छर्रों से बनाया गया एक ब्रोच भी उन्हें मिला था, जिसकी कीमत अधिकारियों ने $14,063 आँकी थी। यह संस्मरण उन वित्तीय और नैतिक नियमों को रेखांकित करता है जो यह सुनिश्चित करते हैं कि सार्वजनिक पद पर बैठे लोग विदेशी उपहारों से व्यक्तिगत लाभ न उठा सकें।