26 जून 2026
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मुहर्रम में कराची बेहाल: बिजली-गैस कटौती से इफ्तार तक मुश्किल, दुकानों पर उमड़ी भीड़

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मुहर्रम में कराची बेहाल: बिजली-गैस कटौती से इफ्तार तक मुश्किल, दुकानों पर उमड़ी भीड़

सारांश

मुहर्रम के पवित्र दिनों में कराची की बिजली-गैस आपूर्ति चरमरा गई। के-इलेक्ट्रिक के 'छूट' के दावों के बावजूद शहर के दर्जनों इलाकों में अँधेरा रहा, गैस गायब रही और लोग इफ्तार के लिए रेस्टोरेंट के बाहर कतार में खड़े रहे — पाकिस्तान के ऊर्जा संकट का एक और कड़वा चेहरा।

मुख्य बातें

कराची में मुहर्रम और आशूरा के दौरान बिजली व गैस की गंभीर कटौती से लाखों निवासी प्रभावित हुए।
के-इलेक्ट्रिक ने मुहर्रम 11 तक लोडशेडिंग से छूट का दावा किया, लेकिन सद्दार, ल्यारी, क्लिफ्टन, कोरंगी सहित दर्जनों इलाकों में बिजली गुल रही।
गैस संकट के कारण इफ्तार और सेहरी बनाना मुश्किल; रेस्टोरेंट व दुकानों के बाहर लंबी कतारें लगीं।
बिजली कटौती से पानी की आपूर्ति भी बाधित — पंप बंद रहने से नलों में पानी नहीं पहुँचा।
हैदराबाद में एसएसजीसी अपने निर्धारित 9 घंटे के गैस शेड्यूल का भी पालन नहीं कर पाई; कुछ इलाकों में दबाव इतना कम कि खाना बनाना असंभव।
नागरिकों ने सोशल मीडिया पर यूटिलिटी कंपनियों और सिंध सरकार की आलोचना की।

कराची में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर बिजली और गैस की गंभीर कटौती ने लाखों निवासियों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 26 जून 2026 को आशूरा के दिन भी लोगों को सेहरी और इफ्तार का खाना बनाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बिजली और गैस की अनुपलब्धता ने धार्मिक आयोजनों के बीच आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया।

कहाँ-कहाँ रही कटौती

सद्दार, बर्न्स रोड, ल्यारी, क्लिफ्टन, डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी, फेडरल बी एरिया, उत्तरी कराची, लियाकतबाद, मालिर, कोरंगी, शाह फैसल कॉलोनी, ओरंगी टाउन, केमारी और बलदिया टाउन सहित शहर के बड़े हिस्सों में बुधवार देर रात से लंबे समय तक बिजली गुल रही। कराची की बिजली आपूर्ति कंपनी के-इलेक्ट्रिक ने दावा किया कि उसने मुहर्रम की 11 तारीख तक कई इलाकों को तय लोडशेडिंग से छूट दी थी, लेकिन स्थानीय निवासियों की शिकायतें इस दावे से मेल नहीं खातीं।

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक आयोजनों के दौरान कई इलाकों में लोगों को बिजली के वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ा। के-इलेक्ट्रिक का कहना था कि आपूर्ति शेड्यूल के अनुसार जारी है, परंतु ज़मीनी हकीकत इसके उलट रही।

गैस संकट ने बढ़ाई और मुश्किल

बिजली संकट के साथ-साथ शहर के अधिकांश इलाकों में गैस की आपूर्ति भी बाधित रही। इफ्तार के समय कई मोहल्लों में गैस पाइपलाइन पूरी तरह ठप हो गई, जिससे परिवारों के लिए खाना पकाना लगभग असंभव हो गया। नतीजतन, शहर के हर कोने में रेस्टोरेंट और नाश्ते की दुकानों के बाहर लंबी कतारें लग गईं, जहाँ लोग इफ्तार के लिए तैयार खाना खरीदने को मजबूर हुए।

बिजली कटौती का एक और बड़ा असर पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा — पंप चलाने के लिए बिजली न होने से नलों में पानी भी नहीं पहुँचा, जिससे परेशानी और बढ़ गई।

हैदराबाद में भी यही हाल

इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद में भी गैस संकट की स्थिति सामने आई थी। सुई सदर्न गैस कंपनी (एसएसजीसी) के अनुसार सुबह, दोपहर और रात में तीन-तीन घंटे गैस मिलनी चाहिए थी, लेकिन पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी इस सीमित शेड्यूल का भी पालन नहीं कर पाई। जिन इलाकों में गैस आई, वहाँ भी दबाव इतना कम था कि खाना बनाना मुश्किल था। निवासियों के अनुसार, तय समय पर पाइपलाइन में पहले 15-20 मिनट हवा आती है, उसके बाद गैस आना शुरू होती है।

लतीफाबाद के एक निवासी ने कहा, 'हम अपने गैस बिल में हवा के लिए पैसे दे रहे हैं जबकि एक बार का खाना बनाने के लिए हमें किचन में घंटों बिताने पड़ते हैं।' यह स्थिति तेज गर्मी के मौसम में विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत कठिन रही।

जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

नागरिक ज़फर हसन ने यूटिलिटी सेवाओं पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा, 'क्या उन्हें यह एहसास नहीं है कि लोगों को बिना रुकावट गैस और बिजली मिलनी चाहिए, खासकर धार्मिक दिनों में जब इसकी सबसे ज़्यादा जरूरत होती है?' एक अन्य नागरिक ने मुहर्रम से पहले यूटिलिटी कंपनियों के साथ समन्वय न कर पाने के लिए सिंध सरकार की आलोचना की। गैस और बिजली की शिकायतों को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर भी आवाज़ उठाई।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही ऊर्जा क्षेत्र में गहरे संकट से जूझ रहा है। गौरतलब है कि कराची और हैदराबाद में यह स्थिति कोई नई नहीं है — धार्मिक और सार्वजनिक अवसरों पर बुनियादी सेवाओं की विफलता बार-बार सामने आती रही है। नागरिक समाज और विपक्षी दलों की माँग है कि सरकार यूटिलिटी कंपनियों को जवाबदेह बनाए और विशेष धार्मिक अवसरों पर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो धार्मिक अवसरों पर और भी उजागर होती है। के-इलेक्ट्रिक का 'छूट' का दावा और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई बताती है कि जवाबदेही तंत्र पूरी तरह विफल है। सिंध सरकार का यूटिलिटी कंपनियों के साथ पूर्व-समन्वय न करना प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल है। जब तक बुनियादी ढाँचे में निवेश और नियामकीय जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, हर त्योहार पर यही दृश्य दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कराची में मुहर्रम के दौरान बिजली-गैस कटौती क्यों हुई?
कराची में पहले से जारी बिजली और गैस की कमी मुहर्रम के दौरान और गंभीर हो गई। के-इलेक्ट्रिक ने लोडशेडिंग से छूट का दावा किया, लेकिन शहर के दर्जनों इलाकों में बुधवार देर रात से लंबे समय तक बिजली गुल रही और गैस की आपूर्ति भी बाधित रही।
कराची के किन इलाकों में बिजली कटौती की समस्या रही?
सद्दार, बर्न्स रोड, ल्यारी, क्लिफ्टन, डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी, फेडरल बी एरिया, उत्तरी कराची, लियाकतबाद, मालिर, कोरंगी, शाह फैसल कॉलोनी, ओरंगी टाउन, केमारी और बलदिया टाउन सहित शहर के बड़े हिस्सों में बिजली कटौती दर्ज की गई।
के-इलेक्ट्रिक का इस मामले में क्या कहना है?
के-इलेक्ट्रिक ने दावा किया कि उसने मुहर्रम 11 तक कई इलाकों को तय लोडशेडिंग से छूट दी थी और आपूर्ति शेड्यूल के अनुसार जारी थी। हालाँकि, स्थानीय निवासियों की शिकायतें और मीडिया रिपोर्टें इस दावे से मेल नहीं खातीं।
हैदराबाद में गैस संकट की स्थिति क्या है?
सुई सदर्न गैस कंपनी (एसएसजीसी) के शेड्यूल के अनुसार हैदराबाद में रोज़ाना 9 घंटे गैस मिलनी चाहिए, लेकिन कंपनी इस सीमित शेड्यूल का भी पालन नहीं कर पाई। कुछ इलाकों में गैस का दबाव इतना कम था कि खाना बनाना लगभग असंभव था, और पाइपलाइन में पहले 15-20 मिनट हवा आती रही।
इस संकट से आम नागरिकों पर क्या असर पड़ा?
बिजली और गैस न होने से लोग इफ्तार और सेहरी का खाना नहीं बना सके और रेस्टोरेंट व दुकानों के बाहर लंबी कतारों में खड़े रहे। बिजली कटौती से पानी की आपूर्ति भी बाधित हुई, और तेज गर्मी में यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के लिए कठिन रही।
राष्ट्र प्रेस
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