जैसलमेर में तूफान-बारिश से 1500 बिजली खंभे धराशायी, 200 गांवों में ब्लैकआउट; ₹2.5 करोड़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के जैसलमेर ज़िले में सोमवार रात आए भीषण तूफान और तेज बारिश ने विद्युत ढाँचे को बड़े पैमाने पर तहस-नहस कर दिया, जिससे करीब 1500 बिजली के खंभे गिर गए और लगभग 200 गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। अधिकारियों के अनुसार, जोधपुर डिस्कॉम को इस आपदा से अब तक करीब ₹2.5 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है, और ग्रामीण इलाकों में 16 घंटे से अधिक समय से ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
तेज हवाओं और बारिश के चलते 33 केवी और 11 केवी की कई महत्वपूर्ण लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, साथ ही कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर भी टूट गए हैं। मोहनगढ़ और चांधन क्षेत्र इस तूफान से सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। खुईयाला, सियाम्बर, सांगड़, चेलक और पोलजी डेयरी सहित करीब 200 गांवों का विद्युत संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
अधिकारियों का बयान
जैसलमेर के अधीक्षण अभियंता भैराराम चौधरी ने पत्रकारों को बताया कि सोमवार रात तूफान के दौरान 1500 से अधिक पोल गिरे और कई ट्रांसफॉर्मर तथा तार क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि नुकसान का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है क्योंकि दूरदराज के इलाकों से रिपोर्टिंग अभी जारी है। चौधरी के अनुसार, विभाग की प्राथमिकता पहले प्रमुख फीडरों और हाई वोल्टेज लाइनों को चालू करना है।
बहाली की कार्रवाई
जोधपुर डिस्कॉम की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और फीडरों को बहाल करने में जुट गई हैं। सोमवार रात ही पोकरण और जैसलमेर शहर में बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी गई थी। हालाँकि, अधिकारियों ने आगाह किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य आपूर्ति बहाल होने में 24 से 48 घंटे लग सकते हैं।
आम जनता पर असर
बिजली व्यवस्था ठप होने के साथ ही कई गांवों में पेयजल संकट भी गहरा गया है, क्योंकि पंपिंग व्यवस्था ठप हो गई है। ग्रामीणों को रात भर अँधेरे और गर्मी में रहना पड़ा, और दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित है। डिस्कॉम अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त कर्मी और सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही है, परंतु दूरस्थ गांवों तक पहुँचने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
क्या होगा आगे
विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अपील की है कि वे गिरे हुए बिजली के खंभों और टूटे तारों से दूरी बनाकर रखें ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान में पूर्व-मानसून तूफान बीते कुछ वर्षों में बार-बार बिजली ढाँचे को नुकसान पहुँचाते रहे हैं, जिससे विभाग की आपदा-तैयारी पर भी सवाल उठते रहे हैं। आने वाले 48 घंटों में बहाली कार्य की रफ़्तार ही तय करेगी कि संकट कितनी जल्दी थमता है।