मलेशिया की नई रणनीति: मिडिल ईस्ट संकट के बीच नए ट्रांजिट रूट की खोज
सारांश
Key Takeaways
- मलेशिया मिडिल ईस्ट संकट के बीच नए ट्रांजिट रूट की खोज कर रहा है।
- ग्लोबल अनिश्चितता से निपटने के लिए एशियाई बाजार पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- विजिट मलेशिया 2026 का लक्ष्य अभी भी प्राप्य है।
- मिडिल ईस्ट में बढ़ती लड़ाई से ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आ रही है।
- देश विभिन्न उपाय कर रहा है, जैसे कि ईंधन राशनिंग और औद्योगिक शटडाउन।
कुआलालंपुर, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य एशिया में चल रहे तनाव के मद्देनजर, मलेशिया एक नए ट्रांजिट रूट की खोज में है। देश की सरकारी एजेंसी के अनुसार, पर्यटकों की आवक को बनाए रखने के लिए एशियाई बाजार पर अपना ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मलेशिया की सरकारी एजेंसी 'बरनामा' ने सोमवार को मिनिस्ट्री ऑफ टूरिज्म, आर्ट्स एंड कल्चर के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल (टूरिज्म), चुआ चून ह्वा के माध्यम से बताया कि इस संघर्ष ने मिडिल ईस्ट के उन महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब पर असर डाला है, जिनका उपयोग पारंपरिक रूप से एशियाई क्षेत्रों में जाने के लिए लंबी दूरी के यात्रियों द्वारा किया जाता रहा है। इसी कारण सरकार को आगंतुकों के लिए दूसरे मार्गों का विकल्प देखने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
उन्होंने कहा, "मिडिल ईस्ट में ट्रांजिट कुछ हद तक प्रभावित हुआ है, इसलिए हम इस स्थिति से निपटने के लिए तरीके तलाश रहे हैं, जिसमें प्रभावित क्षेत्रों से बचने के लिए अन्य ट्रांजिट एयरपोर्ट का उपयोग करना शामिल है।"
बरनामा की रिपोर्ट के अनुसार सिन्हुआ ने बताया कि चुआ ने कहा कि सरकार उन क्षेत्रीय बाजारों पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, जिन्हें इस संघर्ष का खास असर नहीं पड़ा है, विशेषकर एशिया के भीतर, ताकि वैश्विक अनिश्चितता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए एक ठोस रणनीति बनाई जा सके।
चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने कहा कि मलेशिया का पर्यटन परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, और विजिट मलेशिया 2026 (वीएम2026) का निर्धारित लक्ष्य अभी भी प्राप्य है।
उनके अनुसार, 2026 के पहले दो महीनों में मलेशिया आने वाले लोगों की संख्या में साल-दर-साल 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जिसे चीनी नव वर्ष के दौरान उच्च मांग का समर्थन मिला।
उन्होंने आगे कहा कि मार्च का डेटा अभी भी एकत्र किया जा रहा है, और अनुमानों में उसी अनुसार बदलाव किया जा सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती लड़ाई के कारण तेल और गैस की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए, दुनिया के विभिन्न देश अपने लोगों के लिए लगातार ऊर्जा पहुंच को सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं।
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा बाधाओं का प्रभाव 1970 के दशक के दो बड़े तेल संकटों एवं 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद आए प्राकृतिक गैस संकट के बराबर है।
एशिया, अफ्रीका और यूरोप के देशों ने कई विशेष कदम उठाए हैं, जिसमें सार्वजनिक छुट्टियों की संख्या बढ़ाना, वर्क-फ्रॉम-होम आदेश, ईंधन की राशनिंग और सीमित ईंधन भंडार को बढ़ाने के लिए औद्योगिक शटडाउन शामिल हैं।