होर्मुज़ संकट के बीच ऑस्ट्रेलिया-जापान ने ऊर्जा और जरूरी खनिजों पर किया ऐतिहासिक समझौता
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया और जापान ने 4 मई 2026 को ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए, जब मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हो रहे हैं। होर्मुज़ जलसंधि के प्रभावी रूप से बंद होने की आशंका के बीच दोनों देशों ने अपनी ऊर्जा आत्मनिर्भरता और आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करने का संकल्प लिया।
समझौते की पृष्ठभूमि और अहमियत
जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 3 से 5 मई तक तीन दिवसीय आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं — यह उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा है। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने कहा कि दोनों देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं को भविष्य के आर्थिक झटकों और अनिश्चितता से सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता चरम पर है।
होर्मुज़ जलसंधि का संकट और हिंद-प्रशांत पर असर
प्रधानमंत्री ताकाइची ने मीडिया को बताया कि होर्मुज़ जलसंधि के प्रभावी रूप से बंद होने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर बहुत बड़ा असर पड़ रहा है। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया जापान को लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, और जापान बदले में कैनबरा के लगभग 7 फीसदी डीजल का स्रोत है। ताकाइची ने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी आत्मनिर्भरता और लचीलेपन को मज़बूत करना है।
अमेरिका का 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ जलसंधि में फंसे जहाजों के मुक्त आवागमन के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की घोषणा की। ट्रंप ने कहा कि कई देशों ने मदद के लिए वाशिंगटन से संपर्क किया और बताया कि उनका चल रहे संघर्ष से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनके जहाज होर्मुज़ में फंसे हुए हैं।
ट्रंप ने कहा,