मोदी के किर्गिस्तान दौरे में भावुक मुलाकातें: 'भारत हमारा बड़ा भाई है' — सैन्य अधिकारी, योग प्रशिक्षक
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किर्गिस्तान के आधिकारिक दौरे के दौरान 31 अगस्त 2026 को बिश्केक में उनसे मिलने वाले किर्गिज़ सैन्य अधिकारियों, योग प्रशिक्षकों और संरक्षण विशेषज्ञों ने इस मुलाकात को जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक बताया। किसी के लिए यह 'लाइफटाइम अपॉर्च्युनिटी' थी, तो किसी के लिए टेलीविजन पर देखे जाने वाले प्रधानमंत्री को पहली बार आमने-सामने देखने का दुर्लभ अवसर।
सैन्य अधिकारियों की भावनाएं
किर्गिस्तान के कैप्टन तालाइबेक ने बताया कि उन्होंने भारत की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में तीन वर्ष और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में एक वर्ष प्रशिक्षण लिया है। उनके अनुसार, 'भारत के साथ मेरा रिश्ता बहुत मजबूत है। वहाँ मेरे दोस्त हैं, मेरे कोर्समेट हैं। आज हम दोनों देशों के बीच एक पुल की तरह काम कर रहे हैं।'
कैप्टन तालाइबेक ने भारत-किर्गिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास 'खंजर' का भी उल्लेख किया, जो दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और परिचालन सहयोग को निरंतर सुदृढ़ करता है।
लेफ्टिनेंट तिलेमन ने मोदी से मुलाकात को 'कल्पना से परे' बताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध स्वाभाविक और सहज हैं, और संयुक्त सैन्य अभियानों में साझेदारी इसे और गहरा करती है। उन्होंने इसे 'लाइफटाइम अपॉर्च्युनिटी' करार दिया।
सीनियर लेफ्टिनेंट बैमुर मुर्जा ने हिंदी में बात करते हुए कहा कि भारत में प्रशिक्षण के दौरान बने रिश्ते आज भी उनके लिए अमूल्य हैं। उन्होंने अपने भारतीय कोर्समेट्स और उनके परिवारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मोदी से मिलना 'बड़ा अवसर था, जो सबको नसीब नहीं होता।' उन्होंने यह भी कहा कि अब तक वे प्रधानमंत्री को केवल टेलीविजन पर देखते थे — पहली बार सामने से देखने का मौका मिला।
योग की कड़ी से जुड़े किर्गिज़ नागरिक
किर्गिस्तान की योग प्रशिक्षक लुनारा ने भारत और किर्गिस्तान के रिश्तों को 'बहुत गर्मजोशी भरे' बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत में करीब 10 वर्षों तक योग सिखाया है और इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को योग से जोड़ने का अवसर मिला। एक अन्य योग प्रशिक्षक असिलकान ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में स्वयं को फिट रखने के लिए योग सीखा, परंतु धीरे-धीरे यह उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया। उन्होंने कहा, 'मेरे लिए योग सिर्फ शारीरिक व्यायाम नहीं है — यह सांस लेने, चलने-फिरने और सोचने के तरीके से भी जुड़ा है।'
योग साधक अरीना नियाजबेकोवा ने भारत को किर्गिस्तान का 'बड़ा भाई' बताते हुए कहा कि भारत हमेशा किर्गिस्तान के साथ खड़ा रहा है।
पर्यावरण और संरक्षण पर भी चर्चा
स्नो लेपर्ड संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े कौस्तुभ शर्मा ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत 'छोटी लेकिन बहुत उत्पादक' रही। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता पर चर्चा की। शर्मा के अनुसार, दोनों देश पहले से ही अच्छे मित्र हैं, किंतु व्यापार, लोगों के बीच संपर्क, क्षमता निर्माण और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अभी काफी संभावनाएं शेष हैं।
किर्गिज़ गणराज्य की महिला नेता की प्रतिक्रिया
किर्गिज़ गणराज्य की महिला कांग्रेस के अंतर्राष्ट्रीय विभाग की प्रमुख गुलाइम एशबायेवा ने कहा, 'मैं उनसे मिली और मुझे ये पल हमेशा याद रहेंगे। उनसे मैं बहुत प्रेरित हुई।' उनके लिए यह मुलाकात केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रेरणा का स्रोत बनी।
लोगों के बीच संपर्क — दोनों देशों की असली ताकत
गौरतलब है कि किर्गिस्तान में बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं, विशेष रूप से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में। बिश्केक में रहने वाले लोगों ने इस मानवीय संपर्क को भारत-किर्गिस्तान संबंधों की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बताया। असिलकान ने कहा कि भारतीय छात्रों की मौजूदगी दोनों देशों के बीच जन-स्तरीय संबंधों को निरंतर मजबूत करती है। यह दौरा स्पष्ट करता है कि भारत-किर्गिस्तान संबंध केवल राजनयिक मेजों तक सीमित नहीं — वे सेना की बैरकों, योग स्टूडियो और पहाड़ी संरक्षण परियोजनाओं तक फैले हुए हैं।