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नेपाल फ्लैश फ्लड: भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने शुरू किया डीएनए विश्लेषण, 1,068 शव बरामद

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नेपाल फ्लैश फ्लड: भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने शुरू किया डीएनए विश्लेषण, 1,068 शव बरामद

सारांश

नेपाल के विनाशकारी फ्लैश फ्लड में 1,068 शव बरामद और 4,606 लापता — भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में डीएनए विश्लेषण शुरू किया। 400 शव आंशिक अवस्था में मिले, पहचान की चुनौती गहरी है।

मुख्य बातें

भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने 1 सितंबर 2026 को नेपाल में फ्लैश फ्लड पीड़ितों की पहचान के लिए डीएनए विश्लेषण शुरू किया।
जांच काठमांडू के खुमलटार स्थित नेपाल पुलिस केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में हो रही है।
नेपाल पुलिस के अनुसार अब तक 1,068 शव बरामद, जिनमें से 400 शव आंशिक अवस्था में मिले।
अभी भी 4,606 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
चितवन जिले में सर्वाधिक शव मिले; डीएनए नमूने लेकर नदी किनारे अंतिम संस्कार किया गया।
भारत और चीन ने भोटेकोशी व त्रिशूली नदी घाटी की सुरंगों में खोज के लिए तकनीकी टीमें भेजी हैं।

भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम ने नेपाल में आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड के पीड़ितों की पहचान के लिए 1 सितंबर 2026 को औपचारिक रूप से डीएनए विश्लेषण अभियान शुरू कर दिया। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने मंगलवार को पुष्टि की कि यह टीम नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से जुटाए गए नमूनों की जांच कर रही है। नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके हैं और 4,606 लोग अभी भी लापता हैं।

डीएनए जांच कहाँ और कैसे हो रही है

भारतीय फोरेंसिक टीम काठमांडू घाटी के खुमलटार स्थित नेपाल पुलिस केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में काम कर रही है। टीम का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से एकत्र किए गए डीएनए नमूनों की तेज़ी से जांच कर मृतकों और लापता व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित करना है। यह सहयोग नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत द्वारा उपलब्ध कराया गया है।

मृतकों की संख्या और पहचान की चुनौती

नेपाल पुलिस के आँकड़ों के अनुसार, मंगलवार शाम तक बरामद 1,068 शवों में से 400 शव केवल आंशिक अवस्था में मिले, जिससे परंपरागत तरीकों से पहचान करना लगभग असंभव हो गया है। चितवन जिले में सर्वाधिक शव मिले हैं, जहाँ प्रशासन ने डीएनए नमूने सुरक्षित करने के बाद सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार नदी किनारे खुले स्थानों पर कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब परिजन अपने प्रियजनों की पहचान के लिए बेचैन हैं।

लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल

नेपाल पुलिस के मुताबिक, अभी भी 4,606 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की कुल संख्या में और वृद्धि हो सकती है। गौरतलब है कि विदेशी नागरिकों की उपस्थिति इस आपदा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर बनाती है।

भारत और चीन की संयुक्त राहत पहल

नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटी में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में खोज और बचाव अभियान के लिए तकनीकी टीमें भेजी हैं। यह दोनों देशों का एक दुर्लभ समन्वित प्रयास है, जो नेपाल की इस असाधारण आपदा की गंभीरता को रेखांकित करता है।

नेपाल सरकार की प्रतिक्रिया

नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है, उनका 'कानून और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत प्रबंधन किया जा रहा है।' उन्होंने यह भी बताया कि डीएनए नमूनों और अन्य ज़रूरी साक्ष्यों को भविष्य की पहचान के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है, जबकि पहचाने जा चुके शवों को उनके परिजनों को सौंपा जा रहा है। आने वाले दिनों में डीएनए मिलान की प्रक्रिया तेज़ होने के साथ पीड़ित परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 4,606 लापता लोगों में से कितनों की पहचान डीएनए मिलान से वास्तव में हो पाएगी — खासकर जब 400 शव पहले से ही आंशिक अवस्था में हैं। चितवन में बिना पूर्ण पहचान के किए गए सामूहिक अंतिम संस्कार, भले ही नमूने सुरक्षित रखे गए हों, परिजनों के लिए न्याय की एक अधूरी कड़ी बने रहेंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि भारत और चीन का एक साथ राहत में उतरना नेपाल की भू-राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है — और यह देखना होगा कि यह समन्वय ज़मीन पर कितना प्रभावी साबित होता है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल फ्लैश फ्लड में भारतीय फोरेंसिक टीम क्या कर रही है?
भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर बाढ़ पीड़ितों के डीएनए नमूनों का विश्लेषण कर रही है। इसका उद्देश्य मृतकों और लापता लोगों की वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करना है।
नेपाल बाढ़ में अब तक कितने लोगों की मौत हुई और कितने लापता हैं?
नेपाल पुलिस के अनुसार मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके हैं और 4,606 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों में 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।
डीएनए जांच की ज़रूरत क्यों पड़ी?
बरामद 1,068 शवों में से 400 शव आंशिक अवस्था में मिले हैं, जिससे परंपरागत तरीकों से पहचान करना बेहद मुश्किल है। ऐसे में भविष्य में पहचान सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों ने डीएनए नमूने सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक विश्लेषण का सहारा लिया है।
चितवन जिले में क्या स्थिति है?
चितवन जिले में सबसे अधिक शव मिले हैं। प्रशासन ने डीएनए नमूने एकत्र करने के बाद सैकड़ों शवों का अंतिम संस्कार नदी किनारे खुले स्थानों पर किया है। यहाँ पहचान की प्रक्रिया सबसे जटिल बनी हुई है।
नेपाल सरकार ने अज्ञात शवों के प्रबंधन के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने कहा कि अज्ञात शवों का 'कानून और वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत प्रबंधन' किया जा रहा है। डीएनए नमूने और अन्य साक्ष्य भविष्य की पहचान के लिए सुरक्षित रखे जा रहे हैं, जबकि पहचाने गए शव परिजनों को सौंपे जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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