अमेरिका-ईरान शांति समझौते का न्यूजीलैंड ने किया स्वागत, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
न्यूजीलैंड ने 15 जून 2026 को अमेरिका-ईरान के बीच हुए शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोले जाने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त किए जाने की बात कही गई है। यह समझौता महीनों के कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बाद संभव हुआ है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को हिला दिया था।
न्यूजीलैंड की आधिकारिक प्रतिक्रिया
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'यह अहम और सकारात्मक समझौता उस इलाके में तनाव कम करने और स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है, जो वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावटों का न्यूजीलैंड और उसके प्रशांत क्षेत्र के सहयोगियों की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है।
पीटर्स ने कहा कि वेलिंगटन उन कदमों का स्वागत करता है 'जो इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने और मुख्य सप्लाई चेन में भरोसा बहाल करने में मदद करेंगे।' उन्होंने बातचीत और कूटनीति को 'लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को सुलझाने का सबसे असरदार तरीका' बताते हुए इस समझौते को 'एक अच्छा पहला कदम' करार दिया।
प्रधानमंत्री लक्सन का एक्स पर बयान
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते को 'तनाव कम करने और वैश्विक स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम' बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इस टकराव ने न्यूजीलैंड के लोगों की जेब पर असर डाला है और घरेलू बजट पर दबाव बनाया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से स्थिर व्यापारिक रास्ते बहाल करने, ईंधन की सप्लाई शुरू करने और हमारी अर्थव्यवस्था को गतिमान रखने में मदद मिलेगी।'
ट्रंप की घोषणा और समझौते की पृष्ठभूमि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान ने एक समझौता पूरा कर लिया है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल जाएगा और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त होगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई!'
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यह संकरा जलमार्ग महीनों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव का केंद्र बना हुआ था, और शिपिंग में रुकावटों के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और बढ़ती कीमतों से जूझ रहे थे। प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों पर इस संकट का असर विशेष रूप से गहरा रहा, क्योंकि उनकी ईंधन आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग सीधे तौर पर प्रभावित हुए।
आगे की राह
सभी पक्षों से अपील की गई है कि वे इस गति को आगे बढ़ाएं ताकि मध्य पूर्व में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि समझौते के क्रियान्वयन की प्रक्रिया कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है और क्या यह वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में स्थायी राहत दिला पाएगी।