उत्तर कोरिया का मिसाइल लॉन्च पर मौन, ट्रंप-शी बैठक से पहले तनाव बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने रविवार, 21 सितंबर 2026 को वॉनसान इलाके से दो कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, लेकिन सोमवार सुबह तक कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) ने इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी। यह लॉन्च अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वॉशिंगटन में इस गुरुवार होने वाली अहम बैठक से ठीक पहले हुआ है।
मिसाइलों का विवरण और समयक्रम
दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) के अनुसार, पहली मिसाइल दोपहर करीब 3 बजे दागी गई और उसने लगभग 450 किलोमीटर की दूरी तय की। दूसरी मिसाइल शाम करीब 5:50 बजे लॉन्च हुई और 600 किलोमीटर से अधिक दूर तक गई। दोनों मिसाइलें ईस्ट सी की दिशा में दागी गईं और उनके बीच करीब तीन घंटे का अंतर रहा।
सरकारी मीडिया की खामोशी का पैटर्न
गौरतलब है कि KCNA का यह मौन कोई पहली बार नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले महीने किए गए तीन मिसाइल लॉन्च के बारे में भी उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने कोई कवरेज नहीं की थी। हालाँकि, 12 सितंबर को किए गए एक लॉन्च की जानकारी दो दिन बाद दी गई थी — और वह लॉन्च दक्षिण कोरिया, अमेरिका व जापान के संयुक्त सैन्य अभ्यास समाप्त होने के एक दिन बाद हुआ था। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया की मीडिया रणनीति तेज़ी से अनियमित होती जा रही है, जिससे विश्लेषकों के लिए प्योंगयांग की मंशा का आकलन करना कठिन हो गया है।
भू-राजनीतिक संदर्भ और संकेत
ये मिसाइल लॉन्च संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल जनरल डिबेट से ठीक पहले हुए हैं, जो मंगलवार को अमेरिकी समयानुसार शुरू होनी है। कथित तौर पर माना जा रहा है कि इन लॉन्च के जरिए प्योंगयांग ट्रंप प्रशासन को यह संदेश देना चाहता है कि वह अपनी सैन्य क्षमता विस्तार की रफ्तार धीमी करने के मूड में नहीं है। यह व्यवहार उत्तर कोरिया के उस पुराने पैटर्न के अनुरूप है, जिसमें वह बड़ी कूटनीतिक बैठकों से पहले अपनी उपस्थिति दर्ज कराता रहा है।
किम यो-जोंग की चेतावनी और पृष्ठभूमि
ये लॉन्च उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की प्रभावशाली बहन किम यो-जोंग के बयान के ठीक दो दिन बाद हुए। किम यो-जोंग ने अमेरिका के नेतृत्व में हुए बहुराष्ट्रीय 'पैसिफिक वैनगार्ड' समुद्री सैन्य अभ्यास की तीखी आलोचना की थी और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया इसका 'उसी तरह या उससे भी ज्यादा ताकतवर तरीके' से जवाब देगा। प्योंगयांग ने हाल के दिनों में दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान की भागीदारी वाले प्रमुख सैन्य अभ्यासों की आलोचना भी तेज़ कर दी है।
आगे क्या होगा
ट्रंप-शी बैठक में उत्तर कोरिया का मुद्दा एजेंडे पर रहने की संभावना है, खासतौर पर इन ताज़ा लॉन्च के मद्देनज़र। विश्लेषकों का कहना है कि प्योंगयांग का मीडिया मौन जानबूझकर भ्रम की स्थिति बनाने की रणनीति हो सकती है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए उचित कूटनीतिक प्रतिक्रिया तय करना मुश्किल हो जाए। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रियाएँ आने की उम्मीद है।