रिमपैक नौसैनिक अभ्यास पर उत्तर कोरिया का कड़ा विरोध, 'प्रतिरोधक क्षमता नए स्तर तक ले जाने' की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया ने अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास रिम ऑफ द पैसिफिक (रिमपैक) को 'आक्रामक युद्ध की रिहर्सल' बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है और चेतावनी दी है कि वह जवाब में अपनी 'प्रतिरोधक क्षमता को नए स्तर' तक ले जाएगा। 4 अगस्त को उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) में एक सैन्य टिप्पणीकार के हवाले से प्रकाशित लेख में यह बयान सामने आया। प्योंगयांग का यह रुख ऐसे समय में आया है जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
रिमपैक अभ्यास पर उत्तर कोरिया के आरोप
केसीएनए में प्रकाशित लेख के अनुसार, रिमपैक अभ्यास दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच गहराते सैन्य सहयोग का प्रतीक है। प्योंगयांग का आरोप है कि इस अभ्यास का असली उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य दबदबा कायम करना है, न कि केवल नियमित प्रशिक्षण। लेख में यह भी दावा किया गया कि इस बार के अभ्यास में दक्षिण कोरिया और जापान की भूमिका पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और सक्रिय रही।
अमेरिकी अधिकारी के बयान का उल्लेख
केसीएनए ने अमेरिकी प्रशांत बेड़े के उप-कमांडर के उस कथित बयान का भी संदर्भ दिया, जिसमें कहा गया था कि रिमपैक में दक्षिण कोरिया और जापान की भागीदारी महज प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य अभियानों के लिए अनिवार्य है। उत्तर कोरिया ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि यह अभ्यास संभावित सैन्य कार्रवाई की व्यावहारिक तैयारी है।
द्विपक्षीय सैन्य कार्यक्रमों पर भी निशाना
उत्तर कोरिया ने केवल रिमपैक तक ही आपत्ति सीमित नहीं रखी। उसने हाल में आयोजित बडी स्क्वाड्रन हवाई अभ्यास और संयुक्त रसद प्रशिक्षण सहित दक्षिण कोरिया-अमेरिका के अन्य संयुक्त सैन्य कार्यक्रमों की भी तीखी आलोचना की। प्योंगयांग का कहना है कि ये सभी गतिविधियाँ कोरियाई प्रायद्वीप में संभावित सैन्य संघर्ष की तैयारी की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।
त्रिपक्षीय सहयोग को 'रेड लाइन' पार करने की संज्ञा
केसीएनए के लेख में कहा गया कि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया का त्रिपक्षीय सैन्य सहयोग अब 'रेड लाइन' पार कर चुका है और यह पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति व सुरक्षा के लिए एक नया संकट उत्पन्न कर रहा है। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया अमेरिकी नेतृत्व में होने वाले किसी भी सैन्य अभ्यास को अपने विरुद्ध षड्यंत्र के रूप में देखता रहा है।
उत्तर कोरिया की आगे की रणनीति
उत्तर कोरिया ने अपने रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि उसकी सुरक्षा नीति का मूल सिद्धांत यह है कि 'नए स्तर के खतरे का मुकाबला नए स्तर की प्रतिरोधक क्षमता से किया जाएगा।' विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की भाषा आमतौर पर प्योंगयांग द्वारा हथियार परीक्षण या सैन्य क्षमता प्रदर्शन से पहले इस्तेमाल की जाती है। आने वाले हफ्तों में कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव का स्तर क्या रुख लेता है, यह देखने वाली बात होगी।