नॉर्वे फ्रांस की परमाणु निवारण पहल में शामिल, पेरिस में नया रक्षा समझौता हस्ताक्षरित
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने 28 मई 2025 को घोषणा की कि उनका देश फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की परमाणु निवारण पहल का हिस्सा बनेगा। हालाँकि स्टोरे ने स्पष्ट किया कि इस निर्णय से नॉर्वे की परमाणु हथियारों संबंधी मूल नीति में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इसी दिन दोनों देशों ने पेरिस में एक नए द्विपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर भी किए।
स्टोरे का पेरिस दौरा और घोषणा
बुधवार को स्टोरे राष्ट्रपति मैक्रों के साथ वार्ता के लिए पेरिस पहुँचे। नॉर्वेजियन मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह निर्णय यूरोप की वर्तमान सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और अब यूरोप को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक स्वयं उठानी चाहिए।
स्टोरे ने यह भी दोहराया कि नॉर्वे की परमाणु नीति पूर्ववत रहेगी — शांतिकाल में नॉर्वे अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती की अनुमति नहीं देगा और फ्रांस के परमाणु हथियार कार्यक्रम को कोई वित्तीय सहायता नहीं प्रदान करेगा।
फ्रांस की यूरोपीय परमाणु रणनीति का विस्तार
मार्च 2025 में मैक्रों ने फ्रांस के परमाणु शस्त्रागार को सुदृढ़ करने और परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि फ्रांस अपनी परमाणु प्रतिरोधक रणनीति को यूरोपीय साझेदारी और सामूहिक सुरक्षा के दायरे में लाना चाहता है — अर्थात इसे केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित न रखकर समूचे यूरोप की सुरक्षा से जोड़ना।
अब तक स्वीडन, ब्रिटेन, जर्मनी, पोलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम, ग्रीस और डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देशों ने इस पहल में रुचि दिखाई है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में सुरक्षा को लेकर चिंताएँ गहरी हो रही हैं और अमेरिकी सुरक्षा गारंटियों की विश्वसनीयता पर बहस तेज़ है।
नॉर्वे-फ्रांस रक्षा समझौते का महत्त्व
28 मई को पेरिस में हस्ताक्षरित नए रक्षा समझौते के तहत नॉर्वे और फ्रांस आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे को सैन्य सहायता प्रदान करेंगे। यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को एक नई संस्थागत बुनियाद देता है।
गौरतलब है कि पिछले महीने फ्रांस और पोलैंड ने संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करने पर चर्चा की थी, क्योंकि पेरिस चाहता है कि यूरोपीय सहयोगी उसके परमाणु निवारण ढाँचे में सक्रिय रूप से भाग लें।
पोलैंड से भी जुड़ाव, मैक्रों का बयान
अप्रैल 2025 में उत्तरी पोलैंड के ग्दान्स्क में हुई बैठक के दौरान मैक्रों ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ परमाणु सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया।
परमाणु सहयोग के विकल्पों पर पूछे जाने पर मैक्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें सूचना साझा करना, संयुक्त सैन्य अभ्यास और बलों की संभावित तैनाती शामिल हैं।' टस्क ने कहा कि परमाणु सुरक्षा सहयोग पर बातचीत गोपनीय रूप से जारी है और पोलैंड उस विशेष समूह का हिस्सा बन गया है जो यूरोपीय एकजुटता और संप्रभुता की आवश्यकता को समझता है।
आगे क्या होगा
यूरोप में परमाणु निवारण के इस नए साझा ढाँचे की दिशा अब तेज़ी से स्पष्ट हो रही है। नॉर्वे का शामिल होना इस पहल को नाटो के उत्तरी आयाम में भी विस्तार देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में और यूरोपीय देश इस ढाँचे में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं, जो यूरोपीय रक्षा स्वायत्तता की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।