पाक-तुर्किए-सऊदी संयुक्त रक्षा समझौता: जेद्दा में MBS, एर्दोआन और शहबाज की बैठक, 8 अगस्त तक हस्ताक्षर संभव
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। यूरो न्यूज़ ने सऊदी सैन्य और सरकारी हलकों के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए जेद्दा में मिल रहे हैं। यह बैठक 6 से 8 अगस्त 2026 के बीच निर्धारित है।
मुख्य घटनाक्रम
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर गुरुवार को सऊदी अरब पहुँचे, जबकि तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोआन के शुक्रवार को जेद्दा पहुँचने की उम्मीद बताई गई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि यह 6 से 8 अगस्त तक चलेगा। सऊदी सरकार के एक अन्य करीबी सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर पुष्टि की कि समझौते पर शुक्रवार को दस्तखत किए जाएंगे।
समझौते की पृष्ठभूमि
यूरो न्यूज़ के सूत्रों ने कहा, 'इस पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी, लेकिन क्षेत्र में हुए नए घटनाक्रमों ने इसे और तेज़ कर दिया।' गौरतलब है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 2025 में ही एक द्विपक्षीय रक्षा समझौते की घोषणा कर दी थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान खींचा था — क्योंकि पाकिस्तान मुस्लिम जगत का एकमात्र परमाणु-सशस्त्र देश है। अब इस त्रिपक्षीय ढाँचे में तुर्किए का जुड़ना इस गठजोड़ को एक नई रणनीतिक गहराई देता है।
क्षेत्रीय तनाव की भूमिका
अमेरिका और ईरान के बीच सशस्त्र संघर्ष के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर में शिपिंग बाधित हुई है, जिसने खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने पर मजबूर किया है। इस पैक्ट का प्रमुख उद्देश्य इसी संदर्भ में क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधों को सुदृढ़ करना बताया जा रहा है।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जबकि तुर्किए ने गाजा संघर्ष में कूटनीतिक सक्रियता दिखाई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को कहा, 'हालांकि यह खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच हो रहा है, लेकिन यह दौरा अभी के संकट और कम समय के लिए बनी चिंताओं से कहीं ज़्यादा अहमियत रखता है।' यह बयान संकेत देता है कि तीनों देश इस साझेदारी को दीर्घकालिक रणनीतिक ढाँचे के रूप में देख रहे हैं।
आगे क्या
यह समझौता यदि तय कार्यक्रम के अनुसार 8 अगस्त 2026 तक संपन्न होता है, तो यह तीन मुस्लिम-बहुल देशों के बीच अब तक का सबसे औपचारिक त्रिपक्षीय रक्षा ढाँचा होगा। विश्लेषकों के अनुसार, इस गठजोड़ का असर न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा संरचना पर पड़ेगा, बल्कि भारत, इज़राइल और पश्चिमी देशों की क्षेत्रीय रणनीति पर भी इसके व्यापक निहितार्थ होंगे।