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बलूचिस्तान संकट: सुरक्षा-केंद्रित नीति विफल, 47% आबादी गरीबी में — रिपोर्ट

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बलूचिस्तान संकट: सुरक्षा-केंद्रित नीति विफल, 47% आबादी गरीबी में — रिपोर्ट

सारांश

संसाधन-संपन्न बलूचिस्तान में 47% जनता गरीबी रेखा से नीचे है — और पाकिस्तान की सरकार अब भी इसे केवल सुरक्षा समस्या मानती है। अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट बताती है कि ग्वादर जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स का मुनाफा स्थानीय लोगों तक नहीं पहुँचता, जबकि BRG ने नसीराबाद में बिजली टावर उड़ाकर तनाव और बढ़ा दिया है।

मुख्य बातें

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में अस्थिरता का मुख्य कारण खराब प्रशासन है, न कि केवल सुरक्षा चुनौतियाँ।
बलूचिस्तान में 47 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है — यह पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है।
ग्वादर पोर्ट और सैंदक माइन जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स का लाभ मुख्यतः चीनी कंपनियों और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों को मिलता है।
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने शनिवार को नसीराबाद में 220 केवी के दो बिजली टावर विस्फोट से ध्वस्त किए।
विशेषज्ञों के अनुसार, 'ऑपरेशन शाबान' टिकाऊ शांति लाने में नाकाम रहा है; संघवाद और संसाधन-बंटवारे के मूल मुद्दे अनसुलझे हैं।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में व्याप्त अस्थिरता और अभाव की असली जड़ खराब प्रशासन है — यह निष्कर्ष अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की एक ताज़ा रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार बलूचिस्तान को विशुद्ध रूप से एक सुरक्षा समस्या मानती है और वहाँ के संकट के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक कारणों को नज़रअंदाज़ करती रही है।

संसाधन-संपन्न प्रांत, फिर भी वंचित जनता

रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन इन संसाधनों का लाभ स्थानीय जनता तक नहीं पहुँचता। प्रांत में अधिकांश बड़े विकास प्रोजेक्ट — जिनमें ग्वादर पोर्ट और सैंदक कॉपर एंड गोल्ड माइन प्रमुख हैं — चीनी निवेश के तहत संचालित हैं। इन परियोजनाओं से होने वाला मुनाफा मुख्य रूप से चीनी कंपनियों और पाकिस्तान के पंजाबसिंध प्रांतों के लोगों को मिलता है, न कि बलूचिस्तान के निवासियों को।

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रांत के वंचित लोग अपने हक के लिए लड़ने और बाहरी लोगों के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए कथित तौर पर हथियारबंद रास्ता अपनाने पर मजबूर होते हैं।

गरीबी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव

आँकड़ों के अनुसार, बलूचिस्तान इस समय पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है, जहाँ 47 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, खनन और मेगा प्रोजेक्ट्स का केंद्र होने के बावजूद प्रांत में बुनियादी ढाँचे, रोज़गार के अवसर, गैस कनेक्शन और पीने के स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है।

पाकिस्तानी पत्रकार कदीम बलूच ने रिपोर्ट में लिखा: 'विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गवर्नेंस अस्थिरता और कमी के पीछे की मुख्य वजह है। सरकार ने बलूचिस्तान को एक सुरक्षा के मुद्दे के तौर पर देखा और संकट के असली सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों को नज़रअंदाज़ किया है।'

ऑपरेशन शाबान और सैन्य रणनीति की सीमाएँ

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि चल रहा 'ऑपरेशन शाबान' आतंकवादियों को निशाना बनाने के मामले में सुर्खियाँ बटोर सकता है, लेकिन यह टिकाऊ शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में नाकाम रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, सेना संघवाद, सांस्कृतिक पहचान और संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे जैसे मूलभूत मुद्दों को सुलझाए बिना बलूचिस्तान में स्थायी अमन नहीं ला सकती।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि प्रांत के लोग केंद्र की नीतियों से संतुष्ट हैं — एक दावा जिसे आलोचक ज़मीनी हकीकत से परे बताते हैं।

नसीराबाद में बिजली टावर ध्वस्त, बीआरजी ने ली जिम्मेदारी

इस बीच, स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने प्रांत के नसीराबाद ज़िले में दो बिजली टावर नष्ट करने की जिम्मेदारी ली। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, BRG के प्रवक्ता दोस्तिन बलूच ने बयान में कहा कि संगठन के सदस्यों ने नसीराबाद के मीर हसन इलाके के पास पीरू पुल क्षेत्र में ओच पावर प्लांट से पंजाब को जोड़ने वाले दो 220 केवी बिजली टावर विस्फोट से उड़ा दिए।

धमाके में दो टावर पूरी तरह ढह गए और दो अन्य को भारी नुकसान पहुँचा। प्रवक्ता ने कहा कि BRG इस हमले की जिम्मेदारी लेता है और जब तक बलूचिस्तान पाकिस्तान से स्वतंत्र नहीं हो जाता, ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

गौरतलब है कि यह घटना बलूचिस्तान में बुनियादी ढाँचे पर हमलों की उस लंबी श्रृंखला की कड़ी है, जो सुरक्षा-केंद्रित नीति की सीमाओं को एक बार फिर उजागर करती है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया और 'ऑपरेशन शाबान' की दिशा पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संरचनात्मक बहिष्कार है। 'ऑपरेशन शाबान' जैसे सैन्य अभियान लक्षणों पर मरहम लगाते हैं, बीमारी की जड़ नहीं काटते। जब तक संसाधनों का न्यायसंगत बंटवारा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक पहचान के सवालों का जवाब नहीं दिया जाता, BRG जैसे समूहों की सक्रियता और बुनियादी ढाँचे पर हमले थमने वाले नहीं हैं।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में अस्थिरता का असली कारण क्या है?
अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में अस्थिरता का मुख्य कारण खराब प्रशासन है। पाकिस्तान सरकार ने प्रांत को हमेशा सुरक्षा समस्या के रूप में देखा और सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक कारणों को नज़रअंदाज़ किया।
बलूचिस्तान में गरीबी की स्थिति कितनी गंभीर है?
रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत है जहाँ 47 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर कर रही है। संसाधन-संपन्न होने के बावजूद प्रांत में बुनियादी ढाँचे, रोज़गार, गैस और स्वच्छ पेयजल का गंभीर अभाव है।
ग्वादर पोर्ट और सैंदक माइन से बलूचिस्तान के लोगों को फायदा क्यों नहीं मिलता?
रिपोर्ट के अनुसार, ग्वादर पोर्ट और सैंदक कॉपर एंड गोल्ड माइन जैसी परियोजनाएँ मुख्यतः चीनी कंपनियों द्वारा संचालित हैं। इनसे होने वाला मुनाफा चीनी निवेशकों और पाकिस्तान के पंजाब व सिंध प्रांतों को मिलता है, न कि स्थानीय बलूच जनता को।
नसीराबाद में बिजली टावर हमले की जिम्मेदारी किसने ली?
बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने शनिवार को नसीराबाद के मीर हसन इलाके में ओच पावर प्लांट से पंजाब जाने वाले दो 220 केवी बिजली टावर विस्फोट से ध्वस्त करने की जिम्मेदारी ली। BRG प्रवक्ता दोस्तिन बलूच ने कहा कि जब तक बलूचिस्तान स्वतंत्र नहीं होता, ऐसे अभियान जारी रहेंगे।
'ऑपरेशन शाबान' बलूचिस्तान में शांति लाने में क्यों नाकाम रहा?
विशेषज्ञों के अनुसार, 'ऑपरेशन शाबान' आतंकवादियों को निशाना बनाने तक सीमित है और संघवाद, पहचान तथा संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे जैसे मूल कारणों को नहीं सुलझाता। बिना इन मुद्दों के समाधान के टिकाऊ शांति संभव नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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