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बलूचिस्तान के मूसाखेल में पत्रकार लाला इसराफील की गोली मारकर हत्या, हमलावर फरार

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बलूचिस्तान के मूसाखेल में पत्रकार लाला इसराफील की गोली मारकर हत्या, हमलावर फरार

सारांश

बलूचिस्तान के मूसाखेल में पत्रकार लाला इसराफील की मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने दुकान के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावर फरार हैं, कोई जिम्मेदारी नहीं ली गई। यह घटना ऐसे वक्त हुई जब PICSS रिपोर्ट के अनुसार मई में बलूचिस्तान में आतंकी हमलों में 109% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

मुख्य बातें

पत्रकार लाला इसराफील की 9 जून को बलूचिस्तान के मूसाखेल में मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस के अनुसार, इसराफील ने हाल ही में किसी धमकी की जानकारी नहीं दी थी; अब तक किसी संगठन ने जिम्मेदारी नहीं ली।
बलूचिस्तान यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (BUJ) ने मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती और गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लैंगोव से तत्काल कार्रवाई की माँग की।
PICSS की रिपोर्ट के अनुसार, मई में बलूचिस्तान में आतंकवादी हमले 34 से बढ़कर 71 हो गए — लगभग 109% की वृद्धि।
मई में पूरे पाकिस्तान में 54 अपहरण में से 52 मामले अकेले बलूचिस्तान में दर्ज हुए।
मई में पाकिस्तान में 128 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 71 नागरिक और 68 सुरक्षा कर्मी मारे गए।

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मूसाखेल इलाके में 9 जून को अज्ञात हमलावरों ने एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी। मारे गए पत्रकार की पहचान लाला इसराफील के रूप में हुई है, जो एक निजी टीवी चैनल के रिपोर्टर थे। पुलिस के अनुसार, हमलावर मोटरसाइकिल पर आए और वारदात के बाद फरार हो गए।

घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या

लाला इसराफील उस वक्त मूसाखेल में अपनी दुकान के बाहर खड़े थे, जब मोटरसाइकिल सवार अज्ञात हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी की। पुलिस के अनुसार, उनकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल इस हमले के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। पुलिस का कहना है कि इसराफील ने हाल के दिनों में किसी प्रकार की धमकी मिलने की जानकारी नहीं दी थी। अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

पत्रकार संगठन की प्रतिक्रिया और मांग

इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए बलूचिस्तान यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (BUJ) ने कहा कि इस हत्या से पत्रकार समुदाय में गहरी चिंता और दुख का माहौल है। BUJ के अध्यक्ष मंजूर अहमद रिंद और महासचिव शाह हुसैन तारीन ने एक संयुक्त बयान में बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती और प्रांतीय गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लैंगोव से तत्काल कार्रवाई की मांग की।

संगठन ने माँग की कि मामले की सभी पहलुओं से जाँच की जाए, हमले के पीछे की वजह का पता लगाया जाए और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाया जाए। यह घटना पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

बलूचिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति

यह हत्या ऐसे समय में हुई है जब बलूचिस्तान में हिंसा और आतंकवादी गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (PICSS) की ताजा मासिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, मई में पाकिस्तान में कुल 128 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए, जबकि अप्रैल में यह संख्या 101 थी — यानी लगभग 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

रिपोर्ट के अनुसार, मई में बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे अधिक प्रभावित प्रांत रहा। यहाँ 71 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए, जबकि अप्रैल में यह संख्या 34 थी — यानी हमलों में लगभग 109 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इसके अलावा, मई में पूरे पाकिस्तान में 54 अपहरण की घटनाएँ सामने आईं, जिनमें से 52 मामले अकेले बलूचिस्तान में दर्ज किए गए।

हताहतों के आँकड़े

PICSS की रिपोर्ट के अनुसार, मई में आतंकवादी हिंसा में 71 आम नागरिक, 68 सुरक्षा कर्मी और शांति समितियों के 6 सदस्य मारे गए। वहीं 147 आम नागरिक, 35 सुरक्षा कर्मी और शांति समितियों के 3 सदस्य घायल हुए। अप्रैल की तुलना में नागरिकों की मौतों की संख्या 37 से बढ़कर 71 हो गई — करीब 92 प्रतिशत की वृद्धि। सुरक्षा कर्मियों की मौतें 28 से बढ़कर 68 हो गईं, जो लगभग 143 प्रतिशत अधिक हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, मई में पाकिस्तान में 6 आत्मघाती हमले भी हुए, जिनमें 34 सुरक्षा कर्मियों और 9 नागरिकों की मौत हुई। गौरतलब है कि कुछ समय की अपेक्षाकृत शांति के बाद मई में हिंसा में यह उछाल विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में देखी गई।

आगे क्या होगा

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। BUJ ने प्रांतीय सरकार पर दबाव बनाए रखा है कि दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। बलूचिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है, और पत्रकार संगठन ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी प्रांतीय प्रशासन की प्रतिक्रिया अब तक बयानों तक सीमित रही है। BUJ की माँगें वाजिब हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य पत्रकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए तैयार है — या यह भी उन अनगिनत मामलों में शामिल हो जाएगा जो जाँच के नाम पर ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बलूचिस्तान में मारे गए पत्रकार लाला इसराफील कौन थे?
लाला इसराफील एक निजी टीवी चैनल के रिपोर्टर थे, जो बलूचिस्तान के मूसाखेल इलाके में कार्यरत थे। 9 जून को अपनी दुकान के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर गोलीबारी की, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
लाला इसराफील की हत्या की जिम्मेदारी किसने ली?
अब तक किसी भी संगठन ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस के अनुसार, इसराफील ने हाल के दिनों में किसी धमकी मिलने की जानकारी नहीं दी थी और हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
बलूचिस्तान यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने क्या माँग की है?
BUJ के अध्यक्ष मंजूर अहमद रिंद और महासचिव शाह हुसैन तारीन ने मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती और गृह मंत्री मीर जियाउल्लाह लैंगोव से तत्काल जाँच की माँग की है। संगठन ने कहा कि हमले की वजह का पता लगाया जाए और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में लाया जाए।
मई 2026 में बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति कैसी रही?
PICSS की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, मई में बलूचिस्तान में आतंकवादी हमले 34 से बढ़कर 71 हो गए — लगभग 109% की बढ़ोतरी। प्रांत में 54 में से 52 अपहरण की घटनाएँ भी बलूचिस्तान में ही दर्ज हुईं, जो इसे पाकिस्तान का सबसे अधिक प्रभावित प्रांत बनाती हैं।
मई 2026 में पूरे पाकिस्तान में आतंकवादी हिंसा से कितने लोग प्रभावित हुए?
PICSS की रिपोर्ट के अनुसार, मई में पाकिस्तान में 128 आतंकवादी हमले हुए, जिनमें 71 नागरिक, 68 सुरक्षा कर्मी और शांति समितियों के 6 सदस्य मारे गए। इसके अलावा 6 आत्मघाती हमलों में 34 सुरक्षा कर्मी और 9 नागरिक भी मारे गए।
राष्ट्र प्रेस
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