पाकिस्तान की पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम, लैंगिक असमानता की गंभीरता बढ़ी: रिपोर्ट
सारांश
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लंदन, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान की पुलिस बल में महिलाओं का योगदान बेहद सीमित है, जो कुल कार्यबल का तीन प्रतिशत से भी कम है। इसका दुष्प्रभाव देश और समाज पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है।
एक नई रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर किया गया है कि महिलाओं की कमी के कारण कई अपराध दर्ज नहीं होते हैं। इसके परिणामस्वरूप कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जैसे कि "जेंडर क्राइम की जांच में गलत दिशा, कानूनी नियमों का अनुपालन नहीं होना, जिसके चलते न्याय का अभाव और पुलिस पर अविश्वास बढ़ता है।"
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2024 में, पाकिस्तान का स्थान 146 देशों में 145वां था, जो गहरी जड़ें जमा चुकी लैंगिक असमानता को दर्शाता है।
यूके के अखबार 'एशियन लाइट' की रिपोर्ट में कहा गया है कि, "पाकिस्तान, दक्षिण एशिया के अन्य देशों से काफी पीछे है। यहां पुलिस बल में केवल 3 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं। यह स्थिति अफगानिस्तान के समान है। नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, नेपाल में महिला पुलिस कर्मचारियों की संख्या 11.73 प्रतिशत, श्रीलंका में 11.5 प्रतिशत, बांग्लादेश में 8.63 प्रतिशत, और भारत में कुल पुलिस कार्यबल में महिलाओं की संख्या 12.60 प्रतिशत है।
इस्लामाबाद स्थित एक समाजसेवी संगठन ‘अकाउंटेबिलिटी लैब पाकिस्तान’ के प्रकाशित 'पॉलिसी ब्रीफ डॉक्यूमेंट' का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कम प्रतिनिधित्व ने घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और अन्य लैंगिक अपराधों से निपटने की कोशिशों में बाधा उत्पन्न की है।
इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि "पाकिस्तान पुलिस में 3 प्रतिशत महिलाओं के साथ न केवल इस क्षेत्र में बल्कि पूरी दुनिया में अपमान का पात्र बनता है। पुलिस में महिलाओं का प्रतिनिधित्व न होने से, पाकिस्तान में महिलाओं के लिए न्याय की आशा बेमानी साबित होती है।"
पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में लैंगिक असमानता के संदर्भ में रिपोर्ट में बताया गया है कि सिंध में पुलिस बल में महिलाओं की संख्या मात्र 2.62 प्रतिशत, खैबर पख्तूनख्वा में 1.46 प्रतिशत और बलूचिस्तान में 1.74 प्रतिशत है।
रिपोर्ट में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) की स्थिति भी चिंताजनक बताई गई है, जहां महिलाओं की उपस्थिति मात्र 2.48 प्रतिशत और 3.36 प्रतिशत है।
हालांकि, पंजाब प्रांत में, जहाँ राजनीतिक प्रभाव अधिक है, वहाँ भी 4.4 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी है, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
रिपोर्ट में पंजाब के कसूर क्षेत्र की एक 13 वर्षीय बलात्कार पीड़िता का उल्लेख किया गया है, जिसने पाकिस्तानी अदालत से आरोपी के बरी होने के बाद आत्मदाह कर लिया।
पुलिस बल में महिलाओं की घटती संख्या और न्यायिक व्यवस्था में कानूनी जिम्मेदारी की कमी पर चिंता जताते हुए, पेशावर के शोधार्थी फुरकान अली ने एशियन लाइट के हवाले से कहा: "पाकिस्तान में जेंडर-आधारित अपराधों के लिए सजा की दर बहुत कम है। बलात्कार और ऑनर किलिंग के लिए 0.5 प्रतिशत, अपहरण के लिए 0.1 प्रतिशत और घरेलू हिंसा के लिए मात्र 1.3 प्रतिशत है।"
पुलिस बल में महिलाओं की संख्या केवल 1-1.5 प्रतिशत होने के कारण, जांच हर स्तर पर प्रभावित होती है।