26 जुलाई 2026
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सिंध में नए प्रांत की मांग: एमक्यूएम-पी की हैदराबाद रैली में हजारों लोग, कराची पर भेदभाव का आरोप

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सिंध में नए प्रांत की मांग: एमक्यूएम-पी की हैदराबाद रैली में हजारों लोग, कराची पर भेदभाव का आरोप

सारांश

एमक्यूएम-पी ने सिंध में नए प्रांत की मांग को लेकर हैदराबाद और कराची में एक साथ मोर्चा खोला। पार्टी का आरोप है कि कराची 90% से अधिक राजस्व देता है, पर 18 साल में उसे मिले सिर्फ 680 अरब रुपये — यह वित्तीय अन्याय अब सड़क आंदोलन की वजह बन चुका है।

मुख्य बातें

एमक्यूएम-पी ने 26 जुलाई को हैदराबाद और कराची में एक साथ नए प्रांत की मांग को लेकर रैली और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।
पार्टी अध्यक्ष खालिद मकबूल सिद्दीकी ने कहा कि सिंध के बजट का 97% हिस्सा कराची से आता है।
संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने आरोप लगाया कि 18 वर्षों में सिंध सरकार को 22 ट्रिलियन रुपये मिले, पर कराची को केवल 680 अरब रुपये आवंटित हुए।
पार्टी का कहना है कि नई प्रांत की मांग जातीय नहीं, बल्कि प्रशासनिक आवश्यकता पर आधारित है।
पीपीपी पर आरोप कि उसने संसद में एमक्यूएम-पी के संवैधानिक संशोधन प्रस्तावों को बहुमत से रोका।
पार्टी ने शाह फैसल टाउन में रविवार को विरोध रैली की घोषणा की।

पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) ने 26 जुलाई को सिंध सहित देश भर में नए प्रशासनिक प्रांतों के गठन की मांग को लेकर एक साथ दो बड़े कार्यक्रम आयोजित किए। हैदराबाद में पार्टी अध्यक्ष खालिद मकबूल सिद्दीकी ने हजारों समर्थकों के बीच रैली का नेतृत्व किया, जबकि कराची में संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वित्तीय भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए।

मुख्य घटनाक्रम

हैदराबाद रैली में खालिद मकबूल सिद्दीकी ने स्पष्ट किया कि एमक्यूएम-पी ने सिंध से अलग नया प्रांत बनाने की अपनी मांग कभी वापस नहीं ली है। उनके अनुसार, यह नया प्रांत 'मातृभाषा' और 'भूमि के आदान-प्रदान' के आधार पर गठित किया जाएगा। पार्टी के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा वीडियो और तस्वीरों में रैली में भारी भीड़ देखी जा सकती है।

सिद्दीकी ने पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के दौर का हवाला देते हुए कहा कि उस समय शहरी और ग्रामीण सिंध के बीच एक व्यवस्था तय की गई थी — जिसमें यह प्रावधान था कि यदि मुख्यमंत्री सिंधी भाषी होगा, तो राज्यपाल उर्दू भाषी होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत से आए मुहाजिर अपनी इच्छा से पाकिस्तान आए थे और यह पलायन लियाकत-नेहरू समझौते के तहत हुआ था।

वित्तीय भेदभाव के आरोप

सिद्दीकी ने दावा किया कि सिंध के कुल बजट का 97 प्रतिशत हिस्सा कराची से आता है, जबकि शेष योगदान हैदराबाद और मीरपुरखास जैसे शहरों से मिलता है। उनका आरोप था कि सिंध में दो वर्ग हैं — एक जो शत-प्रतिशत कर देकर पूरे प्रांत का बोझ उठा रहा है, और दूसरा जो बिना योगदान दिए उसका लाभ उठा रहा है।

कराची में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुस्तफा कमाल ने आरोप लगाया कि पिछले 18 वर्षों में सिंध सरकार को 22 ट्रिलियन रुपये मिले, लेकिन कराची को केवल 680 अरब रुपये आवंटित किए गए — जबकि प्रांत के 90 प्रतिशत से अधिक राजस्व का स्रोत अकेला कराची है। उन्होंने कहा कि यदि 2010 से पहले वाला जीएसटी बंटवारा फॉर्मूला लागू रहता, तो कराची को लगभग 2 ट्रिलियन रुपये मिलते, जिससे सड़कें, पेयजल, परिवहन, स्कूल और अस्पताल बेहतर होते।

18वें संशोधन पर निशाना

कमाल ने आरोप लगाया कि 18वें संवैधानिक संशोधन के बाद सिंध सरकार ने अधिकांश अधिकार अपने पास केंद्रित कर लिए, लेकिन कराची और अन्य क्षेत्रों में साफ पानी, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं करा सकी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों को न तो पर्याप्त वित्तीय अधिकार मिले और न ही प्रशासनिक शक्तियाँ।

कमाल के अनुसार, एमक्यूएम-पी ने संसद में बेहतर प्रशासन और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने के लिए संवैधानिक संशोधन प्रस्तावित किए थे, लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने अपने संसदीय बहुमत के बल पर उन्हें पारित नहीं होने दिया।

पार्टी का रुख और आगे की राह

एमक्यूएम-पी का कहना है कि नए प्रांतों की मांग किसी जातीय या भाषाई आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता के तहत की जा रही है। पार्टी का तर्क है कि तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण मौजूदा प्रशासनिक ढाँचा प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहा। मुस्तफा कमाल ने घोषणा की कि पार्टी अब जनता के अधिकारों के लिए सड़क पर आंदोलन करेगी और रविवार को शाह फैसल टाउन में होने वाली विरोध रैली में शामिल होने की अपील की। यह आंदोलन पाकिस्तान में प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार उसका आर्थिक तर्क — कराची 90% से अधिक राजस्व देता है फिर भी उपेक्षित है — अधिक ठोस और सत्यापन-योग्य है। असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान का मौजूदा राजनीतिक ढाँचा, जहाँ पीपीपी का सिंध पर दशकों से वर्चस्व है, इस मांग को कभी संसदीय रास्ते से आगे बढ़ने देगा। 18वें संशोधन के बाद विकेंद्रीकरण का जो वादा था, वह व्यवहार में केंद्रीकरण में बदल गया — यह विरोधाभास एमक्यूएम-पी के आंदोलन को नैतिक बल देता है, भले ही उसकी राजनीतिक सफलता अनिश्चित हो।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमक्यूएम-पी सिंध में नया प्रांत क्यों चाहती है?
एमक्यूएम-पी का तर्क है कि मौजूदा प्रशासनिक ढाँचा बढ़ती आबादी और शहरीकरण की जरूरतें पूरी करने में नाकाम है। पार्टी का कहना है कि कराची सिंध के 90% से अधिक राजस्व का स्रोत है, फिर भी उसे बुनियादी सुविधाओं के लिए पर्याप्त धन नहीं मिलता।
हैदराबाद रैली में क्या हुआ?
26 जुलाई को हैदराबाद में पार्टी अध्यक्ष खालिद मकबूल सिद्दीकी के नेतृत्व में हजारों समर्थक जुटे। सिद्दीकी ने घोषणा की कि नया प्रांत 'मातृभाषा' और 'भूमि के आदान-प्रदान' के आधार पर बनाया जाएगा और पार्टी यह मांग कभी वापस नहीं लेगी।
कराची के साथ वित्तीय भेदभाव का क्या आरोप है?
संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के अनुसार, पिछले 18 वर्षों में सिंध सरकार को 22 ट्रिलियन रुपये मिले, लेकिन कराची को केवल 680 अरब रुपये आवंटित हुए — जबकि प्रांत के 90% से अधिक राजस्व का योगदान कराची देता है।
पीपीपी पर एमक्यूएम-पी ने क्या आरोप लगाए?
एमक्यूएम-पी का आरोप है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने अपने संसदीय बहुमत का उपयोग कर स्थानीय निकायों को मजबूत बनाने और बेहतर प्रशासन के लिए एमक्यूएम-पी के संवैधानिक संशोधन प्रस्तावों को पारित नहीं होने दिया।
एमक्यूएम-पी आगे क्या करेगी?
पार्टी ने घोषणा की है कि वह जनता के अधिकारों के लिए सड़क पर आंदोलन जारी रखेगी। रविवार को कराची के शाह फैसल टाउन में विरोध रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें समर्थकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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