क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में तोरखम बॉर्डर को फिर से खोलने की मांग हो रही है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में तोरखम बॉर्डर को फिर से खोलने की मांग हो रही है?

सारांश

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लोग सड़कों पर उतरे हैं, तोरखम बॉर्डर को फिर से खोलने की मांग के साथ। यह प्रदर्शन स्थानीय व्यापारियों और मजदूरों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जानिए इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव।

मुख्य बातें

तोरखम बॉर्डर का बंद होना हजारों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने बॉर्डर को फिर से खोलने की मांग की है।
स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक स्थिति गंभीर है।
राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को व्यापार से अलग किया जाना चाहिए।
आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार को कदम उठाने की आवश्यकता है।

इस्लामाबाद, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के लांडी कोटल क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने अपनी मांग के समर्थन में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। उनका मुख्य आह्वान है कि तोरखम बॉर्डर को तुरंत फिर से खोला जाए।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, रविवार को ऑल बॉर्डर्स कोऑर्डिनेटर्स काउंसिल के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया, जिसमें व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, कबीलाई बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और सिविल सोसायटी के सदस्यों ने भाग लिया।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 12 अक्टूबर से अफगानिस्तान के साथ बॉर्डर बंद होने के चलते कई संगठनों और समूहों के प्रतिनिधियों ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि तोरखम बॉर्डर के बंद होने से हजारों लोगों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है, खासकर उन लोगों पर जो पूरी तरह से बॉर्डर पार व्यापार पर निर्भर थे।

उन्होंने तोरखम बॉर्डर को मध्य एशिया का एक आवश्यक व्यापारिक गेटवे बताया और कहा कि यह बॉर्डर क्रॉसिंग हजारों परिवारों के लिए एक आर्थिक केंद्र का काम करती थी।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बॉर्डर बंद होने के कारण शहर की सभी कमर्शियल गतिविधियाँ ठप हो गई हैं। उन्होंने बताया कि इसके कारण कई परिवारों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ा है।

स्थानीय लोगों ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान से अपील की है कि वे आपसी व्यापार को राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से न जोड़े और लोगों को बार-बार बॉर्डर पर आने-जाने की अनुमति दें।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पिछले साल दिसंबर में यह जानकारी मिली थी कि दिहाड़ी मजदूर और कुली लगातार बॉर्डर बंद होने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

कई मजदूर पंजाब और सिंध में नौकरियों की तलाश कर रहे हैं, जबकि कुछ ने अपने दैनिक खर्चों के लिए दोस्तों और रिश्तेदारों से पैसे उधार लिए हैं।

हालात ऐसे हैं कि कुछ लोग मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और कुछ ने दवाओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

तोरखम लेबरर्स एंड पोर्टर्स एसोसिएशन के नेता अली शिनवारी को चिंता है कि युवा बेरोजगार मजदूर आतंकवादी समूहों में शामिल हो सकते हैं।

पिछले साल अक्टूबर में, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ सभी व्यापार रूट बंद कर दिए थे।

अफगानिस्तान के उपप्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अखुंद ने उद्योगपतियों को दूसरे व्यापारिक मार्ग का उपयोग करने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह समझने की आवश्यकता है कि यह प्रदर्शन केवल एक सीमा पार व्यापार समस्या नहीं है, बल्कि यह उन हजारों परिवारों का मुद्दा है जो इस पर निर्भर हैं। हमें इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसे राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों से अलग रखना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तोरखम बॉर्डर कब बंद हुआ?
तोरखम बॉर्डर 12 अक्टूबर से बंद है।
प्रदर्शन में कौन-कौन शामिल हुए?
प्रदर्शन में व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, कबीलाई बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता शामिल हुए।
तोरखम बॉर्डर का महत्व क्या है?
तोरखम बॉर्डर मध्य एशिया का एक आवश्यक व्यापारिक गेटवे है जो हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग तोरखम बॉर्डर को तुरंत खोलना है।
आर्थिक समस्याओं का सामना कौन कर रहा है?
बॉर्डर बंद होने के कारण दिहाड़ी मजदूर और उनके परिवार गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले