12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पेनपा त्सेरिंग ने सिक्योंग के रूप में दूसरे कार्यकाल की शपथ ली, मध्यमार्ग नीति पर अडिग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पेनपा त्सेरिंग ने सिक्योंग के रूप में दूसरे कार्यकाल की शपथ ली, मध्यमार्ग नीति पर अडिग

सारांश

पेनपा त्सेरिंग ने धर्मशाला में दूसरी बार सिक्योंग की शपथ ली — दलाई लामा की उपस्थिति में। चीन से बातचीत की उम्मीद कम बताते हुए भी उन्होंने मध्यमार्ग नीति और गुप्त संचार जारी रखने का संकल्प दोहराया।

मुख्य बातें

पेनपा त्सेरिंग ने 27 मई 2026 को धर्मशाला में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग के रूप में दूसरे पाँच वर्षीय कार्यकाल की शपथ ली।
शपथ ग्रहण समारोह 90 वर्षीय दलाई लामा की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
17वीं काशाग 'मध्यमार्ग नीति' के प्रति दृढ़संकल्पित; अहिंसा और संवाद के ज़रिए तिब्बत-चीन संघर्ष के समाधान का लक्ष्य।
सिक्योंग ने माना कि चीनी सरकार की मौजूदा नीति को देखते हुए बातचीत की गुंजाइश बहुत कम है, फिर भी गुप्त संचार जारी रहेगा।
तिब्बत का भविष्य तिब्बती जनता का है, बीजिंग के सत्तावादी नियंत्रण का नहीं — सिक्योंग का स्पष्ट संदेश।

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने 27 मई 2026 को धर्मशाला में अपने दूसरे लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पाँच वर्षीय कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण की। यह ऐतिहासिक समारोह 90 वर्षीय तिब्बती आध्यात्मिक नेता परम पावन दलाई लामा की उपस्थिति में हिमाचल प्रदेश के इस पहाड़ी शहर में संपन्न हुआ।

शपथ ग्रहण समारोह का घटनाक्रम

उद्घाटन भाषण में सिक्योंग त्सेरिंग ने सीटीए की प्रतिबद्धता दोहराई कि परम पावन दलाई लामा के विचार और मार्गदर्शन प्रशासन के केंद्र में बने रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि काशाग (कैबिनेट) राजनीतिक और सामाजिक कल्याणकारी पहलों को उस समय तक आगे बढ़ाता रहेगा, जब तक तिब्बत-चीन संघर्ष का न्यायसंगत समाधान नहीं निकल आता।

गौरतलब है कि यह दूसरा कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब तिब्बत-चीन वार्ता की संभावनाएँ अत्यंत सीमित बताई जा रही हैं।

चीन के साथ बातचीत पर सिक्योंग का रुख

सिक्योंग त्सेरिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीनी सरकार की राष्ट्रीयताओं के प्रति वर्तमान नीति को देखते हुए बातचीत की गुंजाइश बहुत कम दिखती है। फिर भी, 17वीं काशाग परम पावन दलाई लामा द्वारा परिकल्पित 'मध्यमार्ग नीति' के प्रति दृढ़संकल्पित है, जिसका उद्देश्य अहिंसा, संवाद और पारस्परिक लाभ के माध्यम से चीन-तिब्बत संघर्ष का स्थायी समाधान खोजना है।

उन्होंने कहा कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, 'मध्यमार्ग नीति' के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता और समर्थन को मज़बूत करने की रणनीतियों पर काम करते हुए चीनी सरकार के साथ सावधानीपूर्वक और स्थिर रूप से गुप्त संचार जारी रखा जाएगा।

तिब्बती जनता के भविष्य पर संकल्प

पुनः निर्वाचित सिक्योंग ने दृढ़ता से कहा कि तिब्बत का भविष्य तिब्बती जनता का है, न कि बीजिंग द्वारा थोपे गए सत्तावादी नियंत्रण का। उन्होंने 16वें काशाग की उपलब्धियों का श्रेय परम पावन दलाई लामा के आशीर्वाद और तिब्बत में रह रही तिब्बती जनता की अटूट प्रतिबद्धता को दिया।

त्सेरिंग के अनुसार, तिब्बती जनता की दलाई लामा के प्रति श्रद्धा और अपनी राष्ट्रीय पहचान को संरक्षित करने का दृढ़ संकल्प ही उनके कार्य को आगे बढ़ाने वाली प्रेरणा का मुख्य स्रोत है।

आगे की राह

विश्लेषकों के अनुसार, दूसरे कार्यकाल में सिक्योंग त्सेरिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मध्यमार्ग नीति के लिए ठोस समर्थन जुटाना और निर्वासित तिब्बती समुदाय की एकजुटता बनाए रखना होगी। यह कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब 90 वर्षीय दलाई लामा के उत्तराधिकार का प्रश्न भी वैश्विक चर्चा में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाती है कि मध्यमार्ग नीति के लिए 'अंतरराष्ट्रीय समर्थन' की रणनीति दशकों की कोशिशों के बाद ठोस नतीजे कब देगी। गुप्त संचार जारी रखने की बात कूटनीतिक लचीलेपन का संकेत है, पर इसकी सफलता का कोई सत्यापन-योग्य पैमाना सार्वजनिक नहीं है। सबसे बड़ा अनुत्तरित प्रश्न दलाई लामा के उत्तराधिकार का है — जिस पर सीटीए और बीजिंग के बीच गहरा टकराव है और जो इस कार्यकाल की सबसे निर्णायक परीक्षा बन सकता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेनपा त्सेरिंग कौन हैं और सिक्योंग का पद क्या होता है?
पेनपा त्सेरिंग केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के निर्वाचित प्रमुख हैं, जिन्हें 'सिक्योंग' (अध्यक्ष) कहा जाता है। सीटीए धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश से संचालित निर्वासित तिब्बती सरकार है, जो तिब्बती जनता के राजनीतिक और सामाजिक हितों का प्रतिनिधित्व करती है।
पेनपा त्सेरिंग का दूसरा कार्यकाल कब शुरू हुआ?
पेनपा त्सेरिंग ने 27 मई 2026 को धर्मशाला में शपथ ग्रहण की और उनका दूसरा पाँच वर्षीय कार्यकाल शुरू हुआ। यह समारोह परम पावन दलाई लामा की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
मध्यमार्ग नीति क्या है?
मध्यमार्ग नीति दलाई लामा द्वारा परिकल्पित वह दृष्टिकोण है जो तिब्बत की पूर्ण स्वतंत्रता की माँग के बजाय अहिंसा, संवाद और पारस्परिक लाभ के आधार पर चीन के भीतर तिब्बत के लिए वास्तविक स्वायत्तता की माँग करता है। 17वीं काशाग इसी नीति पर कायम है।
क्या चीन के साथ तिब्बत की बातचीत फिर शुरू होगी?
सिक्योंग त्सेरिंग ने स्वयं माना है कि चीनी सरकार की मौजूदा नीति को देखते हुए बातचीत की गुंजाइश बहुत कम दिखती है। फिर भी सीटीए ने कहा है कि वह चीनी सरकार के साथ गुप्त संचार सावधानीपूर्वक जारी रखेगा और मध्यमार्ग नीति के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ाने पर काम करेगा।
दलाई लामा की शपथ ग्रहण में उपस्थिति का क्या महत्व है?
90 वर्षीय दलाई लामा की उपस्थिति सीटीए के लिए आध्यात्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिक्योंग त्सेरिंग ने स्वयं कहा कि काशाग की हर उपलब्धि दलाई लामा के आशीर्वाद और मार्गदर्शन के कारण संभव हुई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 8 घंटे पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले