पेनपा त्सेरिंग ने सिक्योंग के रूप में दूसरे कार्यकाल की शपथ ली, मध्यमार्ग नीति पर अडिग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने 27 मई 2026 को धर्मशाला में अपने दूसरे लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पाँच वर्षीय कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण की। यह ऐतिहासिक समारोह 90 वर्षीय तिब्बती आध्यात्मिक नेता परम पावन दलाई लामा की उपस्थिति में हिमाचल प्रदेश के इस पहाड़ी शहर में संपन्न हुआ।
शपथ ग्रहण समारोह का घटनाक्रम
उद्घाटन भाषण में सिक्योंग त्सेरिंग ने सीटीए की प्रतिबद्धता दोहराई कि परम पावन दलाई लामा के विचार और मार्गदर्शन प्रशासन के केंद्र में बने रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि काशाग (कैबिनेट) राजनीतिक और सामाजिक कल्याणकारी पहलों को उस समय तक आगे बढ़ाता रहेगा, जब तक तिब्बत-चीन संघर्ष का न्यायसंगत समाधान नहीं निकल आता।
गौरतलब है कि यह दूसरा कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब तिब्बत-चीन वार्ता की संभावनाएँ अत्यंत सीमित बताई जा रही हैं।
चीन के साथ बातचीत पर सिक्योंग का रुख
सिक्योंग त्सेरिंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीनी सरकार की राष्ट्रीयताओं के प्रति वर्तमान नीति को देखते हुए बातचीत की गुंजाइश बहुत कम दिखती है। फिर भी, 17वीं काशाग परम पावन दलाई लामा द्वारा परिकल्पित 'मध्यमार्ग नीति' के प्रति दृढ़संकल्पित है, जिसका उद्देश्य अहिंसा, संवाद और पारस्परिक लाभ के माध्यम से चीन-तिब्बत संघर्ष का स्थायी समाधान खोजना है।
उन्होंने कहा कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, 'मध्यमार्ग नीति' के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता और समर्थन को मज़बूत करने की रणनीतियों पर काम करते हुए चीनी सरकार के साथ सावधानीपूर्वक और स्थिर रूप से गुप्त संचार जारी रखा जाएगा।
तिब्बती जनता के भविष्य पर संकल्प
पुनः निर्वाचित सिक्योंग ने दृढ़ता से कहा कि तिब्बत का भविष्य तिब्बती जनता का है, न कि बीजिंग द्वारा थोपे गए सत्तावादी नियंत्रण का। उन्होंने 16वें काशाग की उपलब्धियों का श्रेय परम पावन दलाई लामा के आशीर्वाद और तिब्बत में रह रही तिब्बती जनता की अटूट प्रतिबद्धता को दिया।
त्सेरिंग के अनुसार, तिब्बती जनता की दलाई लामा के प्रति श्रद्धा और अपनी राष्ट्रीय पहचान को संरक्षित करने का दृढ़ संकल्प ही उनके कार्य को आगे बढ़ाने वाली प्रेरणा का मुख्य स्रोत है।
आगे की राह
विश्लेषकों के अनुसार, दूसरे कार्यकाल में सिक्योंग त्सेरिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मध्यमार्ग नीति के लिए ठोस समर्थन जुटाना और निर्वासित तिब्बती समुदाय की एकजुटता बनाए रखना होगी। यह कार्यकाल ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब 90 वर्षीय दलाई लामा के उत्तराधिकार का प्रश्न भी वैश्विक चर्चा में है।