आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने जी20 बैठक में फेड चेयरमैन केविन वार्श और आईएमएफ के डैन कैट्ज से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 3 सितंबर 2026 को एशविले, उत्तरी कैरोलिना में आयोजित जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन केविन वार्श तथा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर डैन कैट्ज से द्विपक्षीय मुलाकात की। RBI ने इन बैठकों की पुष्टि की, हालाँकि चर्चा के विस्तृत विषयों का खुलासा नहीं किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
मल्होत्रा ने जी20 के आधिकारिक सत्रों में भाग लेने के साथ-साथ कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। फेडरल रिज़र्व प्रमुख केविन वार्श से उनकी मुलाकात उस समय हुई जब वैश्विक वित्तीय बाज़ार अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर सतर्क बने हुए हैं। इसी क्रम में उन्होंने IMF के वरिष्ठ अधिकारी डैन कैट्ज से भी मुलाकात की, जो वैश्विक वित्तीय स्थिरता और सदस्य देशों की आर्थिक निगरानी में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
RBI के अनुसार, इन बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। हालाँकि बातचीत के विशेष बिंदुओं का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जी20 बैठक का महत्त्व
जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक को जी20 ढाँचे की सबसे प्रभावशाली आर्थिक प्रक्रिया माना जाता है। एशविले में आयोजित इस सत्र में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नीति-निर्माताओं ने वैश्विक आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा की।
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर दबाव में है — अमेरिकी ब्याज दरों की अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और उभरते बाज़ारों में पूंजी प्रवाह की अस्थिरता इसके प्रमुख कारण हैं।
फेडरल रिज़र्व और आईएमएफ की वैश्विक भूमिका
फेडरल रिज़र्व के नीतिगत फैसले — विशेषकर ब्याज दरों पर — केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहते; इनका असर भारत सहित समस्त उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं, पूंजी प्रवाह और विदेशी निवेश पर पड़ता है। इसी कारण RBI गवर्नर और फेड चेयरमैन के बीच संवाद को नीतिगत दृष्टि से महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
वहीं, IMF वैश्विक अर्थव्यवस्था की निगरानी, आर्थिक संकट में सहायता और वित्तीय स्थिरता के मानक तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। डैन कैट्ज के साथ मल्होत्रा की बैठक भारत और IMF के बीच नीतिगत समन्वय के संदर्भ में देखी जा रही है।
भारत का प्रतिनिधित्व
मल्होत्रा ने इस बहुपक्षीय मंच पर भारतीय रिज़र्व बैंक का प्रतिनिधित्व करते हुए औपचारिक सत्रों के साथ-साथ कई द्विपक्षीय वार्ताएँ कीं। गौरतलब है कि जी20 की अध्यक्षता और वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका के मद्देनज़र इस तरह की द्विपक्षीय बैठकें कूटनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अहम मानी जाती हैं।
आगामी हफ्तों में इन चर्चाओं के नतीजे — यदि कोई संयुक्त वक्तव्य या नीतिगत सहमति बनती है — तो वे सार्वजनिक हो सकते हैं।