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मार्को रुबियो ने ICC के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान तेज किया, दर्जनों देश अमेरिका के साथ

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मार्को रुबियो ने ICC के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान तेज किया, दर्जनों देश अमेरिका के साथ

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने ICC को 'गैरकानूनी' घोषित करते हुए उसके खिलाफ वैश्विक गठबंधन खड़ा करने की मुहिम छेड़ दी है — दो हफ्तों में दर्जनों देश साथ आए, पाँच ICC छोड़ चुके। यह ट्रंप प्रशासन की बहुपक्षीय संस्थाओं से टकराव की नीति का सबसे तीखा प्रदर्शन है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC को 'गैरकानूनी संगठन' करार देते हुए उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान तेज किया।
रुबियो के अनुसार, अभियान शुरू होने के दो हफ्तों के भीतर दर्जनों देश अमेरिका के साथ जुड़ चुके हैं।
5 देश पहले ही ICC से बाहर निकल चुके हैं; रुबियो को और देशों के निकलने की उम्मीद है।
60 देशों के प्रतिनिधि वाशिंगटन में हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल हुए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह अभियान उन्हें व्यक्तिगत रूप से बचाने के लिए नहीं, बल्कि नेतन्याहू और अन्य नेताओं के लिए है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के खिलाफ वैश्विक अभियान को और तीव्र कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने ICC के प्रभाव को सीमित करने के लिए एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय मुहिम शुरू की है, जिसे मध्य-पूर्व और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिका समर्थक सरकारों का बढ़ता समर्थन मिल रहा है। 1 अगस्त को रुबियो के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं को लेकर वाशिंगटन की आक्रामक नीति को एक बार फिर उजागर किया।

ICC पर रुबियो के आरोप

रुबियो ने ICC को सीधे तौर पर 'गैरकानूनी संगठन' करार दिया। उनका तर्क है कि यह न्यायालय उन देशों के नागरिकों पर भी अधिकार क्षेत्र का दावा करता है जो इसके सदस्य नहीं हैं। उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय एक गैरकानूनी संगठन है।' रुबियो ने आगे कहा, 'ICC ने खुद को गैरकानूनी बना लिया है, क्योंकि उसका मानना है कि अगर आप उसके सदस्य नहीं हैं तब भी वह आपके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।'

रुबियो ने चेतावनी दी कि इस तरह के दावे विदेश में तैनात अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं पर मुकदमा चलाने का खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'भविष्य में इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिकी सर्विसमैन, पॉलिटिकल लीडर्स और दूसरे लोग ICC की ओर से आरोप तय होने के दायरे में आ सकते हैं।'

रणनीति में बदलाव

रुबियो ने स्वीकार किया कि वाशिंगटन ने पहले ICC के भीतर सुधार की माँग की थी, लेकिन वे प्रयास विफल रहे। इसके बाद अमेरिका ने अपनी रणनीति बदलते हुए न्यायालय को 'काबू में करने' का मार्ग अपनाया। उन्होंने कहा, 'हमने अब उस कोर्ट को काबू में करने की कोशिश शुरू कर दी है।' यह ऐसे समय में आया है जब ICC ने कई वैश्विक नेताओं के खिलाफ जाँच और वारंट जारी किए हैं, जिससे पश्चिमी देशों में भी असंतोष बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन का दावा

रुबियो के अनुसार, इस अभियान को तेज़ी से वैश्विक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया, 'दो हफ्ते पहले जब से हमने यह कोशिश शुरू की है, तब से दर्जनों देश हमारे साथ जुड़ चुके हैं। पाँच देश पहले ही ICC छोड़ चुके हैं और हमें लगता है कि और भी देश निकलेंगे।' गौरतलब है कि हाल ही में वाशिंगटन में हुई एक मंत्रिस्तरीय बैठक में 60 देशों के प्रतिनिधि राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा से निपटने पर चर्चा में शामिल हुए। रुबियो ने कहा कि प्रशासन 'एक मजबूत गठबंधन' बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ट्रंप का स्पष्टीकरण

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि रुबियो की ICC-विरोधी मुहिम उन्हें व्यक्तिगत रूप से बचाने के लिए नहीं है। ट्रंप ने कहा, 'वह मेरा बचाव करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। वह नेतन्याहू और कई दूसरे लोगों का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'इस समय ऐसा कोई संकेत नहीं है कि मैं उनमें से एक हूं।' ट्रंप का यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि ICC की आलोचना का केंद्र उनकी अपनी कानूनी स्थिति भी हो सकती है।

आगे क्या होगा

अमेरिका की इस आक्रामक नीति का असर ICC की वैश्विक साख और सदस्यता पर पड़ सकता है। यदि और देश इस गठबंधन में शामिल होते हैं या ICC से बाहर निकलते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय न्यायिक व्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें कुछ देश बहुपक्षीय संस्थाओं से दूरी बना रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वाशिंगटन के लिए असुविधाजनक हैं। '60 देशों का समर्थन' और 'दर्जनों देश जुड़े' जैसे दावे अभी सत्यापन योग्य नहीं हैं — मुख्यधारा की कवरेज इस पर पर्याप्त सवाल नहीं उठा रही। असली परीक्षा यह है कि क्या यह गठबंधन ICC की संरचनात्मक शक्ति को वास्तव में कम कर पाएगा, या यह घरेलू राजनीति के लिए एक भू-राजनीतिक प्रदर्शन मात्र है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ICC के खिलाफ क्यों अभियान चला रहे हैं?
रुबियो का कहना है कि ICC उन देशों के नागरिकों पर भी अधिकार क्षेत्र का दावा करता है जो उसके सदस्य नहीं हैं, जिससे अमेरिकी सैन्य अधिकारियों और राजनेताओं पर मुकदमे का खतरा पैदा होता है। उनके अनुसार ICC के भीतर सुधार की कोशिशें विफल हो चुकी हैं, इसलिए अब अमेरिका ने उसे 'काबू में करने' की रणनीति अपनाई है।
ICC से अब तक कितने देश बाहर निकले हैं?
रुबियो के दावे के अनुसार, अमेरिका का अभियान शुरू होने के दो हफ्तों के भीतर पाँच देश ICC से बाहर निकल चुके हैं। रुबियो को उम्मीद है कि आने वाले समय में और देश भी इस कदम को दोहराएंगे।
क्या ट्रंप भी ICC के निशाने पर हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद स्पष्ट किया है कि रुबियो का यह अभियान उन्हें व्यक्तिगत रूप से बचाने के लिए नहीं है। ट्रंप ने कहा कि यह प्रयास इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और अन्य नेताओं की सुरक्षा के लिए है, और उन्होंने यह भी कहा कि अभी कोई संकेत नहीं है कि वे स्वयं ICC के दायरे में हैं।
वाशिंगटन की मंत्रिस्तरीय बैठक में क्या हुआ?
हाल ही में वाशिंगटन में हुई एक मंत्रिस्तरीय बैठक में 60 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहाँ राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा और कट्टरपंथी आतंकवाद से निपटने पर चर्चा हुई। रुबियो ने इसे ICC-विरोधी गठबंधन बनाने की दिशा में एक अहम कदम बताया।
ICC क्या है और अमेरिका उसका सदस्य क्यों नहीं है?
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्था है जो युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई करती है। अमेरिका ने 2002 में रोम संविधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन कभी इसकी पुष्टि नहीं की; मुख्य आपत्ति यही रही है कि यह अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों पर अधिकार क्षेत्र का दावा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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