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क्या शादी की वर्षगांठ पर शेख हसीना को सजा-ए-मौत का फरमान मिला?

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क्या शादी की वर्षगांठ पर शेख हसीना को सजा-ए-मौत का फरमान मिला?

सारांश

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई गई। यह फैसला उनके विवाह की वर्षगांठ पर आया है, जब उन्हें एक बुरी खबर मिली। जानिए इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।

मुख्य बातें

शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराया गया है।
सजा-ए-मौत का ऐलान उनके विवाह की वर्षगांठ पर हुआ।
बांग्लादेश का राजनीतिक परिदृश्य इस फैसले से प्रभावित होगा।
छात्र आंदोलनों के दौरान हुई हिंसा पर भी ध्यान दिया गया।
पूर्व गृहमंत्री और पूर्व आईजीपी भी इस मामले में आरोपी हैं।

नई दिल्ली, 17 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए आईसीटी ने सजा-ए-मौत का ऐलान किया। 17 नवंबर को ही कई वर्ष पहले शेख हसीना का विवाह हुआ था। यह एक खास दिन था, जब उन्हें बहुत बुरी खबर मिली।

बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) की तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार दोपहर को यह निर्णय सुनाया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शेख हसीना ने 1967 में शेख मुजीब के जेल में रहने के दौरान अपनी माँ फजीलतुन नेसा की देखरेख में प्रसिद्ध परमाणु वैज्ञानिक एम.ए. वाजेद मिया से विवाह किया था। बांग्लादेश टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फजीलतुन नेसा ने इस जोड़े के निकाह की व्यवस्था में जल्दबाजी की थी।

शेख हसीना और एम.ए. वाजेद मिया के दो संतानें हैं, सजीब वाजेद जॉय और साइमा वाजेद पुतुल। सजीब वाजेद जॉय का जन्म 27 जुलाई, 1971 को और साइमा वाजेद पुतुल का जन्म 9 दिसंबर, 1972 को हुआ था।

शेख हसीना अब तक पांच बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं। उन्होंने पहली बार 1996 से 2001 तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2009 से 2014 तक दूसरी बार, 2014 से 2019 तक तीसरी बार, 2019 से 2024 तक चौथी बार और 2024 में पांचवीं बार प्रधानमंत्री के रूप में चुनी गईं। हालाँकि, छात्र विरोध प्रदर्शनों के कारण शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को सत्ता छोड़नी पड़ी।

2024 में छात्र आरक्षण सुधार आंदोलन एक जन विद्रोह में बदल गया। उसी वर्ष जुलाई-अगस्त में, छात्र आंदोलन पर पुलिस ने हमला किया और उन पर गोलियाँ चलाईं, साथ ही अवामी लीग के विभिन्न स्तरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं और पार्टी के सहयोगी संगठनों, छात्र लीग और जुबली लीग के कार्यकर्ताओं पर भी हमला किया। नतीजतन, आरक्षण सुधार आंदोलन सरकार के पतन का कारण बन गया।

हसीना के अलावा इस मामले में पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमां खान कमाल और पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) चौधरी अब्दुल्ला अल-ममून भी आरोपी थे। हसीना और खान देश में नहीं हैं, तो पूर्व आईजीपी पुलिस के गवाह बन गए। उन्होंने माफी मांगी, जिस पर विचार करते हुए कोर्ट ने उन्हें 5 साल की सजा सुनाई।

अपने बयान में ममून ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने छात्र आंदोलन को दबाने के लिए सीधे तौर पर घातक हथियारों के इस्तेमाल का आदेश दिया था। उन्हें यह निर्देश पिछले साल 18 जुलाई को तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमा खान के माध्यम से शेख हसीना से प्राप्त हुआ था।

23 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होने के बाद, पहले फैसला और सजा सुनाने की तारीख 14 नवंबर तय की गई थी। बाद में, 13 नवंबर को, आईसीटी ने घोषणा की कि वह हसीना और उनके दो शीर्ष सहयोगियों के खिलाफ मामले में 17 नवंबर को फैसला सुनाएगा, और अंततः यही हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि शेख हसीना की सजा की खबर बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह घटना न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में भी कई सवाल उठाती है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेख हसीना को सजा क्यों सुनाई गई?
उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराया गया है।
यह फैसला कब सुनाया गया?
यह फैसला 17 नवंबर को सुनाया गया।
शेख हसीना का विवाह कब हुआ था?
उनका विवाह 1967 में हुआ था।
शेख हसीना के बच्चे कौन हैं?
उनके बच्चे सजीब वाजेद जॉय और साइमा वाजेद पुतुल हैं।
क्या शेख हसीना पहले भी प्रधानमंत्री रह चुकी हैं?
हाँ, वह पाँच बार प्रधानमंत्री रह चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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