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ट्रंप की प्रशांत महासागर डीप-सी माइनिंग योजना का विरोध, 2.8 करोड़ हेक्टेयर पर नीलामी प्रस्ताव

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ट्रंप की प्रशांत महासागर डीप-सी माइनिंग योजना का विरोध, 2.8 करोड़ हेक्टेयर पर नीलामी प्रस्ताव

सारांश

ट्रंप प्रशासन की प्रशांत महासागर में 2.8 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में डीप-सी माइनिंग नीलामी की योजना ने गुआम, मारियाना और अमेरिकी समोआ को एकजुट कर दिया है। चीन पर खनिज निर्भरता घटाने की रणनीति और प्रशांत पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के बीच यह टकराव अब कानूनी अखाड़े में पहुँच गया है।

मुख्य बातें

18 अगस्त 2026 को मरीन मिनरल एडमिनिस्ट्रेशन (MMA) ने प्रशांत महासागर में 2.8 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में डीप-सी माइनिंग लीज नीलामी का प्रस्ताव जारी किया।
समुद्री तलछट में निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे खनिज हैं, जो बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए आवश्यक हैं।
उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के गवर्नर डेविड अपाटांग ने व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और पारदर्शिता की माँग की।
गुआम के लेफ्टिनेंट गवर्नर जोशुआ टेनोरियो ने कहा — अपर्याप्त अध्ययन वाले पर्यावरणीय जोखिम क्षेत्र पर नहीं थोपे जा सकते।
अमेरिकी समोआ के गवर्नर प्यूला निकोलाओ की सबसे बड़ी चिंता क्षेत्र के टूना मछली उद्योग पर संभावित असर को लेकर है।
अमेरिकी समोआ और हवाई के पर्यावरण समूहों ने योजना के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 18 अगस्त 2026 को प्रशांत महासागर में 2.8 करोड़ हेक्टेयर (लगभग 6.9 करोड़ एकड़) समुद्री क्षेत्र में डीप-सी माइनिंग लीज की नीलामी का प्रस्ताव जारी किया, जिसका तीखा विरोध शुरू हो गया है। उत्तरी मारियाना द्वीप समूह, गुआम और अमेरिकी समोआ के शीर्ष नेताओं ने पर्यावरण और स्थानीय मछली उद्योग पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।

प्रस्ताव का विवरण

अमेरिकी गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत एजेंसी मरीन मिनरल एडमिनिस्ट्रेशन (MMA) ने नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स और गुआम के तट के निकट समुद्री सतह के विशाल हिस्से में खनन लीज नीलाम करने का प्रस्ताव रखा है। इस क्षेत्र में स्थित मारियाना ट्रेंच की तलछट में निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं, जो बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए अनिवार्य कच्चे माल हैं।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि यह कदम महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और खनिज आयात के मामले में चीन पर निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। रिपोर्टों के अनुसार, इसे राष्ट्रीय हित का विषय बताया जा रहा है।

क्षेत्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के गवर्नर डेविड अपाटांग ने द गार्डियन से कहा कि उनका प्रशासन इस प्रस्ताव की बेहद सावधानी से समीक्षा करेगा। उन्होंने खनन आरंभ करने से पहले व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, पूर्ण पारदर्शिता और समुद्री संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग रखी है।

गुआम के लेफ्टिनेंट गवर्नर जोशुआ टेनोरियो ने योजना का स्पष्ट विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा या महत्वपूर्ण खनिजों की आवश्यकता के नाम पर प्रशांत क्षेत्र के लोगों को ऐसे पर्यावरणीय जोखिम स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जिनका अभी पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन ही नहीं हुआ है।

अमेरिकी समोआ के गवर्नर प्यूला निकोलाओ ने भी समुद्री खनन का विरोध किया है। उनकी प्रमुख चिंता क्षेत्र के महत्वपूर्ण टूना मछली उद्योग पर पड़ने वाले संभावित दीर्घकालिक असर को लेकर है।

कानूनी चुनौती और पर्यावरणीय खतरे

अमेरिकी समोआ और हवाई के पर्यावरण समूहों ने ट्रंप प्रशासन की इस योजना के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि सरकार ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित गंभीर प्रभावों का पर्याप्त आकलन नहीं किया। इन खतरों में समुद्री जीवों के आवास को नुकसान, समुद्र तल की तलछट का विक्षोभ और खनन गतिविधियों से उत्पन्न तीव्र ध्वनि प्रदूषण प्रमुख हैं।

गौरतलब है कि डीप-सी माइनिंग को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में भी आम सहमति नहीं है। अनेक समुद्री जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र की क्षति अपरिवर्तनीय हो सकती है।

व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को लेकर तनाव चरम पर है। ट्रंप प्रशासन घरेलू और मित्र-राष्ट्र स्रोतों से खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कई मोर्चों पर काम कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि पर्यावरणीय लागत और क्षेत्रीय समुदायों की सहमति के बिना यह रणनीति टिकाऊ नहीं होगी।

प्रशांत द्वीप समूह के नेताओं की यह एकजुट आपत्ति आने वाले हफ्तों में नीलामी प्रक्रिया पर कानूनी और राजनीतिक दबाव बढ़ा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि आर्थिक लाभ कहीं और जाता है। चीन पर खनिज निर्भरता घटाने का तर्क वैध है, लेकिन मारियाना ट्रेंच जैसे अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र में खनन की अपरिवर्तनीय क्षति का पर्याप्त आकलन किए बिना नीलामी की घोषणा, प्रक्रिया की कमज़ोरी उजागर करती है। टूना उद्योग पर खतरा केवल आर्थिक नहीं, सांस्कृतिक भी है — इन द्वीपों की पहचान और आजीविका समुद्र से अविभाज्य है। कानूनी चुनौतियाँ इस योजना को लंबे समय तक अटका सकती हैं, और अंततः यह परीक्षण होगा कि अमेरिका अपने ही क्षेत्रों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप प्रशासन की प्रशांत महासागर डीप-सी माइनिंग योजना क्या है?
यह मरीन मिनरल एडमिनिस्ट्रेशन (MMA) द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी वह प्रस्ताव है, जिसमें नॉर्दर्न मारियाना आइलैंड्स और गुआम के तट के निकट 2.8 करोड़ हेक्टेयर समुद्री क्षेत्र में खनन लीज नीलाम करने की योजना है। इसका उद्देश्य निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाना है।
इस योजना का विरोध कौन कर रहा है और क्यों?
उत्तरी मारियाना द्वीप समूह, गुआम और अमेरिकी समोआ के गवर्नर तथा अमेरिकी समोआ एवं हवाई के पर्यावरण समूह इसका विरोध कर रहे हैं। उनकी आपत्तियाँ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान, टूना मछली उद्योग पर असर और अपर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन को लेकर हैं।
डीप-सी माइनिंग से पर्यावरण को क्या खतरे हैं?
पर्यावरण समूहों के अनुसार इससे समुद्री जीवों के आवास को नुकसान, समुद्र तल की तलछट का विक्षोभ और खनन गतिविधियों से तीव्र ध्वनि प्रदूषण जैसे खतरे हैं। वैज्ञानिकों का एक वर्ग मानता है कि गहरे समुद्र के पारिस्थितिकी तंत्र की यह क्षति अपरिवर्तनीय हो सकती है।
अमेरिका डीप-सी माइनिंग क्यों करना चाहता है?
ट्रंप प्रशासन इसे चीन पर खनिज आपूर्ति की निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताता है। मारियाना ट्रेंच की तलछट में पाए जाने वाले निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
क्या इस योजना के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई हो रही है?
हाँ, अमेरिकी समोआ और हवाई के पर्यावरण समूहों ने ट्रंप प्रशासन की इस योजना के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। उनका आरोप है कि सरकार ने समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले संभावित गंभीर प्रभावों का पर्याप्त आकलन नहीं किया।
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