जी7 समिट: ट्रंप पहुंचे फ्रांस, मैक्रों दंपती ने एवियन में किया स्वागत; सहयोगियों से तनाव के बीच सबकी निगाहें
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 जून को जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंचे, जहाँ फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों ने उनका औपचारिक स्वागत किया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और जी7 सहयोगी देशों के प्रति ट्रंप के कड़े रुख की पृष्ठभूमि में यह शिखर सम्मेलन वैश्विक कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एवियन में ट्रंप का आगमन और स्वागत
ट्रंप सोमवार, 16 जून को एवियन पहुंचे, जहाँ इस वर्ष के जी7 समिट की मेज़बानी फ्रांस कर रहा है। राष्ट्रपति मैक्रों और ब्रिगिट ने उनका स्वागत किया। ट्रंप और मैक्रों के बीच वर्षों पुरानी जान-पहचान है, लेकिन हाल के महीनों में ट्रंप की मैक्रों को लेकर — और यहाँ तक कि उनकी वैवाहिक जीवन को लेकर — की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों ने दोनों नेताओं के संबंधों में खटास पैदा की है।
कथित तौर पर मैक्रों हाल के समय में अपने अमेरिकी समकक्ष के प्रति स्पष्ट रूप से नाराज़ दिखे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच इस शिखर सम्मेलन में किस तरह की बातचीत होती है, इस पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान समझौता
इस वर्ष फरवरी से पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में भारी तनाव जारी है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान ने एक शांति समझौते पर सहमति जताई है — यह घटनाक्रम जी7 से ठीक पहले वैश्विक कूटनीति में एक उल्लेखनीय मोड़ माना जा रहा है। इस पूरे संघर्ष के दौरान जी7 के सहयोगी देशों ने अमेरिका-इज़रायल अभियान में सक्रिय भागीदारी से परहेज किया, जो ट्रंप की नाराज़गी का एक प्रमुख कारण रहा है।
जी7 सहयोगियों से ट्रंप के संबंधों में तनाव
पिछले कुछ महीनों में ट्रंप ने जी7 के कई सहयोगी देशों के प्रति जिस तरह के कड़े और आलोचनात्मक बयान दिए हैं, उससे पुराने मतभेद एक बार फिर उभर आए हैं। यूरोपीय नेताओं में इस रुख को लेकर व्यापक नाराज़गी देखी जा रही है।
गौरतलब है कि ट्रंप के जी7 देशों के साथ संबंध उनके पहले कार्यकाल से ही तनावपूर्ण रहे हैं। उस दौर के शिखर सम्मेलनों में भी अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आए थे। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार, जलवायु नीति और सुरक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर पश्चिमी एकजुटता पहले से ही परीक्षण में है।
समिट में किन मुद्दों पर रहेगा फोकस
इस बार के जी7 शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक व्यापार, और सुरक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडे पर हैं। अमेरिका-ईरान शांति समझौते की पृष्ठभूमि में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ किस स्वर में संवाद करते हैं।
वैश्विक समुदाय की निगाहें इस बात पर भी हैं कि क्या यह समिट जी7 देशों के बीच बढ़ती दूरियों को पाटने में कोई भूमिका निभा सकता है, या मतभेद और गहरे होंगे।